
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, घटना रात करीब 12 से 12:30 बजे के बीच हुई। अचानक इलाके में तेज क्लोरीन की गंध फैलने लगी। कुछ ही देर में लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन महसूस होने लगी। इसके बाद पुलिस ने आसपास के लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा।
200 मीटर का इलाका सील
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जलशुद्धीकरण केंद्र के आसपास करीब 200 मीटर का क्षेत्र खाली कराकर सील कर दिया। मौके पर NDRF, पुलिस और अन्य आपातकालीन टीमें पहुंचीं और स्थिति को नियंत्रित करने की कार्रवाई शुरू की।
सुबह तक भी जलशुद्धीकरण केंद्र के आसपास क्लोरीन की तेज गंध महसूस किए जाने की बात सामने आई। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार गैस का स्तर धीरे-धीरे कम हो रहा था और स्थिति नियंत्रण में लाई जा रही थी।
OCW टीम ने रिसाव रोकने में की मदद
क्लोरीन रिसाव को नियंत्रित करने के अभियान में OCW की टीम ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। टीम के नितिन और किशोर ने SCBA यानी Self-Contained Breathing Apparatus सेट का इस्तेमाल करते हुए खतरनाक परिस्थितियों में रिसाव को नियंत्रित करने की कार्रवाई में मदद की।
मौके पर मौजूद पुलिस और Directorate of Industrial Safety and Health (DISH) की टीम ने OCW कर्मियों के प्रयासों की सराहना की।
प्लांट NMC का नहीं, गोधनी ग्राम पंचायत का
इस घटना को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस जलशुद्धीकरण केंद्र में गैस रिसाव हुआ, उसका संचालन गोधनी ग्राम पंचायत द्वारा किया जाता है। यह NMC का जलशुद्धीकरण केंद्र नहीं है।
दो आवारा कुत्तों की मौत, कारण की पुष्टि बाकी
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान प्रभावित इलाके में दो आवारा कुत्ते मृत पाए गए। हालांकि, उनकी मौत का कारण क्लोरीन गैस के संपर्क में आना ही था, इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले में पशु मृत्यु और गैस रिसाव के बीच संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्रशासन और संबंधित एजेंसियां घटना के कारणों की जांच कर रही हैं। गैस रिसाव की सटीक वजह और कुल कितने लोग प्रभावित हुए, इसका अंतिम आकलन अभी जारी है।
ग्राउंड रिपोर्ट: पारस बैसवारे | नागपुर टुडे



