Published On : Fri, Dec 23rd, 2016

प्रचार के आभाव में कैसे पनपेगा गोरेवाड़ा बायोपार्क का जंगल और साइकल सफारी पर्यटन

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File Pic: Fadnavis inaugurates Gorewada Wildlife Rescue Center

नागपुर: गोरेवाड़ा अंतरराष्ट्रीय बायोपार्क भले अपने सकल रूप में साकार अब तक ना हुआ हो लेकिन इस परियोजना की ओर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पिछले वर्ष मुख्यमंत्री देवेंद्र फडवीस के हाथों जंगल सफारी का उद्घाटन किया गया था। इसके कुछ दिनों बाद साइकल सफारी की सेवा शुरू की गई। इस उम्मीद के साथ की ये दोनों सफारियां आनेवाले दिनों में आर्थिक तौर पर मिसाल साबित होंगी। लेकिन साल भर बाद दोनों सफारियों के आंकन से ऐसा होता कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा है। बीते 17 दिसंबर को जंगल सफारी को शुरू हुए पूरे एक वर्ष हो चुके हैं। लेकिन परिणाम बहुत ज्यादा उत्साह वर्धक आते दिखाई नहीं दे रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार साल भर में गोरेवाड़ा जंगल सफारी में अब तक केवल 1800 सौ वाहनों की ही एंट्री हो पाई है। अर्थात प्रतिदिन औसतन 4 वाहनों की एंट्रियां। जबकि इसी जंगल सफारी से तकरीबन 4 लाख रुपए की आय होने की जानकारी दी गई है। इसका सीधा अर्थ है कि तीन माह में केवल 1 लाख और प्रतिदिन केवल 11 सौ रुपए की आय ही जंगल सफारी के दौरान हो पाई है। प्रति दिन 11 सौ रुपए का अर्थ है हर औतसन केवल दो वाहनों की एंट्री ही सफारी के माध्यम से हो पाई है।

केवल जंगल सफारी ही नहीं साइकल सफारी का हाल हो इससे बदतर दिखाई दे रहा है। मल्टिगेयर, हेलमेट व अन्य सुविधाओं से लैस 6 साइकलों की खरीदी साइकल सफारी के लिए की गई थी। 5 साइकल सवारों के साथ एक गाइड का दल साइकल सफारी का लुत्फ ले सकता था। इसके लिए प्रति व्यक्ति 600 रुपए की फीस रखी गई थी। लेकिन बीते दस माह में इस जंगल सफारी के माध्यम से तकरीबन 12 हजार रुपए ही मिलने की जानकारी विभागीय प्रबंधक द्वारा प्राप्त हुई है। 12 हजार 10 माह के अर्थात प्रतिमाह 1200 रुपए। इसका सीधा अर्थ है महीने में केवल दो समूह ही साइकल सफारी का आनंद ले रहे हैं। हर दिन केवल 40 रुपए। प्रति व्यक्ति साइकल सफारी के लिए 600 रुपए की कीमत वसूली जाती है। शर्त यह होती है कि साइकल सफारी 5 साइकलों के एक समूह में ही छोड़ी जाती है। 600 रुपए प्रति साइकल के हिसाब से 5000 रुपए प्रति ग्रुप की दर से अर्थात दस माह में अधिक से अधिक केवल 3 ट्रिप ही पाई है। अधिकारी साइकल सफारी के फ्लॉप होने के पीछे उचित मार्केटिंग और प्रचार प्रसार की कमी को दोष दे रहे हैं। बता दें कि गोरेवाड़ा बायोपार्क को अपने आंखों का सपना कहकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी ने इसे साकार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की बात सरकार में आने से पहले की थी। लेकिन इसे पर्यटन के लिहाज से लोकप्रिय बनाने की ओर सरकार की ओर से गंभीर प्रयास होते नहीं दिखाई दे रहे हैं।

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गोरेवाड़ा परियोजना की ओर पर्यटकों का ध्यान खींचने के लिए जंगल सफारी के अलावा नाइट सफारी भी शुरू की गई थी। लेकिन नाइट सफारी के लिए अधिक पर्यटक विभाग को मिलते दिखाई नहीं दे रहे हैं। जबकि नाइट सफारी किसी भी अभ्यारण्य, टाइगर रिजर्व या नेशनल पार्क जैसे जगहों में करने का मौका नहीं मिल पाता। गोरेवाड़ा बायोपार्क प्राकृतिक रूप से सुंदर है। यहां हिरण, नील गाय, मोर, लांडोर, जंगली सुअर, तेंदुए आदि कई वन्यजीवों का वास है। साथ ही गोरेवाड़ा तालाब की सुंदर छटा अपने आप में अद्वितीय है बावजूद इसके इसे निखारने के प्रयासों के प्रति उदासीन रवैय्या परियोजना को ठंडा करने में लगे हुए हैं।

प्रतिसाह भी कोई अधिक उतसाह वर्धक नहीं है। साइकल सफारी को शुरू हुए साल भर अभी पूरा होने के है। लेकिन दस माह के इस कार्यकाल में साइकल सफारी के जरिए केवल 12 हजार रुपए ही प्राप्त हो सके हैं। दस माह में 12000 का अर्थ है प्रतिमाह 1200 रुपए अर्थात 40 रुपए प्रति दिन। प्रति व्यक्ति साइकल सफारी के लिए 600 रुपए की कीमत वसूली जाती है। शर्त यह हवोती है कि साइकल सफारी 5 साइकलों के एक समूह में ही छोड़ी जाती है। 600 रुपए प्रति साइकल के हिसाब से 5000 रुपए प्रति ग्रुप की दर से अर्थात दस माह में अधिक से अधिक केवल 3 ट्रिप ही पाई है। अधिकारियों से पूछे जाने पर इसके पीछे उचित जनप्रचार ना होने का मुख्य कारण बताया जा रहा है। फिलहाल देखना दिलचस्प है।

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