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    Published On : Thu, Dec 22nd, 2016

    हताश ठेकेदारों ने मचाया हंगामा

    NMC nagpurनागपुर महानगरपालिका में विकास कार्यों का धुरा संभाल रहे ठेकेदारों को बकाया भुगतान करने में मनपा प्रशासन ने सकारात्मक रुख अपनाने की बजाय हाथ खड़े कर दिए तो दूसरी ओर मनपा पदाधिकारी आये दिन आश्वासन देकर टालते जा रहे है।इससे क्षुब्ध होकर आज ठेकेदारों ने प्रभारी वित्त व लेखा अधिकारी के समक्ष जमकर हंगामा कर अपनी भड़ास निकाली।

    मनपा के ठेकेदारों के मार्फ़त मनपा प्रशासन शहर भर में विकास कार्य कराती है। लेकिन मनपा प्रशासन इन्हें कभी भी वक़्त पर बकाया भुगतान नहीं करती। जबकि अन्य मामलों में जमकर पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। बकाया भुगतान को लेकर ठेकेदारों का शिष्टमंडल विगत दिनों मनपायुक्त से मिला तो मनपा आयुक्त ने साफ़-साफ़ शब्दो में जवाब दिया कि जब निधि आएगी, भुगतान कर दिया जाएगा। इसके कुछ दिन बाद मनपा ठेकेदार बड़े उम्मीद के साथ महापौर से मिले तो महापौर ने अगले 10 दिनों में भुगतान का आश्वासन दिया। आज जब महापौर से मिलने ठेकेदारों ने इच्छा जताई तो महापौर ने स्थाई समिति अध्यक्ष से मुलाकात करने की सलाह दी। हताश ठेकेदारों ने स्थाई समिति अध्यक्ष से मिल अपना रोना रोया तो अध्यक्ष ने अपना पल्ला झाड़ महापौर के पाले में गेंद डालते हुए, शिष्टमंडल से कहा कि महापौर से चर्चा कर समस्या सुलझाता हूँ। अध्यक्ष के रवैये से नाराज शिष्टमंडल सह ठेकेदारों का हुजूम प्रभारी वित्त व लेखाधिकारी से मिला और उनको भी हाथ खड़े करते देख जमकर हंगामा और नारेबाजी करने लगे।

    सूत्र बताते है कि मनपा से लेकर राज्य व केंद्र में एक ही दल की मजबूत सरकार है।लेकिन मनपा की दयनीय आर्थिक स्थिति पर सत्ताधारी पक्ष ने मुख मोड़ रखा है। मनपा का राज्य सरकार के पास शिक्षण विभाग का 30 करोड़, स्वास्थ्य विभाग का 25 करोड़, एलबीटी का 40 करोड़, सुरेश भट्ट सभागृह का 20 करोड़ बकाया है। अगर यह राशि भी मिल जाती तो ठेकेदारों का मसला तत्काल सुलझ जाता। दूसरी ओर मनपा के वित्त व लेखा अधिकारी मदन गाडगे लंबे अवकाश पर है, उन्होंने अवकाश पर जाने से पहले ठेकेदारों के कुल बकाये में से 12 करोड़ के चेक हस्ताक्षर कर रख दिए थे, लेकिन भुगतान के प्रति खाकी और खादी की नकारात्मक रुख की वजह से ठेकेदारों को नाना प्रकार के आफतों का सामना करना पड़ रहा है। लाजमी है कि इस समस्या से मनपा के विकास कार्यों पर भी असर होंगे। वैसे सत्ताधारी अपने मंसूबे के हिसाब से प्रकल्पों को पूरा करने में कोई कोताही नहीं बरत रही है।

    उल्लेखनीय यह है कि ठेकेदार संगठन में भी सत्ताधारियो का अच्छा-खासा दबदबा है, फिर भी ठेकेदार संगठन ठेकेदारों को बकाया भुगतान दिलाने में लगातार असफल रही है।


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