Published On : Tue, Apr 28th, 2020

गोंदिया: बार और देशी दारू दुकान पर एक्साइज विभाग की दस्तक

बार और कंट्री लिकर दोनों लायसेंस पर केस दर्ज

गोंदिया: कोरोना वायरस की रफ्तार को थामने के लिए केंद्र सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन लागू कर रखा है । इस दौरान समूचे महाराष्ट्र में भी शराब की खरीद-फरोख्त पर राज्य सरकार की पाबंदी लगी हुई है । जिला आबकारी विभाग को इस बात की सूचना मिली कि मुर्री क्षेत्र में रेलवे क्रॉसिंग से FCI गोदाम जाने वाले मार्ग पर नंगपुरा मुर्री इलाके में स्थित दुकानदार द्वारा चोरी-छिपे शराब की बोतलें अधिक दाम पर बेची जा रही है। लिहाज़ा 27 अप्रैल सोमवार को दोपहर 12 बजे आबकारी विभाग अधिकारियों का एक दल 2 गाड़ियों में सवार होकर दस्तक देने पहुंचा ।

एक्साइज विभाग की यह जांच कार्रवाई तकरीबन 5 घंटे तक चली।
हमने इस प्रकरण पर अधिक जानकारी के लिए जिला आबकारी विभाग अधीक्षक प्रवीण तांबे से बात की उन्होंने कहा- यह हमारी रूटिंग कार्रवाई है, जिनकी हमें कंप्लेंट आती है कि शराब बेच रहे या जिन पर हमें संक्षय आता है तो उनके लाइसेंस का हम इंस्पेक्शन करते हैं इसमें उसने नियम कायदे के हिसाब से दुकान चलाया कि नहीं ? ओर कुछ गलत आया तो लाइसेंस के उल्लंघन का केस दर्ज करते हैं। इसमें कुछ सीवियर ब्रिज केस होते हैं कुछ नॉमिनल ब्रिज के केस होते हैं तो उसके हिसाब से फाईन या लाइसेंस सस्पेंशन की कार्रवाई होती हैं। इसमें बार और कंट्री लिकर दोनों लायसेंस पर केस दर्ज हुआ है ‌।


मसलन एक पर स्टॉक बरोबर नहीं मिला।
21 मार्च की रात को दुकान बंद करने से पहले तीन-चार दिन का रजिस्टर मेंटेन नहीं किया था वह अनकंप्लीट था , कैश मेमो देना पड़ता है , कैश मेमो नहीं दिए गए थे ? फॉरेन लिकर के लिए और कंट्री लिकर के लिए अलग-अलग रूल्स है जैसे मान लो -अगर माल बेचा तो स्टॉक कम होना चाहिए ? उसका क्लोजिंग रजिस्टर के हिसाब से उतना स्टॉक है क्या ? उससे कम है तो क्यों हैं ? उन्ही 4- 5 मुद्दों के आधार पर इंस्पेक्शन हुआ और इसमें 5 घंटे का समय लगा क्योंकि दो लाइसेंस थी।

एक लाइसेंस को दो से ढाई घंटे का वक्त तो लगता ही है , कल रात को हमारा इंस्पेक्शन खत्म हुआ । आज ही इंस्पेक्शन किया और आज ही कार्रवाई हो ऐसा नहीं होता ? अहवाल रिपोर्ट सादर करने के बाद संबंधित को कलेक्टर ऑफिस से शो -कॉज नोटिस जारी होता है उसको जवाब देने के लिए 7 या 15 दिन का टाइम देना पड़ता है उसका जवाब आने के बाद कार्रवाई होती है।

गौरतलब है कि आबकारी विभाग द्वारा तय नियमों की अवहेलना करते हुए यदि कोई अनुज्ञाधारी अपनी मनमर्जी के मुताबिक शराब विक्रय का कारोबार करता है तो ऐसे में लाइसेंस का उल्लंघन सामने आने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
जिला आबकारी विभाग ने निर्धारित नियमों को ताक पर रखकर बार और देशी दारू दुकान चलाने वाले दोनों लायसेंस में अनियमितताएं और गड़बड़ी पाई है, देखना दिलचस्प होगा संबंधित के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है ?

रवि आर्य