Published On : Tue, May 5th, 2020

गरीब मस्त, अमीर सुस्त, लेकिन मिडल क्लास होगा पस्त !

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नागपूर– कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए पूरे देश मे लॉकडाउन किया गया है. जिसके कारण काम पूरी तरह से ठप्प पड़ गया है. गरीब और अमीर दोनों इस लॉकडाउन से प्रभावित हुए है. लेकिन इसमें सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी का हो रहा है या यूं कहें कि आनेवाले समय मे होगा तो वह होगा मिडल क्लास(middle class) का. क्योंकि इनकी सीमित आय (income) होती है. जिसमें पूरे महीने भर के खर्च करने होते है. बच्चों की स्कूल की फीस, बिजली का बिल, बैंक की इन्सटॉलमेंट सभी उन्हें पहले जैसे ही देने होंगे. क्योंकि सरकार ने लॉकडाउन में किसी का भी बिजली बिल माफ नही किया है, न ही स्कूल ने फीस माफ की है और नाहीं बैंक ने इन्सटॉलमेंट माफ की है. केवल इन लोगों को कुछ महीने की रियायत दी है.इसका मतलब यह है कि लॉकडाउन खुलते ही इन्हें तीनों महिने के पैसे देने होंगे. इसका सीधा असर इनके घर की आर्थिक परिस्थिति पर होगा और कई महीनों तक इनका घर का बैलेंस बिगड़ जाएगा. यह बात इनको भी पता है, जिसके कारण अब यह तबका भी बेचैन होने लगा है.

अब बात करते है गरीब तबके की, जिसमें से बहोत कम ऐसे है जिन्होंने बैंक से लोन ले रखा हो, जिनके बच्चे बहोत बड़ी स्कूल में पढ़ते हो, या फिर जिनका बिजली बिल बहोत ज्यादा आता हो. तो इन्हें इन सारी बातों की परेशानी बहोत कम है. हालांकि काम बंद होने से इनपर थोड़ी बहोत परेशानी आयी है. लेकिन लॉकडाउन के बाद से ही जिस तरह से सैकड़ो एनजीओ, और कई अमीर लोगों ने और राजनैतिक पार्टियों ने अनाज बाटना शुरू किया तो इन तबको के ज्यादातर लोगों ने इसका लाभ उठाया. जितनी जगह पर राशन वितरित किया गया ,सभी जगहों से इन्होंने राशन जमा किया.

कई जगहों पर तो ऐसा भी देखने मे आया है कि 5 से 6 महीनों तक का राशन इन लोगों के पास जमा हो गया है. जिसके कारण अब सबसे जरूरत की चीज राशन की चिंता इनकी खत्म हो गई है. हालांकि दूसरे खर्च के लिए अब यह काम पर जा रहे है. हालांकि सभी गरीब लोगों तक राशन नही भी पहुंचा है. लेकिन फिर भी जिन्हें बीपीएल(BPL)की संज्ञा दी गई है , इनकी परेशानी मिडल क्लास से कम ही है.

इनमें सबसे आखरी अमीर लोग है. जो फिलहाल कई जगहों पर राशन बांट रहे है. इनके संस्थान ,दुकानें, बिजनेस बंद है. आवक बंद हो गई है. लेकिन इनके पास काफी पैसा है. जिसके कारण भले ही इनकी देनदारी लाखों रुपए की हो, लेकिन इनपर फिर भी दबाव कम है. क्योंकि पैसों की तंगी से इन्हें जूझना नही पड़ेगा.

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देश मे बहोत बड़ा तबका मिडल क्लास ( middle class) में आता है. इस लॉकडाउन के बाद भले ही उसका कोई फायदा न हुआ हो, लेकिन नुकसान सबसे ज्यादा उसी का हो रहा है. लॉकडाउन में भले ही वह किसी भी राशन की लाइन में न लगा हो, लेकिन लॉक डाउन में भी उसके घर के खर्च कम नही हुए है. यानी जब लॉकडाउन खुलेगा तो उसे सभी लोगों को 3 महीने का पैसा देना होगा. इस लॉकडाउन से सबसे ज्यादा अगर कोई आनेवाले दिनों में त्रस्त होगा तो वह होगा मिडल क्लास(middle class).

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