Published On : Fri, Oct 4th, 2019

गोंदियाः भाजपा ने ठुकराया राष्ट्रवादी ने अपनाया

तिरोड़ा सीट से टिकट की चाह में पूर्व सांसद खुशाल बोपचे और उनके पुत्र रविकांत बोपचे का राकांपा में प्रवेश

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गोंदिया: मैं पक्ष का एक वफादार सिपाही हूँ, पार्टी मेरी माँ है और मैं अपनी माँ से गद्दारी नहीं कर सकता? कुछ इसी तरह के लच्छेदार शब्दों का इस्तेमाल अकसर नेता अपने कार्यकर्ताओं के समक्ष करते है , लेकिन किसी पार्टी में बात बिगड़ने पर दुसरी पार्टी में जाने के लिए जुगलबंदी करने वाले इन दलबदलू नेताओं का असल मकसद खुद का तथा अपने परिवार का राजनीतिक भविष्य संवारना होता है और एैसे झट से पलटी मार लेने वाले नेताओं में अब तिरोड़ा सीट का उम्मीदवार शुमार हो चला है।

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पुत्र मोह की चाह में बीजेपी छोड़ी

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पूर्व सांसद खुशाल बोपचे ने पुत्र रविकांत बोपचे का तिरोड़ा सीट से भाजपा का टिकट खारिज होने पर राष्ट्रवादी में प्रवेश कर लिया और एनसीपी नेता प्रफुल पटेल ने उन्हें तिरोड़ा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाने का तत्काल ऐलान भी कर दिया।

खुशाल बोपचे , जिधर दम- उधर हम.. वाली स्थिति में विश्‍वास रखते है शायद इसलिए भाजपा में बात बिगड़ने पर वे राष्ट्रवादी में चले जाते है और राष्ट्रवादी से बात बिगड़ने पर वे पुनः भाजपा में आ जाते है। एक बार फिर उन्होंने पुत्र मोह की चाह में यह सिलसिला दोहराया है और उनकी फिर से राष्ट्रवादी में घर वापसी हो चुकी है।

उल्लेखनीय है कि, नाना पटोले के इस्तीफा देने के बाद गोंदिया-भंडारा लोकसभा सीट पर उपचुनाव घोषित हुए, मई 2018 में हुए उपचुनाव के दौरान खुशाल बोपचे प्रबल दावेदार थे लेकिन उनका टिकट काटकर हेमंत पटले को दे दिया गया, तब नाराज चल रहे खुशाल बोपचे से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने यह वादा किया था कि, तिरोड़ा विधानसभा क्षेत्र से उनके बेटे रविकांत (गुड्डू) बोपचे जो जिला भाजपा में महामंत्री है इन्हें उम्मीदवारी सौंपी जायेगी, लेकिन एैसा हो न सका?

पार्टी की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट विजय रहांगडाले के पक्ष में थी लिहाजा भाजपा ने फिर से उन पर दांव खेला है और इस तरह बेटे का टिकट कटने से भाजपा के पूर्व सांसद तथा तिरोड़ा से पूर्व विधायक रहे खुशाल बोपचे तिलमिला गए और उन्होंने एनसीपी नेता प्रफुल पटेल के नेतृत्व में राष्ट्रवादी काँग्रेस में प्रवेश कर लिया।

इस अवसर पर पूर्व विधायक राजेंद्र जैन, राष्ट्रवादी जिलाध्यक्ष पंचम बिसेन, राष्ट्रवादी महिला जिलाध्यक्ष राजलक्ष्मी तुरकर, पूर्व जि.प. अध्यक्ष विजय शिवणकर, सहकार नेता सुनिल फुंंडे आदि उपस्थित थे।

पिता-पुत्र को घड़ी चुनाव चिन्ह का दुप्पटा पहनाकर पार्टी में ना सिर्फ एन्ट्री दी गई बल्कि राष्ट्रवादी ने अब रविकांत (गुड्डू) बोपचे को तिरोड़ा विधानसभा क्षेत्र की उम्मीदवारी भी दे दी है। आज उन्होनेें राष्ट्रवादी के चुनाव चिन्ह घड़ी से अपना नाम निर्देशन फार्म दाखिल किया।

दिलीप बंसोड की भूमिका पर ऩजर..

काँग्रेस, राष्ट्रवादी और रिपाई गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर भाग्य आजमा रहे रविकांत बोपचे समर्थकों को यह उम्मीद है कि, भाजपा के कई नेताओं का भी उन्हें भीतरी रूप से समर्थन हासिल होगा। विशेष महत्व की बात यह है कि, खुशाल बोपचे और रविकांत बोपचे के राष्ट्रवादी प्रवेश के वक्त पूर्व विधायक व एनसीपी नेता दिलीप बंसोड उपस्थित नहीं थे, जिससे यह कयास लगाए जा रहे है कि टिकट हाथ से फिसल जाने के बाद वे कोई कठोर निर्णय ले सकते है?

सनद रहे 2014 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रवादी ने तिरोड़ा सीट से राजलक्ष्मी तुरकर को उम्मीदवारी सौंपी थी इस बात से खफा होकर दिलीप बंसोड ने बतौर निर्दलीय पर्चा दाखिल कर लिया था और उन्होंने 41 हजार 062 मत हासिल कर राष्ट्रवादी का खेल ही बिगाड़ दिया था, इस सीट से राजलक्ष्मी तुरकर तीसरे नंबर पर रही और उन्हें 31 हजार 147 वोटों से ही संतुष्ट होना पड़ा। विजय रहांगडाले ने 54 हजार 160 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। 2014 का चुनाव भाजपा-शिवसेना और काँग्रेस- राष्ट्रवादी कांंग्रेस ने अलग-अलग लड़ा था। तिरोड़ा सीट से काँग्रेस के उम्मीदवार पी.जी. कटरे को 18 हजार 176 वोट प्राप्त हुए थे वही शिवसेना के पंचम बिसेन इन्हें 11 हजार 978 वोट मिले थे।

– रवि आर्य

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