Published On : Tue, Aug 31st, 2021
By Nagpur Today Nagpur News

गोंदिया: कुएं में किसान आंदोलन , हम जिएं या मरें ?

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सरकार से उठा एतबार, खुद के पैसे से खेत में कुआं बनाकर फंस गए यार

गोंदिया। शासकीय योजनाओं द्वारा लोकहित से जुड़े कार्य किए जाते हैं वहीं कृषि प्रधान देश की प्रगति भी किसानों की उन्नति पर टिकी है। किसानों की तरक्की और भलाई के लिए महाराष्ट्र में धड़क सिंचन विहीर योजना शुरू की गई इस योजना के तहत 2018-19 अंतर्गत गोंदिया जिले के सालेकसा तहसील से 134 लाभार्थी किसानों की सूची तैयार की गई , प्रति सिंचन कुंआ ( विहिर ) हेतु ढाई लाख रुपए अनुदान हेतु निश्चित किए गए।

लाभार्थियों ने सरकार की 2.5 लाख की अनुदान राशि पर एतबार किया और विहीर योजना मार्फत लाभार्थियों ने अपने घर का पैसा लगाकर , सोना चांदी गिरवी रखकर , जानवर बेचकर , विहार योजना में पैसे लगा दिए ओर अपने अपने खेत में कुएं खोदे ।
अब 2 वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें धड़क सिंचन विहीर योजना की निधि (अनुदान राशि ) उन्हें उपलब्ध नहीं हुई है।
अब इन लाभार्थियों के आर्थिक हालात ऐसे हो गए हैं कि कुंए का बांधकाम करने वाला ठेकेदार अपनी मजदूरी की रकम मांग रहा , लोहा- सीमेंट के व्यापारी घर के चक्कर लगा रहे, साहूकार रास्ते में रोककर उधारी दिए पैसे मांग रहे।

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ग्राम भजेपार निवासी पीड़ित किसानों का कहना है कि उन पर आफत आ गई है अब जिएं या मरें ?
अनुदान राशि हेतु मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे , कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले , सांसद प्रफुल पटेल , पालक मंत्री नवाब मलिक से पत्र व्यवहार (ज्ञापन) द्वारा बात की जा चुकी है लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा।

इस संदर्भ में बार-बार कलेक्टर , एसडीओ , तहसीलदार , पंचायत समिति BDO , से पत्र व्यवहार कर अनुदान राशि उपलब्ध कराने की मांग की गई लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला लिहाजा सरकार और अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने हेतु अब कुएं में उतर कर आंदोलन हेतु विवश होना पड़ रहा है , जब तक लिखित जवाब (आश्वासन) नहीं मिलता तब तक आंदोलन शुरू रहेगा।


कुंए में चारपाई लगाकर और मुंडेर पर बैठे हैं किसान
अब हम जिएं या मरें ? ऐसे वाक्यों का प्रयोग करने वाले किसानों का यह आंदोलन अचानक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है।

सालेकसा तहसील के ग्राम भजेपार स्थित कुएं में उतरने से पहले चारपाई (खटिया) के पहियों में मोटा रस्सा बांधकर उसे कुएं में उतारा गया , कुंए की ग्रिल पकड़कर किसान नीचे उतरे और खटिया पर आसन लगा दिया वहीं कुछ किसान कुएं के भीतर की मुंडेर पर बैठे हुए हैं। इस बात की जानकारी सोमवार 30 अगस्त को मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया।

सालेकसा के थानेदार , पंचायत समिति के अधिकारी और पटवारी नागपुरे सदलबल मौके पर पहुंचे। और कुएं के नीचे चारपाई लगाकर तथा मुंडेर पर बैठे किसानों से बाहर निकलने की विनंती की लेकिन किसानों ने जिला प्रशासन से लिखित पत्र के बिना आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया है।
आंदोलनकारी किसानों में ग्राम भजेपार निवासी प्रल्हाद बहेकर ,छगन बहेकार, टायकराम ब्राह्मणकर, भागवत बहेकार ,जागेश्वर भांडारकर ,रघुनाथ चूटे , पुरुषोत्तम बहेकार आदि का समावेश है।

वही इस आंदोलन को प्रहार संगठन के आमगांव तहसील अध्यक्ष सुनील गिरडकर , सालेकसा तहसील अध्यक्ष अभय कुराहे , तथा संगठन पदाधिकारी मिथिलेश दमाहे ,अजय मच्छिरके , विशाल दसरिया , चंदू बड़वाईक , सुभाष उईके , देवा टेकाम , बंटी बावनथड़े ने अपना समर्थन घोषित किया है।

रवि आर्य

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