Published On : Sun, Jul 17th, 2016

नागपुर: गणेश उत्सव हेतु मिटटी की मूर्तियों का निर्माण शुरू

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ganpati-nagpurNagpur: शहर के कोने-कोने में गणेशोत्सव हेतु मिटटी की छोटी,बड़ी और विशालकाय मूर्तियों का निर्माण कार्य शुरू हो चूका है.प्रदुषण मुक्तता के लिए सम्पूर्ण देश में प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के निर्माण पर पाबंधिया लगाई गई है.इस वजह से पिछले साल से पुनः एकबार मिटटी की मूर्तियों की मांग बढ़ी है.गणेशोत्सव ५ सितंबर से शुरू होगा।

गणेश चतुर्थी हिंदुओं का एक सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह हिंदू धर्म के लोगों द्वारा हर साल बहुत साहस, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह भारत में विनायक चतुर्थी के नाम से भी लोकप्रिय है। यह प्राचीन काल से पूरे भारत में हिन्दूओँ के सबसे महत्वपूर्ण देवता, भगवान गणेश जी (जिन्हें हाथी के सिर वाला, विनायक, विघ्नहर्ता, बुद्धि के देवता और प्रारम्भ के देवता आदि के नाम से जाना जाता है) को सम्मानित करने के लिये मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह (अगस्त और सितम्बर के बीच) भाद्रप्रदा के महीने में हर साल आता है। यह शुक्ल चतुर्थी (अर्थात् चाँद वृद्धि अवधि के चौथे दिन) पर शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी पर 10 दिन (अर्थात् चाँद वृद्धि अवधि के 14 वें दिन) के बाद समाप्त होता है।

ganesh-puja-nagpurगणेश चतुर्थी का त्यौहार कई रस्में, रीति रिवाज और हिंदू धर्म के लोगों के लिए बहुत महत्व रखता है। विनायक चतुर्थी की तारीख करीब आते ही लोग अत्यधिक उत्सुक हो जाते हैं। आधुनिक समय में, लोग घर के लिए या सार्वजनिक पंडालों को भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्ति लाते है और दस दिनों के लिए पूजा करते हैं। त्यौहार के अंत में लोग मूर्तियों को पानी के बडे स्रोतों (समुद्र, नदी, झील, आदि) में विसर्जित करते हैं।

गणेश विसर्जन का महत्व

गणेश विसर्जन हिंदू धर्म में बहुत महत्व रखता है। गणेश जी की मूर्ति मिट्टी की बनी होती है जो पानी में विसर्जित होने के बाद बेडौल हो जाती है। इसका मतलब है कि इस दुनिया में सब कुछ एक दिन (मोक्ष या मुक्ति) बेडौल हो जाएगा। गठन और बैडोल होने की प्रक्रिया कभी न खत्म होने वाला घेरा (अर्थात् चक्र) है। हर साल गणेश जीवन के इसी परम सत्य के बारे में हमें यकीन दिलाने के लिए आते हैं।

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– राजीव रंजन कुशवाहा

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