
गोंदिया। जिले में आमगांव तहसील का किडंगीपार गांव सोमवार को उस वक्त छावनी में तब्दील हो गया, जब शराबबंदी की मांग कर रहे आंदोलनकारी और पुलिस आमने-सामने आ गए। शांतिपूर्ण मांग ने ऐसा उग्र रूप लिया कि आक्रोशित भीड़ ने पुलिस पर ताबड़तोड़ पथराव कर दिया , इस हिंसक झड़प में 6 अधिकारियों और 35 पुलिसकर्मियों समेत कई ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
नोटिस फाड़ा और पुलिस को घर से भगाया
मामले की शुरुआत 5 अप्रैल को हुई जब पुलिस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संतोष दोनोडे और उनके परिवार को धारा 168 के तहत प्रतिबंधात्मक नोटिस देने पहुंची थी। आंदोलनकारियों का गुस्सा तब सातवें आसमान पर पहुंच गया जब उन्होंने न केवल नोटिस फाड़ दिया, बल्कि नोटिस चस्पा कर रही पुलिस टीम के साथ धक्का-मुक्की कर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया।
6 अप्रैल का ‘खूनी’ संग्राम , शासकीय कार्य में बाधा
अगले दिन जब पुलिस शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में संतोष दोनोड़े और परिवार के सदस्यों की गिरफ्तारी करने पहुंची, तो पूरा गांव ढाल बनकर खड़ा हो गया। देखते ही देखते पथराव शुरू हो गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।
इस हिंसक झड़प में जयश्री गाढबांधे, सुरेखा अवताडे, श्याम ब्राह्मणकर समेत कई अन्य ग्रामीण घायल हो गए जिन्हें अस्पताल में उपचार हेतु भर्ती कराया गया है ।
खुद कमान संभाली और स्थिति को नियंत्रित किया
हालात बेकाबू होते हुए देख एसपी गोरख भामरे और डीएसपी अभय डोंगरे ने खुद कमान संभाली और स्थिति को नियंत्रित किया।
इस हाई-वोल्टेज ड्रामा में BNS की धाराओं में मुख्य आरोपी संतोष दोनोडे समेत 90 लोगों पर FIR दर्ज की गई है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें 3 दिन की पुलिस डिमांड पर भेजा गया है।
10 अप्रैल का खौफ: सामूहिक ‘ आत्म दहन ‘ की चेतावनी
लगभग 2500 आबादी वाले किड़गीपार गांव की महिलाएं और युवा शराबबंदी के लिए मतदान की मांग कर रहे हैं। संतोष दोनोड़े ,चुनेश्वरी हरिणखेड़े और प्रमिला खरोले जैसी महिलाओं ने स्पष्ट कर दिया कि यदि शराब की दुकान बंद नहीं हुई तो वह आत्म दहन जैसा आत्मघाती कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे ?
ग्रामीण ‘ शराब मुक्त गांव ‘ की मांग पर अड़े हुए हैं और आर पार की जंग के मूड में है इसी के तहत आंदोलनकारीयों ने 10 अप्रैल को रेल रोको और सामूहिक आत्मदहन की चेतावनी जारी की है जिसे लेकर प्रशासन हाई अलर्ट पर है।
एक और जहां जिले में विकास की बातें हो रही है वहीं
किडंगीपार से आई यह तस्वीरें डराती है , क्या संवाद के जरिए हिंसा को रोका नहीं जा सकता था ? 10 अप्रैल की डेड लाइन अब प्रशासन के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है।
रवि आर्य








