Published On : Sat, Apr 11th, 2020

गोंदिया:घायल हिरण को मिला जीवनदान

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प्यासे वन्यजीव कर रहे हैं , रिहायशी इलाकों का रुख

गोंदिया: ग्रीष्मकाल के दौरान प्यासे वन्यजीव, वनपरिक्षेत्र में सूख चुके नदी-नालों के बाद पानी की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर कूच करते है। कमोवेश इसी का नतीजा है कि, कई अवसरों पर उनके सड़क हादसे का शिकार होकर गंभीर जख्मी होने की खबरें आ जाती हैै।
153 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले नागझिरा को राष्ट्रीय अभयारण्य का दर्जा प्राप्त हो चुका है किन्तु इसे विडंबना नहीं तो क्या कहें कि, इतने बड़े जंगल परिक्षेत्र में मात्र 102 जलकुंड स्थापित है।

प्यासे हजारों वन्यजीवों की प्यास बुझाने का जिम्मा भी कुछ ही टैंकरों पर निर्भर है। विशेष तौर पर खोदी गई हैंडपंप भी गर्मी के दिनों में जलस्तर नीचे चले जाने की वजह से काम नहीं कर रही। लिहाजा अब वन्यजीव अपनी प्यास बुझाने के लिए रिहायशी इलाकों का रूख कर रहे है।

वन कर्मियों व पशु चिकित्सक ने उपचार कर जंगल में छोड़ा
ग्राम किंड़गीपार इलाके में शुक्रवार १० अप्रैल के सुबह ग्रामीणों को जख्मी अवस्था में हिरण का बछड़ा दिखायी दिया। कुछ उत्साही युवक इक्कठे हुए और उन्होंने उसे पकड़ लिया। पुलिस पाटिल देवेंद्र भंडारकर ने हिरण के बछड़े को पकड़े जाने की सूचना वनविभाग के बीट गार्ड गौरीशंकर लांजेवार को दी।
खबर मिलते ही वन कर्मचारी रंजित बडोले, एम.एल. पांडे, पी.टी. कटरे , यू.डी. पाउलझगड़े, पुरूषोत्तम तुरकर की टीम ग्राम किंड़गीपार पहुंची।

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वनकर्मियों ने पशु चिकित्सक डॉ. शेलेंद्र पटले को बुलाकर जख्मी हिरण के बछड़े का उपचार करवाया। सूचना मिलने पर तहसीलदार डी.एस. भोयर, पर्यावरण मित्र रितेश अग्रवाल, जिला प्राणी क्लेश प्रतिबंधक समिति सदस्य रघुनाथ भूते की मौजुदगी में तथा वनपरिक्षेत्र अधिकारी प्रदीप चन्ने के मार्गदर्शन में हिरण के बछड़े को भानेगांव के जंगल वनपरिक्षेत्र में वनकर्मियों द्वारा सुरक्षित छोड़ा गया।

रवि आर्य

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