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    Published On : Sun, Mar 8th, 2020

    सरकार या कार्पोरेट की मोहताज नहीं पत्रकार की साख स्व.भुवन भूषण देवलिया की पत्रकारिता आज भी प्रासंगिकःपीसी शर्मा

    भोपाल :स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया जैसे मूर्धन्य पत्रकारों ने सामाजिक जीवन में जो आदर्श प्रस्तुत किए हैं वह पत्रकारिता आज भी प्रासंगिक है। सरकारें या कार्पोरेट की मजबूरियां जो भी हों लेकिन इन सबके बीच प्रतिबद्ध पत्रकार समाज के प्रति अपनी पक्षधरता की मशाल लेकर आगे बढ़ते रहते हैं।

    पत्रकारों की यही सामाजिक प्रतिबद्धता समाज का मार्गदर्शन करती है और सम्मान पाती है। इस धरोहर को संजोकर रखने वाले नई पीढ़ी के पत्रकार आज आशा की नई किरण बनकर उभर रहे हैं।

    भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यान माला के अष्टम आयोजन में रविवार को प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने युवा पत्रकार और डिंडोरी में ईटीवी भारत के संवाददाता भीमशंकर साहू को सम्मानित करते हुए ये विचार व्यक्त किए।

    मीडिया ःप्रतिबद्धता और पक्षधरता का सवाल विषय पर माधव राव सप्रे संग्रहालय में आयोजित इस व्याख्यानमाला में प्रमुख वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार श्री नरेन्द्र कुमार सिंह, नागपुर के वरिष्ठ पत्रकार श्री एसएन विनोद,पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर, और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार श्री कमल दीक्षित ने इस मुद्दे के विविध आयामों पर प्रकाश डाला।

    उन्होंने माना कि पत्रकार की साख आज भी कायम है लेकिन जिस तरह कार्पोरेट घरानों और सरकारों ने मीडिया संस्थानों के संचालन की बागडोर थाम ली है उसकी वजह से आज की पत्रकारिता भी सवालों के घेरे में आ गई है। पत्रकार और संपादक गण यदि बुद्धिमत्ता से काम करें तो वे समाज के सामने नए आदर्श प्रस्तुत कर सकते हैं।

    प्रमुख वक्ता के रूप में श्री नरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि आम जनता पत्रकार को निष्पक्ष देखना चाहती है लेकिन जिस तरह से उनकी पक्षधरता की छवि बन रही है उसके चलते आज चैनलों के रिपोर्टरों को अपने लोगो छुपाने पड़ रहे हैं। विचारधारा के आधार पर उन्हें गोदी मीडिया या टुकड़े टुकड़े गेंग शब्दों से लांछित किया जा रहा है।

    सेलिब्रिटीज पत्रकारों के व्यवहार ने जनता के मन में पूरी पत्रकार बिरादरी के प्रति चिढ़ का भाव पनपा दिया है। इस दौर में हमें प्रयास करना होगा कि पत्रकारिता की पवित्रता प्रभावित न हो। पत्रकारिता का शाश्वत नियम है कि खबरों के तथ्यों से कोई छेड़छाड़ न हो। ऐसा करके हम समाज का सही मार्गदर्शन कर सकते हैं।

    प्रमुख वक्ता के रूप में ही नागपुर से आए वरिष्ठ पत्रकार एसएन विनोद ने कहा कि विश्वसनीयता की कसौटी पर पत्रकारिता पराजित हो चुकी है आज वह अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। जिसे मुख्य धारा की पत्रकारिता कहा जाता है उसके पत्रकारों से यदि चर्चा की जाए तो उनका उथलापन उजागर हो जाता है।

    पत्रकारिता की साख में आ रही गिरावट की सबसे बड़ी वजह यही है कि कार्पोरेट घरानों और सरकारों ने दोयम दर्जे के पत्रकारों की सहायता से अपना एजेंडा चलाकर पत्रकारिता को बाजारू बना दिया है।

    संपादक यदि बुद्धिमान है तो वह मीडिया के संचालकों को उचित राय देकर जनहित की खबरों का प्रकाशन या प्रसारण निर्बाध रख सकता है। दरअसल में कोई भी मीडिया संस्थान का संचालक नहीं चाहता कि उसके माध्यम की साख धूल धूसरित हो।

    यदि संपादक उन्हें तार्किक वजह बताएंगे तो वे कभी मीडिया के दुरुपयोग की इजाजत नहीं देंगे। पत्रकारों ने यदि सत्ता और बाजार के सामने समर्पण कर दिया तो न केवल पत्रकारिता खत्म हो जाएगी बल्कि लोकतंत्र भी जिंदा नहीं रह पाएगा।

    पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए जरूरी है कि वे अपना नजरिया केवल राजनीति के इर्दगिर्द सीमित न रखें। राजनेताओ का फैसला तो जनता कर लेगी। हमें विकास के मुद्दों को अपनी पत्रकारिता का पैमाना बनाना होगा।

    जिस तरह से सोशल मीडिया के माध्यम से समाज अपनी ऊर्जा व्यर्थ कर रहा है उसे देखते हुए सरकार को देश में तीसरा प्रेस आयोग गठित करना चाहिए जो आज के संदर्भ में पत्रकारिता के ढांचे में मूलभूत सुधार करे। पत्रकारिता की खामियों को बतोलेबाजी से दूर नहीं किया जा सकता इसके लिए हमें संवाद की न्यायिक विवेचना करनी होगी तभी इसे सार्थक बनाया जा सकेगा।

    पत्रकारिता के गुरु कमल दीक्षित ने कहा कि पत्रकारिता को प्रतिबद्धता की ओर मोड़ने से पहले उसे भावनात्मक मुद्दों की रस्सियों से बांधा जाता है। चाहे दलित विमर्श हो या फिर जातिगत भेदभाव की संकरी गलियां,सभी में दिलों को द्रवित करने वाली कहानियां सुनाई जाती हैं।

    दुष्प्रचार या प्रचार का अस्त्र बनने वाली पत्रकारिता को बचाने के लिए जरूरी है कि पत्रकार तार्किक हों और तथ्यों के आधार पर खबरें लिखें। बस इतना करना ही पत्रकारिता के उद्देश्यों को पूरा कर देगा। जब पत्रकार अपने काम को कैरियर मानने लग जाते हैं तो फिर उन्हें संचालकों के अधिक मुनाफा कमाने वाले सोच की पैरवी करनी पड़ती है।

    यही एक व्यवसाय है जिसमें आय के तीन स्रोत हैं यदि नैतिकता की लगाम ढीली कर दी जाए तो फिर मुनाफा तो कमाया जा सकता है लेकिन साख नहीं। कई घटनाओं में पत्रकारों ने न्यूज पोर्टल के माध्यम से वैकल्पिकता तलाश ली है।

    यही वजह है कि आम पाठक का भरोसा भले ही मीडिया संस्थान से डिग रहा हो लेकिन उसकी नजर में पत्रकार आज भी भरोसे का शिलालेख है।

    सवाल जवाब के दौर में वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने कहा कि आज की पत्रकारिता के सामने कोई संकट नहीं हैं। मतभिन्नता तो हमेशा से रही है इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। वक्त के साथ जो चलेगा वही जिंदा रहेगा।

    आपातकाल के दौरान जिस तरह से पत्रकारिता का दमन किया गया वैसे दुहराव की तो आज कल्पना भी नहीं की जा सकती। पत्रकार यदि तथ्यों की सच्चाई पर टिके रहें तो फिर पत्रकारिता की साख को कोई कमजोर नहीं कर सकेगा।

    स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यानमाला समिति की ओर से सर्वश्री राजेश सिरोठिया, श्री राजीव सोनी, श्री शिवकुमार विवेक, सुश्री अरुणा दुबे ने अतिथियों को स्मृतिचिन्ह, और तुलसी का पौधा देकर उनका अभिनंदन किया।स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया की धर्मपत्नी श्रीमती कीर्ति देवलिया ने पुण्य आत्मा के स्मरण के लिए सभी आगंतुकों के प्रति भाव प्रवण धन्यवाद ज्ञापित किया।

    जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने स्वर्गीय देवलिया जी के चित्र पर माल्यार्पण किया और उनके कृतित्व का स्मरण किया। आभार प्रदर्शन वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरिया ने किया।

    आयोजन में शहर के कई गणमान्य अतिथियों ने भी शिरकत की जिनमें पूर्व सूचना आयुक्त आत्मदीप, डॉ. हितेष वाजपेयी, अनिल सौमित्र, आशीष दुबे, योगीराज योगेश, रघुवीर तिवारी, प्रेम पगारे, अभय प्रधान, आदिल खान, राजीव गांधी कालेज के संचालक डॉ.साजिद अली, संजीव शर्मा, राजेश रावत,राकेश भट्ट शामिल थे।

    आयोजन समिति की ओर से अशोक मनवानी, डॉ अपर्णा एलिया, आशीष देवलिया, शैलजा सिंघई ने अतिथियों की स्वागत किया। दूरदर्शन के न्यूज एंकर आदित्य श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संचालन किया।


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