गोंदिया। विधानसभा चुनाव के पृष्ठभूमि में धनगर आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वर्तमान में घुमंतु जनजाति में शामिल धनगर समुदाय अनुसूचित जनजाति ( एसटी ) वर्ग में आरक्षण की पुरजोर मांग कर रहा है वहीं धनगरों को अनुसूचित जनजाति से आरक्षण ना दें इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ आदिवासी समुदाय ने मोर्चा खोल दिया है।
विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और धनगर आरक्षण का मुद्दा नक्सल प्रभावित गोंदिया जिले में जोर पकड़ चुका है। 30 सितंबर को आदिवासी हक्क कृति समिति के बैनर तले हजारों आदिवासी समुदाय के लोगों ने स्थानीय स्टेडियम से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर मोर्चा निकाला इस दौरान धनगर आदिवासी हो नहीं सकता , आरक्षण ले नहीं सकता ? जैसे घोष वाक्यों के साथ सरकार के विरोध में जमकर नारेबाजी की गई।
आदिवासी समुदाय के महिला , पुरुष , युवा वर्ग अपने विशिष्ट परिधानों (पोशाक ) के साथ मोर्चे में शामिल हुए तथा आदिवासी संस्कृति का परिचय दिया और कतारबध्द होकर डेढ़ किलोमीटर लंबा यह मोर्चा कलेक्ट्रेट पर पहुंचा जहां मोर्चा सभा में तब्दील हो गया है इस अवसर पर आदिवासी हक्क कृति समिति के पदाधिकारीयों ने मार्गदर्शन किया इसके पश्चात ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा गया।
जोर पकड़ चुका है आदिवासी और नकली आदिवासी का मुद्दा
मोर्चा में शामिल आदिवासी हक्क कृति समिति पदाधिकारीयों ने कहा- धनगर आदिवासी हो नहीं सकता , आरक्षण ले नहीं सकता ? यह फैसला अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक अधिकारों का हनन करता है इसलिए सड़कों पर उतरने की नौबत आई है।

शासन के निर्णय को लेकर अन्य आदिवासी समुदायों में सरकार के खिलाफ रोष पनप रहा है इस मुद्दे को लेकर आज महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में आदिवासियों ने दोपहर 12 बजे स्थानीय स्टेडियम से आक्रोश मोर्चा निकाला जिसमें 10, 000 से अधिक आदिवासी शामिल हुए।
रवि आर्य

जोर पकड़ चुका है आदिवासी और नकली आदिवासी का मुद्दा





