Published On : Wed, Aug 26th, 2020

गोंदिया : जहां जरूरी नहीं , वहां सीमेंट सड़कों का निर्माण क्यों ?

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पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

पूरे राज्य में सीमेंट सड़कों का निर्माण किया जा रहा है , सीमेंट सड़कों के निर्माण के कारण बारिश का पानी जमीनी सतह के भीतर नहीं जा पाता जिससे तराई नहीं हो पाती इस वजह से उन इलाकों का वाटर लेवल नीचे चला जाता है ऐसे में पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव देखे जा रहे हैं।

मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने राज्य सरकार , रूलर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट और जिला परिषद गोंदिया के सीईओ , डिप्टी सीईओ और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जिला परिषद बांधकाम विभाग से पूछा कि क्या सीमेंट सड़क के निर्माण के लिए पर्यावरण मंत्रालय या पर्यावरण से संबंधित अन्य सक्षम अधिकारियों की अनुमति की आवश्यकता थी।

हाईकोर्ट ने इस बात का भी संज्ञान लिया है कि सीमेंट सड़कों के बनने से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है जहां जरूरी नहीं है वहां सीमेंट सड़कों का निर्माण क्यों किया जा रहा है? कोर्ट ने 14 सितंबर तक जवाब प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए वर्षा जल संचयन आवश्यक है। इसलिए, सीमेंट सड़कों का निर्माण करते समय इस संबंध में कदम उठाने के प्रावधान लागू किए गए हैं या नहीं ?
अदालत ने सरकार से यह भी बताने को कहा कि सीमेंट सड़कों के निर्माण के लिए क्यों और क्या नियम लागू किए गए हैं। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि नियमों और दिशानिर्देशों के दस्तावेजों को उत्तर के साथ संलग्न किया जाना चाहिए।

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14 नई सीमेंट सड़कों को लेकर जनहित याचिका दाखिल
गौरतलब है कि गोंदिया तहसील के ग्रामीण इलाकों के लिए पंचायत समिति अंतर्गत आने वाली 14 नई सीमेंट सड़कों का एक प्रपोजल 17 मार्च 2020 को बनाकर गवर्नमेंट के पास फॉरवर्ड किया गया इस प्रस्ताव को 18 मार्च 2020 यानी अगले दिन ही मंजूरी दे दी गई जबकि पब्लिक की ओर से कोई डिमांड नहीं थी फिर भी बांधकाम विभाग ने हड़बड़ी दिखाई।

जिला परिषद सदस्य सूरजलाल महारवाड़े ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में 6 अगस्त 2020 को एक जनहित याचिका दायर की है।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है- क्षेत्र की हरियाली को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण संरक्षण के सभी मानकों का पालन किया जाना चाहिए ? इसके लिए पर्यावरण विभाग की मंजूरी लेना जरूरी होता है इसके मापदंड है मिट्टी के नमूने (सॉइल टेस्टिंग) , पानी का सिंचन किस तरीके से होगा और उस रोड पर झाड़ कितने हैं ? झाड़ों को कैसे फेंसिंग दी जाएगी आदि -आदि ? इन सारे पर्यावरण संबंधी नियमों की अनदेखी की जा रही है।

गोंदिया जि.प. बांधकाम विभाग द्वारा सब कुछ छुपा लिया गया तथा पर्यावरण से संबंधित सक्षम किसी डिपार्टमेंट से अनुमति नहीं ली गई और एक ही रात में रातों-रात प्रपोजल सेंशन करवा लिया गया।

अब इसमें हाईकोर्ट ने सीमेंट सड़कों के मुद्दे को लेकर शासन को 14 सितंबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश देते कहा है नियमों और दिशानिर्देशों के दस्तावेजों को उत्तर के साथ संलग्न किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट में जनहित याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति जेड ए हक और न्यायमूर्ति अनिल किलोर के समक्ष हुई । याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी एड.आदिल मिर्जा व एड. पूनम मून ने की तथा सरकार की ओर से अपना पक्ष एड. डी.पी ठाकरे ने रखा।

रवि आर्य

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