Published On : Wed, Apr 29th, 2020

गोंदिया: लाकडाउन से बीड़ी उद्योग पर संकट

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तेंदूपत्ता संग्रहण की अथॉरिटी मिल गई पर मजदूरों का कैसे हो जुगाड़ ?

गोंदिया : चालू वित्त वर्ष 2020 में तेंदूपत्ता संग्रहण की अग्रिम तैयारियां युद्धस्तर पर जारी है । गोंदिया कलेक्टर ने लाकडाउन में तेंदूपत्ता संग्रहण के इस कारोबार को सहूलियत प्रदान करते गोंदिया जिला तेंदूपत्ता एसोसिएशन को इस बात की अथॉरिटी 28 अप्रैल को प्रदान की है कि वे एसोसिएशन के स्तर पर जंगल में तय यूनिट तक पहुंचने के लिए मुंशी , कैशियर , मैनेजर , रसोईया , ड्राइवर को पास इश्यू कर सकते हैं ? इन 5 व्यक्तियों के लिए जारी किए जाने वाले पास में बीड़ी कंपनी का नाम , संबंधित व्यक्ति का फोटो , उसका आधार कार्ड , मोबाइल नंबर यह कंप्लीट दर्ज होना चाहिए।

गौरतलब है कि तेंदूपत्ता तुड़ाई पूर्व मजदूरों की व्यवस्था करनी होती है तथा जहां-जहां तेंदूपत्ता गोदामों के मरम्मत का कार्य कराया जाना है उनकी व्यवस्था के लिए गोंदिया कलेक्टर द्वारा तेंदूपत्ता ठेकेदारों को कार्य स्वीकृति के अधिकार जारी किए गए है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में बीड़ी उद्योग का महत्वपूर्ण स्थान

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तेंदूपत्ता अपने आसानी से लपेटे जाने वाले गुण एवं अत्याधिक उपलब्धता के कारण बीड़ी बनाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त पत्ता माना जाता है।
गोंदिया जिले में तेंदूपत्ता बड़े पैमाने पर पाया जाता है तथा तेंदूपत्ता तुड़ाई के 45 दिनों के सीजन में तकरीबन 2 लाख ग्रामवासी मजदूरों के लिए अतिरिक्त आय का प्रमुख साधन है और तेंदूपत्ता संग्रह कार्य से उन्हें रोजगार मिलता है इस प्रकार ग्राम कल्याण एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में बीड़ी उद्योग का एक महत्वपूर्ण स्थान है।

सालाना करोड़ों का है कारोबार

तेंदूपत्ता संग्रहण काल अप्रैल के मध्य से मई मध्य तक किसी भी समय प्रारंभ होता है यह सीजन इस वर्ष गोंदिया में 10 मई से शुरू हो रहा है जिसकी तैयारियां प्रारंभ हो चुकी है।
झाड़ से तेंदूपत्ता तोड़कर , 70 पत्तों के बंडल को बांधा जाता है एवं लगभग 1 सप्ताह तक उसे धूप में सुखाया जाता है ,सूखी गड्डीयों को कोमल बनाने के लिए पानी से सींचकर , जूट के बोरों में भरा जाता है एवं 2 दिन पुन: धूप में रखा जाता है ।
इस प्रकार अच्छी तरह से भरे बोरे इन्हें उत्पादन के उपयोग तक गोदाम में भंडारित किए जाते हैं तथा इसका इस्तेमाल बीड़ी फैक्ट्री में किया जाता है।
अकेले गोंदिया जिले में बीड़ी पत्ते का कारोबार सालाना करोड़ों का है तथा यहां से तेंदूपत्ता पश्चिम बंगाल , कर्नाटक , केरल तेलंगाना , तमिलनाडु की बीड़ी फैक्ट्रियों में भेजा जाता है।

गत वर्ष मिला था सवा 6 करोड़ का राजस्व
गोंदिया जिले में तेंदूपत्ता जंगल की नीलामी वन विभाग के माध्यम से ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया द्वारा की जाती है जिसमें स्थानीय 40 से 50 तेंदूपत्ता व्यापारी हिस्सा लेते हैं । गत वर्ष 28 यूनिट में से 19 यूनिट नीलाम हुए थे जिससे 6 करोड़ 19 लाख 85 हजार 146 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। इस वर्ष अब तक ६ राउंड की ऑनलाइन नीलामी बोली में 14 यूनिट बिक चुके हैं तथा ७ वें राउंड की नीलामी का प्रोसेस 28 अप्रैल से शुरू हुआ , 30 अप्रैल को टेंडर ओपन होंगे ,उम्मीद की जा रही है कि गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष अधिक राजस्व प्राप्त होगा।

मजदूरों को गवर्नमेंट रेट के हिसाब से 70 पत्तों की एक फड़ बांधने , इस तरह 1000 गड्डियां संग्रहित करने पर 2200 रुपए का मेहनताना दिया जाता है।
श्रमिकों का कहना है कि पत्तों की तुड़ाई ,एक गड्डी में 70 पत्ते बांधने से लेकर 1000 गड्डियों को सुखाने में जितना श्रम और समय लगता है उतनी उसकी कीमत (मजदूरी) नहीं मिल रही है ।

बहरहाल लाकडाउन दौरान तेंदूपत्ता तुड़वाई की अथॉरिटी तो मिल गई है लेकिन क्या मजदूर काम पर आएंगे ? या फ़िर बीड़ी उद्योग यूं ही संकट में फंसा रहेगा ? यह देखना दिलचस्प होगा ।

रवि आर्य

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