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    Published On : Tue, Jun 30th, 2020

    गडकरी ने केंद्र को पत्र लिखकर मुंढे पर कार्रवाई की मांग की 

    तुकाराम मुंढे प्रकरण में नया मोड़ 

    नागपुर- भारतीय प्रशासनिक अधिकारी (आईएएस ) मनपा के आयुक्त तुकाराम मुंढे और महापौर समेत मनपा के लिए निर्वाचित अन्य पार्षदों के बीच जारी विवाद ने एक दिलचस्प नया मोड़ ले लिया है. अब इस विवाद में हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय मंत्री तथा भाजपा के कद्दावर नेता नितिन गडकरी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मुंढे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है. गडकरी ने पत्र में मुंढे के खिलाफ अनुशासनहीनता, गैरकानूनी, असंवैधानिक तरीके से नागपुर शहर के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट एवं अन्य जरुरी कामों में बाधा पैदा करने का आरोप लगाया है.

    यही नहीं केंद्र द्वारा दिए गए फंड  एवं राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध की गई राशि में भी धोखाधड़ी करने का आरोप मुंढे पर गडकरी ने लगाया है.

    मालूम हो कि जारी विवाद में तब गंभीर मोड़ ले लिया था, जब नागपुर के महापौर संदीप जोशी ने एक स्थानीय पुलिस स्टेशन में मुंढे और मनपा के अन्य कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ दंड सहिंता की धारा 420,463,464,465,466,468,471 और कंपनी एक्ट की धारा 447 के अंतर्गत एक मामला दर्ज कराया था. यह मनपा के इतिहास का संभवत: पहला अवसर है, जब किसी मनपा आयुक्त के खिलाफ स्वयं महापौर द्वारा धोखाधड़ी, 420, गैरकानूनी, असंवैधानिक कृत्य के आरोप लगाते हुए कोई मामला पुलिस में दर्ज कराया गया हो.

    यह नागपुर शहर के लिए अत्यंत ही दुखदायी है कि जिस नागपुर शहर को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने सपनों का नगर बनाने का ऐलान किया था, उस नागपुर में कोई सरकारी अधिकारी निर्वाचित जनप्रतिनधियों की उपेक्षा करते हुए कामकाज में बाधा उत्पन्न करे. श्री गडकरी ने केंद्रीय राज्यमंत्री हरदीपसिंह पूरी ( MINISTER OF STATE FOR HOUSING AND URBAN AFFAIRS  ) को दो दिन पहले पत्र लिखकर अत्यंत ही कड़े शब्दों में कहा है कि मनपा आयुक्त बनने के बाद मुंढे ने गैरकानूनी, असंवैधानिक ढंग से स्वयं को ( NSSCDCL ) कंपनी का सीईओ घोषित कर डाला, जबकि इस पद पर नियुक्ति का अधिकार सिर्फ बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स को है. क्योंकि बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने ऐसी कोई नियुक्ति नहीं की, मुंढे द्वारा स्वयं को सीईओ घोषित करना न केवल असवैधानिक है, बल्कि जनता और सरकार के साथ धोखाधड़ी का ज्वलंत उदाहरण है.

    मालूम हो की इसके पूर्व स्मार्ट सीटी प्रोजेक्ट के सीईओ रामनाथ सोनवणे ने 31. 12. 2019 को इस्तीफा दे दिया था. तब से बोर्ड की कोई भी बैठक आज तक नहीं हुई है. लेकिन मुंढे ने न केवल स्वयं को सीईओ घोषित कर दिया, बल्कि महाराष्ट्र बैंक में कंपनी के चालु खाते में फर्जीवाड़ा कर हस्ताक्षर भी डलवाकर अकाउंट चलाना शुरू कर दिया . मुंढे ने अनेक समाचारपत्रों और टीवी चैनेलों को बार बार यह बताया कि चेयरमैन प्रवीण परदेशी ने उन्हें नियुक्त किया है. जबकि नियुक्ति का अधिकार केवल बोर्ड को ही प्राप्त है। मुंढे द्वारा खुद को सीईओ घोषित करने के बाद श्री मुंढे का आचरण न केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध रहा, बल्कि उन्होंने मनमाने ढंग से कंपनी में काम करना शुरू कर दिया .  उन्होंने न केवल पूर्व में स्वीकृत अनेक टेंडरो को खारिज किया, बल्कि अनुबंध पर काम कर रहे कंपनी और मनपा के अनेक कर्मचारियों को भी बर्खास्त कर दिया . इन बर्खास्तगियों के खिलाफ जनता में भयंकर आक्रोश पैदा हुआ, क्योंकि जब शहर कोविड-19 (कोरोना) के आक्रमण से बुरी तरह से प्रभावित है,ऐसे संकट के काल में किसी कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त करने को घोर अमानवीय माना गया. महाराष्ट्र बैंक में जिस प्रकार कुछ पदाधिकारियों की मिलीभगत से आयुक्त मुंढे ने अपने हस्ताक्षर दिए, उसे विशुद्ध फरेब, जालसाजी का मामला माना जा रहा है. गडकरी ने केंद्र सरकार का पत्र में ध्यान आकृष्ट किया है कि केंद्र सरकार द्वारा दिए गए फंड का और जनता के पैसों का दुरूपयोग किया गया. 

    ऐसी स्थिति नागपुर शहर के लिए अस्वीकार्य है. महत्वकांक्षी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में अवरोध पैदा कर श्री मुंढे न केवल नागपुर शहर का नुकसान कर रहे है बल्कि स्थापित संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली की अवमानना भी कर रहे है. मालूम हो कि पिछले दिनों मनपा की आम सभा में पूरी सभा का अपमान करते हुए श्री मुंढे बहिष्कार कर बाहर चले गए थे. इसे सभी ने लोकतंत्र का अपमान बताया था. श्री मुंढे संभवत: यह भूल जाते हैं कि वे एक सिविल सर्वेंट मात्र हैं , जो निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के प्रति उत्तरदायी है. स्थापित नियमों के अनुसार और परंपरा के अनुसार उन्हें अपने कार्य निष्पादित करने होते है. ऐसे में निर्वाचित जनप्रतिधियों की उपेक्षा कर उन्होंने तानाशाही प्रवृत्ति का परिचय दिया है. नागपुर की जनता आज भी  उन दिनों की याद करती है, जब चंद्रशेखर मनपा आयुक्त बनकर आए थे. तब उन्होंने स्वच्छ-सुंदर नागपुर की कल्पना को मूर्त रूप दिया था. बगैर किसी प्रचार या अभिमान के उन्होंने मनपा की योजनाओ को क्रियान्वित किया था।नागपुर शहर का स्वरुप उन्होंने बदलकर रख दिया था. हर किसी व्यक्ति ने मनपा आयुक्त चंद्रशेखर की प्रशंसा की थी. चंद्रशेखर ने स्वयं को प्रचार से दूर रखा था. जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर उन्होंने विभिन्न योजनाओ को क्रियान्यवित किया था। आज नागपुर शहर एक स्वच्छ- सुंदर शहर के रूप में स्थापित है तो इसका श्रेय चंद्रशेखर को जाता है. जबकि ठीक इसके उलट तुकाराम मुंढे ने आते ही सबसे पहले संभवत: किसी अहंकार में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करनी शुरू कर दी.मुंढे के हर आचरण से ऐसा लगा जैसे वे ठान कर आये हो कि ‘ मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूं ‘ बाकी सब उनके अधीनस्थ कर्मचारी हैं .    लोकतंत्र इसे स्वीकार नहीं करता .  भारतीय सविंधान ने संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली की स्थापना में इस बात का हमेशा ध्यान रखा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियो को पूरा सम्मान मिले . सरकारी अधिकारी उनके सहयोगी के रूप में होते है.ऐसा लगता है कि IAS अधिकारी मुंढे ये भी भूल गए कि नगर का महापौर, नगर का प्रथम नागरिक होता है। उन्हें अलग से संविधान ने विशेष अधिकार नहीं दिए हैं।उन्हें अधिकार नहीं कि वे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करें.उन्हें अपमानित करें। लेकिन मुंढे का जो आचरण है ,उससे ऐसा लगता है कि उन्हें स्मार्ट सिटी या शहर के अन्य कामों के निष्पादन में उतनी दिलचस्पी नहीं है , जितनी दिलचस्पी स्वयं को प्रचारित करने में . उनकी इसी भावना के कारण इनके अनेक प्रशंसक भी इनके आलोचक बन गए है. आरंभ में ऐसे लगा था कि मुंढे सचमुच चंद्रशेखर की तरह नागपुर शहर के विकास के लिए, इसके सौन्दर्यीकरण के लिए ‘ अच्छे कदम उठाएंगे . जनता का उन्हें सहयोग भी मिलता, जैसा चंदरशेखर को मिला था . लेकिन उन्होंने आते ही राजनीति शुरू कर दी जिसका असर ऐसा हुआ कि अनेक विकास के काम ठप पड़ गए.  

    श्री  गडकरी ने अपने पत्र में इसका विस्तार से  उल्लेख करते हुए साफ़ किया है कि मनपा आयुक्त श्री मुंढे के कारण नागपुर शहर का विकास अवरुद्ध हो रहा है.

       

    नितिन गडकरी  द्वारा लिखे गए पत्र करना चाहेंगे कि नागपुर शहर एक सपने की पूर्ति की ओर आगे बढ़ रहा है. नितिन गडकरी पहले ही घोषित कर चुके है कि नागपुर शहर को हम विश्व स्तर का शहर बनाकर रहेंगे .  ऐसे में उनके प्रयासों पर बाधा बनकर तुकाराम मुंढे ने अत्यंत ही आपत्तिजनक कृत्य किए है. यह किसी एक व्यक्ति या संस्थान, या दल के लिए नहीं, बल्कि पूरे के पूरे नागपुर शहर की जनता का अपमान है. यहां की जनता प्रतीक्षा कर रही है नागपुर शहर विश्व के नक़्शे पर सर्वश्रेष्ठ स्वस्थ,स्वच्छ, सुंदर शहर के रूप में स्थापित हो. श्री मुंढे को चाहिए कि इसमें वह अपनी ओर से मदद करे, न कि अवरोध पैदा करें. अब जबकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मामला केंद्र सरकार के संज्ञान में लाया है , ऐसा लगता है कि संभवत: अब तुकाराम मुंढे को अपनी कार्यशैली में परिवर्तन लाना होगा।अन्यथा, इस पद पर कार्य नहीं कर पाएंगे और अगर मौजूद रह भी गए तो उन्हें नियम के अनुसार निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को आदर, सम्मान देते हुए  सभा के निर्णयों पर ईमानदारी पूर्वक क्रियान्वयन करना होगा . अगर वे ऐसा नहीं करते है तो नागपुर शहर की जनता का चरित्र ऐसा है कि वे सम्मान करना तो जानती है, लेकिन अगर कोई नागपुर शहर के ऊपर कालिख पोतने की कोशिश करता है , तो उसके चेहरे पर कालिख लगाना भी अच्छी तरह जानती है.  तुकाराम मुंढे इस सच को न भूलें.  
     

     

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