Published On : Mon, Aug 6th, 2018

फेरी बढ़ाने के लिए निविदा नियमों की दी गई तिलांजलि

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नागपुर: एक ओर बचत और मुनाफा के नाम पर वेकोलि अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक राजीव रंजन मिश्रा आंकड़ों की कलाबाजी दिखा कर खुद की पीठ थपथपाते नहीं थक रहे दूसरी ओर इनके अधीनस्त मुख्य सतर्कता अधिकारी की निष्क्रियता के कारण नार्थ वणी के मुख्य महाप्रबंधक एक ट्रांसपोर्ट कंपनी से साठगांठ कर खुलेआम वेकोलि को को चुना लगा रहे.उक्त संगीन आरोप महाबल मिश्रा गुट की इंटक नेता आबिद हुसैन ने लगाया और शीघ्र ही यह मामला सह सबूत पेश कर ‘सीवीसी’ और ‘सीबीआई’ से स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जाँच करवाने की मांग करेंगे।

हुसैन के अनुसार नार्थ वणी वेकोलि मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय अंतर्गत उकनी खदान के ‘स्टॉक’ से ‘सीएचपी’ में कोयला खाली करने का ठेका १८ नवंबर २०१७ को विवादित पंजाब ट्रांसपोर्ट को दिया गया था.निविदा शर्तो के हिसाब से उक्त कंपनी को कुल ९०००० टन कोयला का परिवहन रोजाना कम से कम २५०० टन कुल ४५ दिनों का समयावधि दी गई थी.जिसके एवज में प्रति टन २९ रूपए वेकोलि देना तय किया गया था.

शर्तो के मुताबिक उक्त कंपनी को ‘स्टॉक क्रमांक ६’ से कोयला उठाकर कांटा करवाकर ‘सीएचपी’ में डालना था.फिर खाली गाड़ी पुनः ‘स्टॉक’ तक लाना और ले जाना का जिम्मा था.इसके बाद ‘सीएचपी’ में कोयला ‘क्रश’ होने के बाद ‘क्रश’ किया कोयला लोड कर उसका कांटा करवाकर ‘स्टॉक’ तक पहुँचाने का ठेका दिया गया था.कोयला ‘स्टॉक’ से ‘सीएचपी’ तक आवाजाही की दुरी १.१५ किलोमीटर थी.एक बार कोयला स्टॉक से उठाने फिर कांटा करने के बाद सीएचपी तक पहुँचाने में कम से कम आधा से पौन घंटा लगता हैं.

लेकिन आरटीआई कार्यकर्ता आबिद हुसैन को वेकोलि प्रबंधन द्वारा आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार ४ से २१ मिनट में एक एक फेरी दर्शाई गई.जिसकी सीसीटीवी फुटेज १० अप्रैल २०१८ को मांगी गई तो देने में आनाकानी की जा रही हैं.

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उक्त धांधली पर आबिद हुसैन का कहना हैं कि कोयला उत्खनन के दौरान बड़ा-बड़ा आकर का कोयला होता हैं.’स्टॉक’ से सीएचपी’ तक लाने-ले जाने में समय की बर्बादी से बचने के लिए कांटा पर तैनात कर्मियों को वश में कर ‘स्टॉक’ से सीधे कोयला रेलवे साइडिंग ले जाया जा रहा.नियमानुसार यहाँ से रेलवे के रैक द्वारा महाजेनको जा रही.लेकिन बड़ा सवाल यह हैं कि महाजेनको निम्न दर्जे का कोयला आपूर्ति का अनगिनत दफे वेकोलि प्रबंधन से कटे रहा हैं.इसका साफ़ अर्थ यह हैं कि साइडिंग के नाम पर कोयले निकट के लाल पुलिया कोयला बाजार में पहुंचाया जा रहा,इसके बदले वहां से छटाई की हुई निम्न दर्जे का कोयला साइडिंग तक पहुँच रहा.फिर यहाँ से रेलवे द्वारा महाजेनको तक पहुँचाया जा रहा.लाल पुलिया कोयला बाजार में लगभग १२५ छोटे बड़े कोयला व्यापारी हैं.इनके ग्राहक आसपास के छोटे बड़े उद्योग हैं,जो कोयले पर आधारित हैं,इन्हें दर्जेदार कोयला उपलब्ध करवाकर एक बाजार रातों रात पनपते जा रही,क्यूंकि इस बाजार में कोयला की आवाजाही अधिकांश रात से पैटिया सुबह तक होती हैं.इसलिए हुसैन से ‘सीवीसी’,सीबीआई,सीआईएल,कोयला मंत्रालय से उक्त मामले की सूक्ष्म जाँच स्वतंत्र एजेंसी से करवाने की मांग की हैं.
इस संबंध में हुसैन १ अगस्त २०१८ को वेकोलि ‘सीएमडी’ से मिलने की कोशिश की,वे बारंबार अलग-अलग समय देकर टालते रहे.मामले को लेकर ‘सीवीओ’ के समक्ष पहुंचे तो जाँच का आश्वासन दिया।

अचंभित रिपोर्ट लगी हाथ
उकनी खुली खदान से सम्बंधित २४ नवंबर से ३१ दिसंबर २०१७ तक की एक रिपोर्ट जो दर्शा रही थी कि कोयला उत्पादन और वितरण कब और कितना हुआ.उक्त कालावधि में उत्पादन से ज्यादा वितरित की गई.१६ दिसंबर से १९ दिसंबर तक उत्पादन का लगभग दोगुणा वितरण किया गया.२९ दिसंबर को सिर्फ उत्पादन से कम वितरित किया गया.रिपोर्ट का नमूना संलग्न हैं.
बाहर-बाहर मुआयना करने भेजा था – सीवीओ

गत सप्ताह वेकोलि के नार्थ वणी क्षेत्र अंतर्गत उकनी खदान से कोयला चोरी का मामला नागपुर टुडे ने अपने पोर्टल पर प्रकाशित किया था. साथ ही यह भी संभावना जताई थी कि वेकोलि प्रबंधन जांच के नाम पर लीपापोती कर मामला दबाने की कोशिश कर सीएमडी को बचाने की जुगत लगाएगा.

हुआ भी ऐसा ही. उक्त मामला के सार्वजनिक होते ही वेकोलि प्रबंधन के रोंगटे खड़े हो गए. वेकोलि के विजिलेंस विभाग प्रमुख ने आनन-फानन में विभाग प्रमुख की नज़र में ढीले-ढाले अधिकारी-कर्मी की एक टीम बनाकर शनिवार को उकनी खदान रवाना किया.

जब ‘सीवीओ’ कार्यालय पहुँच ‘सीवीओ’ से हुसैन ने जाँच की रिपोर्ट की मांग की तो ‘सीवीओ’ ने उन्हें साफ़ शब्दों में जवाब दिया कि हमने जो टीम भेजी थी,उसे निर्देश दिया था कि बाहर-बाहर मुआयना कर आओ.हुसैन ने ‘सीवीओ’ को जानकारी दी कि भेजी गई टीम नार्थ वणी के वेकोलि वीआईपी अतिथिगृह में पेट-पूजा करते पाए गए,जब उनसे मिलने पहुंचे तो जाँच दल में शामिल पाटिल ने उन्हें नागपुर में आने का निर्देश दिया। ‘सीवीओ’ ने हुसैन के जवाब सुन हरकत में आने के बजाय उलट हुसैन से उक्त प्रकरण का वीडियो की मांग की,फिर जाँच करने का आश्वासन दिया। यह भी कह गए कि जाँच के लिए दूसरे अधिकारी को भेजेंगे। हुसैन के अनुसार ‘सीवीओ’ कैडर के नहीं होने के कारण ‘सीएमडी’ से दब रहे हैं.

डोजर के सैकड़ों रेडिएटर गायब
हुसैन के अनुसार उक्त ‘सीजीएम’ कार्यालय अंतर्गत पिंपलगांव खुली खदान जो वर्ष २०१७ में बंद हुआ था.बंद खदान का कबाड़ व १४२ डोजर का रेडिएटर गायब होने की जानकारी प्रकाश में आई.तब यहाँ कृष्णा मिश्रा नामक सुरक्षा रक्षक तैनात था.३ माह पूर्व जब मिश्रा का तबादला कर दिया गया और उसके जगह दूसरा सुरक्षा रक्षक तैनात किया गया.फिर उक्त चोरी को लेकर नए सुरक्षा रक्षक पर ‘सीजीएम’ कार्यालय दबाव बना रहा हैं.

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