Published On : Tue, Sep 22nd, 2020

गोंदिया: जिसका कोई नहीं उसका खुदा है , नवजात और मां की बच गई जान

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पॉजिटिव डिलीवरी पेशेंट हेतु आइसोलेशन वार्ड और अलग आपरेशन थियेटर जल्द हों शुरू

गोंदिया। कोरोना के बढ़ते हुए मामलों को लेकर चिंता होना लाजमी है ऐसे में संक्रमित लोगों के इलाज के लिए गोंदिया जिले के शासकीय अस्पताल कितने तैयार है यह देखना है तो आपको बाई गंगाबाई महिला जिला अस्पताल के हालात समझने होंगे ।

अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने वाले डॉ. सयास केंद्रे के अस्वस्थ पड़ जाने के बाद पिछले कुछ दिनों से बीजीडब्ल्यू अस्पताल में कोई डिलीवरी नहीं हो रही है।
प्रसव पीड़ा का दर्द झेल रही डिलेवरी पेशेंट की अनदेखी करते हुए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर अपने फर्ज से पल्ला झाड़ते हुए गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए राजेगांव स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र या नागपुर के सरकारी अस्पतालों हेतु रेफर कर रहे हैं ।

फीता काटने की राजनीतिक परंपरा कहां तक जायज़ ?

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डिलीवरी से पहले गर्भवती महिला का चेकअप होता है इस बात की जांच की जाती है कहीं कोविड के लक्षण तो नहीं ? जांच के बाद अगर रिपोर्ट में लक्षण पाए जाते हैं तो उन्हें अलग से आइसोलेशन वार्ड में रखने का नियम है ताकि अन्य प्रसूति वार्ड में भर्ती स्वस्थ मां और बच्चे को किसी तरह संक्रमण से बचाया जाए।

बताया जाता है कि बीजीडब्ल्यू अस्पताल परिसर में पिछले 3 महीने से संक्रमित महिलाओं हेतु अलग आइसोलेशन वार्ड और पॉजिटिव डिलीवरी पेशेंट हेतु अलग से ऑपरेशन थिएटर बनाया गया है लेकिन इसका इस्तेमाल इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि हमारी राजनीतिक संस्कृति में फीता काटने की एक परंपरा है यह लोकार्पण की परंपरा अभी पूर्ण नहीं हुई है नेताओं के आगमन का इस आइसोलेशन सेंटर और ओटी थिएटर को इंतजार है इसलिए ऑपरेशन थिएटर बनकर तैयार होने के बाद भी इसका डिलीवरी पेशेंट हेतु इस्तेमाल नहीं हो पा रहा इसलिए डॉक्टर विभिन्न प्रकार के बहाने बनाते हुए डिलीवरी पेशेंट को राजेगांव उप स्वास्थ्य केंद्र तथा नागपुर रेफर कर रहे हैं।

नर्स और डॉक्टर्स की पूरी ट्रेनिंग भी नहीं हुई ।

पॉजिटिव डिलीवरी पेशेंट की उचित देखभाल और योग्य उपचार के लिए क्या-क्या सावधानियां बरती जाएं इस बाबत अब तक नर्स और डॉक्टर्स की पूरी ट्रेनिंग भी नहीं हुई है।

कोविड संक्रमित मां और नवजात शिशु को कब तक ऑब्जरवेशन में रखना है इस बारे में भी इन्हें कोई विशेष ज्ञान नहीं है।

यहां कोरोना पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी हेतु कोई अलग ऑपरेशन थिएटर और आइसोलेशन सेंटर अब तक शुरू न होने की वजह से भी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर अपने फर्ज से पल्ला झाड़ते हुए डिलीवरी पेशेंट को रेफर कर रहे हैं।

नागपुर आने-जाने का खर्च सभी डिलेवरी पेशेंट वहन नहीं कर सकते तथा जिला अस्पताल की ओर से वक्त रहते एंबुलेंस की मदद नहीं मिलने की वजह से कई गर्भवती महिलाओं के जान पर बन आती है तथा पेट में ही बच्चे की अकाल मृत्यु जैसे मामले भी घटित हुए है।

प्रसव पीड़ा झेल रही महिला को मिला आखिर उपचार

21 सितंबर सोमवार की शाम डिलेवरी हेतु 5 महिला पेशेंट बीजीडब्लू अस्पताल मैं मौजूद थीं तथा मरीजों के परिजन , स्वास्थ्य प्रशासन से जल्द प्रसूति किए जाने की गुहार लगा रहे थे , लेकिन उन्हें रजेगांव ग्रामीण अस्पताल और नागपुर रेफर किए जाने की बात हो रही थी ।

आमगांव निवासी एक डिलीवरी पेशेंट की रिपोर्ट पॉजिटिव थी लिहाजा उसे रजेगांव अस्पताल के गेट पर ही रोक कर उसे वापस बीजीडब्ल्यू भेजा गया इसी तरह आने जाने में ३ चक्कर हुकरे परिवार के लग गए लेकिन कोई भी डॉक्टर उसका इलाज करने के लिए तैयार नहीं था।

इस बात की जानकारी लायंस क्लब तक पहुंची तो उन्होंने अस्पताल प्रशासन से संपर्क साधा जिस पर पॉजिटिव डिलीवरी पेशेंट को उपचार हेतु नागपुर लेकर जाने की सलाह दी गई। क्योंकि परिवार की आर्थिक हालत कमजोर थी इसलिए नागपुर जाना संभव नहीं था लिहाजा लाइंस क्लब के मनोज दुर्गानी और सुजाता बहेकार ने नगरसेवक लोकेश (कल्लू ) यादव को फोन करते हालात की जानकारी दी और उनसे मदद मांगी।वे तत्काल शाम 5 बजे जिला बीजेडब्ल्यू अस्पताल पहुंचे तथा डॉक्टर से बात करने के बाद रजेगांव उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे जहां डिलीवरी महिला पेशेंट गेट के बाहर थी।रजेगांव ग्रामीण अस्पताल ने उपचार में असहमति दिखाई जिस पर नगरसेवक लोकेश (कल्लू) यादव ने मेडिकल अस्पताल के डीन डॉ.एन.जी तिरपुड़े से फोन पर चर्चा की और उन्हें बीजीडब्ल् अस्पताल आ कर हालात की समीक्षा करने का अनुरोध किया ।जिस पर डीन डॉ.तिरपुड़े ने हामी भरी और वे रात 10:30 बजे बीजीडब्ल्यू अस्पताल पहुंचे तथा मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल ड्यूटी पर तैनात ३ डॉक्टर्स को निर्देश दिए के अलग से नई बिल्डिंग का मामला महिला मरीज की डिलीवरी तत्काल कराई जाए।

डीन के निर्देश के बावजूद एक महिला डॉक्टर रजिस्टर में साइन करके घर चली गई , डिलीवरी की जिम्मेदारी सीनियर डॉक्टर देशमुख तथा जूनियर डॉक्टर खोबरागड़े ने संभाली और अर्ध रात्रि 2:00 बजे आमगांव निवासी पॉजिटिव महिला की डिलीवरी सफल हुई जहां उसने एक पुत्र को जन्म दिया मां और बच्चे दोनों स्वस्थ बताए जाते हैं।

नगरसेवक लोकेश ( कल्लू ) यादव तथा उनकी टीम देर रात तक अस्पताल में डटी रही तथा उनके तत्पर प्रयासों से ही गरीब परिवार को उपचार सेवा नसीब हुई।

इस मानवता रूपी कार्य में लायंस कोरोना हेल्पलाइन के कालूराम , सुजाता बहेकार , मनोज दुर्गानी, ,प्रह्लाद सार्वे , प्रतीक कदम ,विवेक अरोरा , संतोष कायते, माहुरे , डा. गौरव बग्गा ने प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष रुप से सहयोग दिया।

लायंस क्लब का कहना है कि यह डिलेवरी की सुविधा अब एक दिन के लिए नहीं , हमेशा के लिए बीजेडब्ल्यू अस्पताल में उपलब्ध होनी चाहिए।

रवि आर्य

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