
नागपुर : नागपुर में उनके पहले सार्वजनिक सत्र में अभूतपूर्व सहभागिता और IIIT नागपुर में हुए ऊर्जावान संवाद के बाद, विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक-लेखक आचार्य प्रशांत का VNIT नागपुर में भव्य स्वागत किया गया। पूरे परिसर में उत्सुकता और जिज्ञासा का वातावरण था, जहाँ बड़ी संख्या में छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों ने भी इस सत्र में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
संवाद सत्र के दौरान छात्रों ने शिक्षा, करियर और जीवन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रश्न रखे। एक छात्र द्वारा पूछे गए FOMO – यानी “Fear of Missing Out” – के प्रश्न पर आचार्य प्रशांत ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया भाव नहीं है, बल्कि जन्म से ही मनुष्य इसका अनुभव करता आया है। गीता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा के दुर्योधन ने भी यही भाव अनुभव किया था, जिसने उसे श्री कृष्ण के विरुद्ध खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा कि यह भय अहंकार की उस झूठी धारणा से उत्पन्न होता है, जिसमें व्यक्ति स्वयं को अलग और अपूर्ण मानता है। अहंकार एक ऐसा शून्य है जो सब कुछ प्राप्त कर लेने पर भी संतुष्ट नहीं होता। जलवायु परिवर्तन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह समस्या भी कहीं न कहीं उन लोगों से जुड़ी है जो अधिक शिक्षित हैं और इस तरह के भय का अधिक अनुभव करते हैं।
प्रश्नोत्तर सत्र के पश्चात आचार्य प्रशांत ने श्रीमद्भगवद्गीता के तीसरे अध्याय के श्लोक 24 और 25 पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन के भ्रम और इच्छाओं से प्रेरित संकुचित उद्देश्यों को समाप्त किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के उद्देश्य जितने छोटे होते हैं, उसके कर्म भी उतने ही सीमित हो जाते हैं। अधिकांश लोग छोटा जीवन जीते हैं क्योंकि उनके लक्ष्य और इच्छाएँ सीमित होती हैं।
आचार्य प्रशांत इससे पहले IITs, IIMs, AIIMS और IISc जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में हजारों युवाओं के साथ संवाद कर चुके हैं। VNIT नागपुर का यह सत्र भी उसी श्रृंखला का एक सशक्त और प्रेरणादायक पड़ाव साबित हुआ।








