Published On : Fri, Aug 11th, 2017

गोरखपुर बीआरडी हॉस्पिटल में 30 बच्चो की मौत, ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से हुआ हादसा

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गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सिस्टम की जानलेवा लापरवाही से अचानक मौतों का ग्राफ बढ़ गया। सूत्रों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में करीब 30 मासूमों को जान गंवानी पड़ी है। सिर्फ दो दिन पहले नौ अगस्त की शाम को सीएम योगी आदित्यनाथ मेडिकल कालेज का हाल देखकर गये थे।

महज 69 लाख रुपये बकाये के नाम पर मेडिकल कॉलेज को ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म ने अचानक सप्लाई ठप कर दी। ऐसे में जम्बो सिलेंडरों और अम्बू बैग से मरीजों को बचाने की कोशिश की जाती रही लेकिन शुक्रवार की शाम होते-होते 30 मासूम इस अव्यवस्था की भेंट चढ़ गये।

मरने वालों में दस मासूम इंसेफेलाइटिस वार्ड में और दस एनएनयू (न्यूनेटल यूनिट) में भर्ती थे। ताज्जुब है कि इतनी बड़े संकट के बावजूद डीएम या कमिश्नर में से कोई भी शुक्रवार को दिन भर बीआरडी मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचा। जबकि मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों का कहना था कि दोनों अधिकारियों को मामले की जानकारी दे दी गई थी। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचते तो क्राइसिस मैनेजमेंट आसान हो जाता।

बुधवार को ही लिक्विड ऑक्सीजन का टैंक पूरी तरह से खाली हो गया था। मंगाए गए ऑक्सीजन सिलेंडर भी खत्म हो गए। इसके बाद कालेज में हाहाकार मच गया। बेड पर पड़े मासूम तड़पने लगे। डॉक्टर और तीमारदार एम्बू बैग से ऑक्सीजन देने की कोशिश करने लगे। हालांकि उनकी यह कोशिश नाकाफी साबित हुई। इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरने वालों में जुनैद, अब्दुल रहमान, लवकुश, ज्योति, शालू, खुशबू, फ्रूटी, शिवानी और अरूषी शामिल थी।

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गुरुवार से शुरू हुआ संकट
बीआरडी में ऑक्सीजन की आपूर्ति का संकट गुरुवार को तब शुरू हुआ जब लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में गैस खत्म हो गई। संकट को देखते हुए गुरुवार को दिन भर 90 जंबो सिलेंडरों से ऑक्सीजन की सप्लाई हुई। रात करीब एक बजे यह खेप भी खप गई। जिसके बाद अस्पताल में कोहराम मच गया। साढ़े तीन बजे 50 सिलेंडरों की खेप लगाई गई। यह सुबह साढ़े सात बजे तक चला।

सुबह फिर मचा कोहराम
वार्ड 100 बेड में भर्ती इंसेफेलाइटिस के 73 में से 54 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। सुबह साढ़े सात बजे ऑक्सीजन खत्म फिर खत्म हो गई। जिसके बाद वार्ड 100 बेड में हंगामा शुरू हो गया। एम्बुबैग के सहारे मरीजों को ऑक्सीजन दी गई। तीमारदारों के थक जाते ही डॉक्टर एम्बुबैग से ऑक्सीजन देते रहे।

लापरवाही से बढ़ता गया बकाया
बीआरडी में दो वर्ष पूर्व लिक्विड ऑक्सीजन का प्लांट लगाया गया। इसके जरिए इंसेफेलाइटिस वार्ड समेत 300 मरीजों को पाइप के जरिए ऑक्सीजन दी जाती है। इसकी सप्लाई पुष्पा सेल्स करती है। कंपनी के अधिकारी दिपांकर शर्मा ने प्राचार्य को पत्र लिखकर बताया है कि कालेज पर 68 लाख 58 हजार 596 रुपये का बकाया हो गया है। बकाया रकम की अधिकतम तय राशि 10 लाख रुपये है। बकाया की रकम तय सीमा से अधिक होने के कारण देहरादून के आईनॉक्स कंपनी की एलएमओ गैस प्लांट ने गैस सप्लाई देने से इनकार कर दिया है।

इतनी मौतों के बाद आखिर शुरू हुई सप्लाई
बीआरडी में गुरुवार की शाम से ही बच्चों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया। एक-एक कर बच्चों की हो रही मौत से परेशान डॉक्टरों ने पुष्पा सेल्स के अधिकारियों को फोन कर मनुहार की। उधर कालेज प्रशासन ने 22 लाख रुपये बकाया के भुगतान की कवायद शुरू की। जिसके बाद पुष्पा सेल्स के अधिकारियों ने लिक्विड ऑक्सीजन के टैंकर को भेजने का फैसला किया। हालांकि यह टैंकर भी शनिवार की शाम या रविवार तक ही बीआरडी पहुंचेगा।

पहले भी फर्म ठप कर चुकी है सप्लाई
बीते वर्ष अप्रैल में भी फर्म का बकाया करीब 50 लाख रुपये हो गया। फर्म ने कई बार बकाया भुगतान के लिए पत्र लिखा। आरोप है कि भुगतान न मिलने पर फर्म ने आपूर्ति ठप कर दिया। इसके बाद जमकर हंगामा हुआ।

ये वार्ड हुए प्रभावित
ट्रॉमा सेंटर
100 बेड वाला इंसेफेलाइटिस वार्ड
नियोनेटल यूनिट
इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड-14
मेडिसिन आईसीयू
एपीडेमिक मेडिसिन वार्ड-12
बालरोग वार्ड 6
वार्ड नंबर 2
एनेस्थिसिया आईसीयू
लेबर रूम
जनरल सर्जरी, न्यूरो सर्जरी ओटी

प्रशासन ने नजर फेरी, एसएसबी ने की मदद
बीआरडी में ऑक्सीजन के संकट ने पूरे अस्पताल प्रशासन को घुटनों के बल ला दिया। डॉक्टरों ने प्रशासनिक अधिकारियों को संकट की जानकारी दी, मदद भी मांगी। मगर जिले के आला अधिकारी बेपरवाह रहे। ऐसे में मदद को आगे आया एसएसबी व कुछ प्राइवेट अस्पताल। सशस्त्र सीमा बल के अस्पताल से बीआरडी को 10 जंबो सिलेंडर दिए।

ऑक्सीजन खत्म होने की खबर कर्मचारियों ने रात दो बजे ही वार्ड 100 बेड के प्रभारी डॉ. कफील खान को दी। वह रात में ही चल दिए। तड़के तीन बजे से ही वार्ड में जमे रहे। इसके बाद से ही वह ऑक्सीजन सिलेंडरों के इंतजाम में लगे रहे। सुबह सात बजे जब किसी बड़े अधिकारी व गैस सप्लायर ने फोन नहीं उठाया तो डॉ. कफील ने डॉक्टर दोस्तों से मदद मांगी। अपनी गाड़ी से ऑक्सीजन करीब एक दर्जन सिलेंडरों को ढुलवाया।

एसएसबी ने दिए 10 सिलेंडर
मासूमों को तड़पता देखकर डॉ. कफील ने एसएसबी से मदद मांगने का फैसला किया। वह एक कर्मचारी को लेकर बाईक से ही एसएसबी के डीआईजी के पास गए। डीआईजी एसएसबी ने तत्काल 10 ऑक्सीजन सिलेंडर दिया। इतना ही नहीं एक ट्रक भी भेजा जिससे कि कालेज प्रशासन दूसरी जगहों से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगा सके।

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