Published On : Thu, Dec 14th, 2017

मुस्लिम समाज को आरक्षण देने से सरकार का इनकार

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नागपुर: मुस्लिम समाज को कानून बनाकर आरक्षण दिए जाने से राज्य सरकार ने मना कर दिया है। विपक्ष द्वारा विधानपरिषद में उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने साफ किया की समाज को ओबीसी कोटे में पहले से ही आरक्षण मिल रहा है। उच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए उन्होंने साफ़ किया शिक्षा में आरक्षण धर्म के आधार पर नहीं बल्कि जाति के आधार पर दिया जा सकता है। यह आरक्षण मुस्लिम समाज को पहले से ही मिल रहा है।

पिछली सरकार ने कानून बनाकर आरक्षण दिए जाने की पहल की थी जिसे कोर्ट में चुनौती दी गई। तत्कालीन सरकार के पास क्वांटिफिएबल डाटा तैयार करने के लिए तीन महीने का समय था लेकिन इसकी शुरूआत तक नहीं की गई। जबकि हमारी सरकार को महज़ हमें सिर्फ 40 दिन का समिला जबकि पिछली सरकार के पास 110 दिन समय मिला था। जो काम आप 110 दिन में नहीं कर पाए वह हम 40 दिन में कैसे कर सकते थे।

शिक्षा मंत्री के जवाब से असंतुष्ठ विपक्ष ने सभात्याग कर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रश्नकाल के दौरान सवाल उठाने वाले कांग्रेस के सदस्य ने अपनी बात रखते हुए कहाँ की वर्त्तमान सरकार ने जानबूझकर अध्यादेश को लेप्स किया जबकि अब नया बिल लाने का प्रयास भी होता नहीं दिखाई दे रहा है। तीन साल हो गए लेकिन अब तक इस पर एडवोकेट जनरल का मत लिया नहीं गया है। दत्त ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कानून बनाये जाने को लेकर सरकार से सफाई माँगी लेकिन तावड़े ने इसे ख़ारिज कर दिया। मंत्री के जवाब के बाद कांग्रेस के शरद रणपिसे, ख्वाजा बेग, हुस्नबानू खलिफे, भाई जगताप सहित अनेक सदस्यों ने इसका विरोध करते हुए युति सरकार को मुस्लिम विरोधी बताया और सभात्याग किया।

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इसी मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए नेता प्रतिपक्ष धनंजय मुंडे ने मंत्री के जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहाँ की यह सरकार किसी को भी आरक्षण नहीं देना चाहती। सवाल सिर्फ मुस्लिम भर का नहीं है सरकार का मानस है की वह धनगर, लिंगायत या कोई और समाज, किसी को आरक्षण नहीं देना है। उच्च न्यायालय ने मुस्लिम आरक्षण को शैक्षणिक क्षेत्र में अधिकृत माना है। उच्च न्यायालय ने नौकरी संदर्भ में आरक्षण कायम रहने, इसके लिए क्वांटिफिएबल डाटा देने के लिए सरकार से कहा था, लेकिन जान-बूझकर उच्च न्यायालय में यह डाटा दिया नहीं गया। इस कारण उच्च न्यायालय से आरक्षण को लेकर अलग निर्णय आया। मुस्लिम समाज में आर्थिक रूप से कमजोर लोगो को पांच फीसदी आरक्षण मिलाना चाहिए। सरकार के रुख का विपक्ष निषेध करता है।

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