Published On : Tue, Feb 24th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

Video गोंदिया: ” पलाश ” इवेंट खत्म , जिम्मेदारी गायब.. स्टेडियम शर्मसार , जूठन का अंबार

राजनीतिक जनसभाएं- सार्वजनिक और व्यावसायिक आयोजन , साहेब... यह खेल का मैदान है या मेला ग्राउंड ?
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गोंदिया | गोंदिया शहर के मध्य स्थित इंदिरा गांधी स्टेडियम, जो कभी खिलाड़ियों की प्रतिभा का केंद्र माना जाता था, आज राजनीतिक जनसभाओं, सार्वजनिक कार्यक्रमों और व्यवसायिक आयोजनों का पसंदीदा स्थल बनता जा रहा है। नतीजा-खेल का मैदान अब निजी पार्टियों का ‘इवेंट ग्राउंड’ बनकर रह गया है।

जहां खेलते थे खिलाड़ी अब वहां पत्तल-जूठन

“पलाश” जैसे आयोजनों के नाम पर यहां खुलेआम पार्टियां आयोजित होती हैं , ग्राउंड पर लकड़ी के चूल्हे जलते हैं, मांसाहार पकता है और कार्यक्रम खत्म होने के बाद मैदान कचरे से पट जाता है और जिम्मेदारियां गायब। हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद के स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी सफाई को लेकर गंभीरता नज़र नहीं आती। मैदान में बिखरा खाना, पत्तल-डिस्पोजल और जूठन अब मवेशियों के लिए दावत बन चुका है। पूरे स्टेडियम परिसर में जानवरों की धमा-चौकड़ी आम दृश्य है। ऐसे हालात में खेलना तो दूर, सुबह टहलने वाले नागरिकों और पुलिस भर्ती की तैयारी में जुटे युवाओं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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रोजाना 500 खिलाड़ीयों की प्रैक्टिस , लेकिन हालात बदतर

इस स्टेडियम में क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, ताइक्वांडो, बास्केटबॉल, योग, एथलेटिक्स, ओपन जिम और जॉगिंग जैसी गतिविधियों की नियमित प्रैक्टिस होती है। पुलिस भर्ती की शारीरिक परीक्षा की तैयारी के लिए भी रोज सुबह-शाम सैकड़ो युवा यहां पहुंचते हैं।
इसके अलावा बड़ी संख्या में नागरिक मॉर्निंग-इवनिंग वॉक और लाइब्रेरी में अध्ययन के लिए भी स्टेडियम आते हैं। लेकिन वर्तमान हालात में चारों तरफ फैली गंदगी खिलाड़ियों और युवाओं को निराश कर रही है कई बार तो बदबू और टूटे बिखरे कांच के कारण उन्हें ग्राउंड से वापस लौटना पड़ता है।

खेल मैदान या कचरा घर ? गंदगी का साम्राज्य

लगातार शिकायतों के बाद नागपुर टुडे की टीम ने 24 फरवरी सोमवार सुबह स्टेडियम का दौरा कर हालात का जायज़ा लिया। मैदान में शराब की टूटी बोतलें, कांच के टुकड़े, फेंके गए पत्तल-डिस्पोजल और जूठन के ढेर साफ दिखाई दिए। पुलिस भर्ती हेतु शारीरिक परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं और खिलाड़ियों ने नगर परिषद प्रशासन की लापरवाही पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि “अगर यही हाल रहा तो खेल प्रतिभाएं कैसे आगे बढ़ेंगी ?”

ऐसे में बड़ा सवाल है कि –
खेल के लिए बने इस स्टेडियम को आखिर इवेंट और पार्टियों का अड्डा क्यों बनाया जा रहा है ? क्या नगर परिषद प्रशासन खिलाड़ियों के भविष्य और शहर की खेल संस्कृति को लेकर गंभीर है ?
गोंदिया का यह प्रतिष्ठित मैदान आज जवाब मांग रहा है- खेल बचेगा या व्यवसायीकरण हावी रहेगा ?

रवि आर्य

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