Published On : Sun, Mar 29th, 2020

गोंदियाः दान में पुण्य और सेवा का आनंद

मुश्किल वक्त में दीन-दुखियों की मदद

गोंदिया: कोरोना वायरस की महामारी के चलते २१ दिनों के देशव्यापी लाकडाऊन के कारण सड़कों पर भयावह सन्नाटा छाया है। होटल, ढाबा, रेस्टारेंट के साथ आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाली दुकानें बंद होने से उन असहाय लोगों के समक्ष खासा संकट उत्पन्न हो गया है जो दृष्टिहिन है, दिव्यांग है या फिर वे जो सड़क पर भीख मांग कर अपना पेट पालते है और जिनकी जिंदगी खानाबदोश की तरह सड़कों पर ही गुजरती है तथा वे निर्धन जो देहाड़ी मजदूरी से अपनी जीविका चलाते है तथा रोज कमाते है और खाते है, एैसे असहाय लोगों पर तालाबंदी का सबसे अधिक असर पड़ा है, अब एैसे दीन दुखियों की मदद के लिए कई संस्थाएं आगे आ रही है।

घर-घर जाकर गरीबों में बांटे मुफ्त राशन के पैकेट

गोंदिया जिले के नक्सल प्रभावित सालेकसा तहसील के आदिवासी दुर्गम क्षेत्रों में कई देहाड़ी मजदूर फंसे हुए है जिनका रोजगार छीन जाने से उनके समक्ष खाने के लाले पड़े हुए है, एैसे उपेक्षित लोगों की मदद के लिए दिव्या फाऊंडेशन, रेडक्रास सोसायटी गोंदिया, प्रेरणा मित्र परिवार सालेकसा, गड़माता ट्रस्ट सालेकसा , गोकुल संस्था सालेकसा, सूर्योदय क्रीड़ा मंडल भजेपार तथा पत्रकार संघ और पुलिस विभाग ने संयुक्त पहल करते हुए मदद का हाथ बढ़ाया है और घर-घर जाकर तंबू, झुग्गी झोपड़ियों और कच्चे घरों में रहने वाले जरूरतमंदों के बीच राशन के पैकेट बांटे जा रहे है। इन पैकेटों में चावल, दाल, मिर्च, हल्दी, चायपत्ती, साबून आदि रोजमर्रा जरूरत की वे चीजें है जो बेहद ही जीवनोपयोगी है।

सालेकसा थाना प्रभारी राजकुमार डुणगे , मधुकर हरिणखेड़े, चंद्रकुमार बहेकार, राहुल हटवार, राकेश रोकड़े, पवन पाथोड़े, प्रकाश टेंभरे, निलेश पोहरे, राहुल बनोटे, विजय फुंडे, पीएसआई सुनिल धनवे, शैलेश बहेकार, गुन्नीलाल राऊत, योगेश कावड़े, मुस्ताक अंसारी, सूर्यकांत येड़े, संजय कटरे, महेंद्र कापसे, कुमार श्रीवास्तव, गोल्डी भाटिया, रीता मिश्रा, मेजर यादव, मेजर खोब्रागड़े, हसन सैय्यद, संतोष चुटे, राजेश अग्रवाल, राजू काड़े, देवराम चुटे, सरपंच- गजानन राणे, महेश केसरीसागर, सतीश अग्रवाल, सागर राठौड़, सुनिल सहादे, सहदेव तिरपुड़े ने कहा- करोनो में लाकडाऊन के कारण पैसों की कमी होने से ये लोग जरूरत की वस्तुएं खरीद पाने में असमर्थ थे एैसे में इनकी आजीविका का साधन रोजगार छीन जाने से ये लोग मानसिक तौर पर उदास और गमगीन थे लिहाजा पेट की जरूरत की रोजमर्रा की वस्तुएं इन्हें राशन के रूप में उपलब्ध करायी गई है। इन सेवा की गतिविधियों को निरंतर आगे भी जारी रखा जाएगा।

रवि आर्य