Published On : Fri, Apr 16th, 2021

किसानों के लिए खुशखबरी- इस साल मानसून सीजन में होगी अच्छी बारिश

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भारतीय मौसम विभाग का पहला अनुमान जारी

भारतीय मौसम विभाग ने चार महीने जून – जुलाई – अगस्त – सितंबर महीने में अच्छी बारिश की उम्मीद जताई है.
देश में लगातार तीसरे साल मानसून सामान्य रह सकता है. मानसून विभाग के मुताबिक इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य सामान्य का 98 फीसदी रहने का अनुमान है. प्रेस कॉनफ्रेंस में मौसम विभाग ने बताया कि मानसून के दौरान इस साल ला-नीना (La-Nina) की संभावना काफी है. आपको बता दें कि 96 फीसदी से 104 फीसदी के बीच हुई बारिश को औसत या सामान्य मानसून के रूप में परिभाषित किया जाता है. आमतौर पर 1 जून के आसपास केरल के रास्ते दक्षिण पश्चिमी मानसून भारत में प्रवेश करता है. 4 महीने की बरसात के बाद यानी सितंबर के अंत में राजस्थान के रास्ते मानसून की वापसी होती है.

मौसम विभाग ने कहा-
आईएमडी का कहना है इस साल का ज्यादातर हिस्सों में सामान्य मानसून का अनुमान है. मई में मानसून का का दूसरा अनुमान जारी होगा.

किसानों के लिए आई खुशबरी
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के करीब 20 करोड़ किसान धान, गन्ना, मक्का, कपास और सोयाबीन जैसी कई फसलों की बुआई के लिए मानसून की बारिश का इंतजार करते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि देश की खेती लायक करीब 50 फीसदी जमीन में सिंचाई की सुविधाओं की कमी है. इसके चलते कृषि उत्पादन का भारत की अर्थव्यवस्था में सिर्फ 14 फीसदी की भागीदारी है. हालांकि, यह सेक्टर देश की करीब 65 करोड़ से अधिक आबादी को रोजगार देता है. भारत की आबादी करीब 130 करोड़ है यानी करीब 50 फीसदी लोगों को खेती-किसानों में रोजगार मिला हुआ है.

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क्या होता है अल-नीनो
अल-नीनो की वजह से प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह गर्म हो जाती है, इससे हवाओं का रास्ते और रफ्तार में परिवर्तन आ जाता है जिसके चलते मौसम चक्र बुरी तरह से प्रभावित होता है.मौसम में बदलाव के कारण कई स्थानों पर सूखा पड़ता है तो कई जगहों पर बाढ़ आती है. इसका असर दुनिया भर में दिखाई देता है. अल नीनो बनने से भारत और आस्ट्रेलिया में सूखा पड़ता है, जबकि अमेरिका में भारी बारिश होती है.जिस वर्ष अल-नीनो की सक्रियता बढ़ती है, उस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून पर उसका असर निश्चित रूप से पड़ता है. भारत में दक्षिण पश्चिमी मानसून को ही मानसून सीजन कहा जाता है क्योंकि जून से सितंबर तक 70 फीसदी बारिश इन्हीं चार महीनों के दौरान होती है. भारत में अल नीनो के कारण सूखे का खतरा सबसे ज्यादा रहता है.

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