Published On : Fri, Nov 10th, 2017

मेडिकल हॉस्पिटल के रेसिडेंट डॉक्टरों का काटा 5 दिनों का वेतन

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नागपुर: सुरक्षा रक्षकों की मांग को लेकर मेडिकल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने काम बंद आंदोलन किया था. जिसका मुआवजा प्रशासन ने इन डॉक्टरों का 5 दिन का वेतन काट कर दिया. करीब 340 डॉक्टरों का वेतन काटा गया. इस बार इनकी सैलरी में 5 दिन का वेतन कम दिया गया है. जिसके कारण रेसिडेंट डॉक्टरों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है. अक्टूबर महीने में हुए इस आंदोलन में करीब 350 रेसिडेंट डॉक्टर और 200 इंटर्न डॉक्टर शामिल हुए थे. काम बंद आंदोलन के कारण मरीजों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था.

इन डॉक्टरों के आंदोलन में शामिल होने के कारण 100 सीनियर रेसिडेंट डॉक्टरों और 35 अंडर रेसिडेंट डॉक्टरों ने अपनी सेवाएं दी थीं. जबकि फैकल्टी के 300 डॉक्टर ओपीडी संभाल रहे थे. हालांकि पांच दिन चले इस आंदोलन के बाद डॉक्टरों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया और मेडिकल हॉस्पिटल में सुरक्षा रक्षकों की तैनाती कर दी थी. लेकिन अब वेतन पूरा नहीं मिलने की वजह से डॉक्टरों ने नाराजगी जाहिर की है. इस आंदोलन करने के कारण वेतन काट कर मेडीकल प्रशासन ने इनको सजा ही दी है यह कहना गलत नहीं होगा. जबकि इनकी मांग केवल मुख्य रूप से सुरक्षा ही थी.

इस बारे में महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ़ रेजिडेंट डॉक्टर्स (मार्ड) के सचिव डॉ. लाजपत अग्रवाल ने बताया कि अक्टूबर महीने में जितने भी रेसिडेंट डॉक्टर कामबंद आंदोलन में शामिल हुए थे, सभी का 5 दिन का वेतन काटा गया है. सुरक्षा रक्षकों की मांग को लेकर कामबंद आंदोलन किया गया था. सुरक्षा रक्षकों की तैनाती हॉस्पिटल में मेडिकल प्रशासन ने कर तो दी है, लेकिन लिखित में यह नहीं बताया कि कितने दिनों तक हॉस्पिटल में यह सुरक्षा रहेगी. अग्रवाल का कहना है कि कई मांगें अब भी पूरी नहीं हुई हैं. उन्होंने बताया कि वेतन काटने के सन्दर्भ में डॉक्टरों की ओर से शिकायत की गई थी. लेकिन उस पर भी कोई ध्यान मेडिकल प्रशासन की ओर से नहीं दिया गया.