Published On : Sat, Apr 11th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

गोंदिया/भंडारा: नवेगांव- नागझिरा , पर्यटकों की एंट्री के लिए 4 नए गेट की सौगात

कोर ( गाभा) और बफर क्षेत्र के एकीकरण से .. अब बाघों का राज और भी बढ़ा
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गोंदिया/भंडारा। गोंदिया भंडारा के वन्यजीव प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। महाराष्ट्र के पर्यटन मानचित्र पर चमकता सितारा, नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व (NNTR), अब एक नए और विशाल स्वरूप में दुनिया के सामने है।
1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए नियमों के बाद यह अभयारण्य न केवल बड़ा हो गया है, बल्कि पर्यटकों की एंट्री के लिए 4 नए गेट्स की सौगात भी मिल रही है।

1850 वर्ग किलोमीटर के ‘महा-जंगल’ में अब बाघों का राज

​वन विभाग ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कोर (गाभा) और बफर क्षेत्र का एकीकरण कर दिया है।
पहले मात्र 650 वर्ग किमी का कोर क्षेत्र था, जिसमें अब 1200 वर्ग किमी का बफर जोन शामिल करते इसका विस्तार कर दिया गया है।
​अब यह अभयारण्य 1850 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैल गया है।
हालांकि इसकी घोषणा 2017 में हुई थी, लेकिन इसका पूर्ण क्रियान्वयन 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुका है।


पर्यटन को मिलेगा बूस्ट​ , जंगल का रोमांच और बढ़ेगा

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​टूरिज्म को ‘सुपरफास्ट’ रफ्तार देने के लिए प्रशासन ने चार नए प्रवेश द्वार (Gates) खोलने का निर्णय लिया है। इससे पर्यटकों को लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी और जंगल के अनछुए हिस्सों तक पहुंच आसान होगी।
जिन नए 4 प्रवेश द्वार को खोलने की घोषणा की गई है उनमें गोंदिया जिले के पांगड़ी , जांभड़ी और मुरदोली का गेट शामिल है वहीं भंडारा जिले का गड़ेगांव डिपो द्वार को भी इसमें समाविष्ट किया जा रहा है ।
इन नए 4 द्वार के खुलने से न केवल पर्यटन बढ़ेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए गाइड , जिप्सी ड्राइवर और होम स्टे के रूप में रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।

‘नागझिरा’ नाम की कहानी में क्या है खास ?

वन्य जीव प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए प्रसिद्ध ‘ नागझिरा ‘ के नाम की कहानी में अभ्यारण के बीचों-बीच स्थित प्राचीन ‘ नाग मंदिर ‘ इस जंगल की आस्था और इतिहास दोनों को जीवंत करता है।
‘झिरा’ यानी ( पानी का स्थायी जल स्रोत ) यही इस स्थान के नाम ‘ नागझिरा ‘ की असली पहचान है ।


वन्यजीवों का सुपर हाउस , एडवेंचर का परफेक्ट कांम्बिनेशन

यह जंगल सिर्फ हरियाली नहीं बल्कि जंगली दुनिया का असली किंगडम है यहां बाघ , तेंदुआ , भालू , जंगली कुत्ते ( ढोल) गौर , सांभर , चीतल , नीलगाय , बारासिंघा , जंगली सूअर चेसिंगा , चमगादड़ , पैंगोलिन साथ ही 48 प्रकार के सरी सर्प और करीब 125 प्रजातियों के पक्षी जिसमें मोर , गरुड़ और बार- हेडेड गूंज शामिल है ।
अगर आप प्रकृति के गोद में खो जाना चाहते हैं और दहाड़ती हुई दहाड़ को करीब से महसूस करना चाहते हैं तो नवेगांव- नागझिरा टाइगर रिजर्व आपके स्वागत के लिए तैयार है , उठाइए कैमरा.. निकाल पड़िए एक यादगार सफारी पर।
क्योंकि यह जंगल सिर्फ जंगल नहीं बल्कि महाराष्ट्र का बढ़ता हुआ टाइगर टूरिज्म पावर हाउस बन चुका है जहां हर मोड़ पर रोमांच , हर पेड़ में एक कहानी और हर सफारी में सरप्राइज़ आपका इंतजार करता है।

हाई-टेक सुरक्षा और सस्टेनेबल टूरिज्म

यहां जैव विविधता का खजाना है सागवान ,ऐन हल्दू और बांस के घने जंगलों से आच्छादित यह क्षेत्र आंखों को सुकून देने वाली हरियाली से भरा है।
सिर्फ पर्यटन ही नहीं , बाघों की सुरक्षा के लिए यहां धांसू इंतजार किए गए हैं , शिकारीयों पर नज़र रखने के लिए अत्याधुनिक स्मार्ट मॉनिटरिंग ‘ कैमरा ट्रैप ‘ लगाए गए हैं।भीषण गर्मी में वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक जल स्रोत ‘ वाटर मैनेजमेंट ‘ के तहत ( जलकुंभ ) विकसित किए गए हैं।
‘ चितमपल्ली नेचर स्कूल ‘ के ज़रिए आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
टूरिज्म को ‘ सुपरफास्ट ‘ रफ्तार देने के लिए प्रशासन ने 4 नए द्वार ( गेट ) खोलने का निर्णय लिया है इससे पर्यटकों को लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी और जंगल के अनछुए हिस्सों तक पहुंच आसान होगी।

रवि आर्य

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