Published On : Mon, Sep 7th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

2.22 करोड़ रुपये के गबन में चार आरोपियों को छह साल का सश्रम कारावास

एमपीआईडी कोर्ट का फैसला; प्रत्येक आरोपी पर अलग-अलग 20 हजार रुपये का जुर्माना
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2.22 करोड़ रुपये के गबन में चार आरोपियों को छह साल का सश्रम कारावास

नागपुर टुडे – विश्वकर्मा ग्रामीण शेती सहकारी पतसंस्था में नियमबाह्य और अवैध लेन-देन के जरिए जमाकर्ताओं की करीब 2 करोड़ 22 लाख 80 हजार 710 रुपये की राशि के गबन और धोखाधड़ी के मामले में एमपीआईडी कोर्ट ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 7 सितंबर 2026 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश, एमपीआईडी कोर्ट, नागपुर आशिष ए. अयाचित ने सुनाया।

अदालत ने मामले में आरोपी पुरुषोत्तम तुलशीराम बेले (54), निवासी दिघोरी, नागपुर, नरेश तुलशीराम दांडेकर (52), निवासी जुना सुभेदार, नागपुर, वासुदेव विठोबाजी हिरुळकर (51), निवासी सक्करदरा, नागपुर तथा दिंगाबर आनंदराव येवले (64), निवासी भोलेबाबा नगर, नागपुर को दोषी करार दिया।

अदालत ने एमपीआईडी एक्ट की धारा 3 के तहत चारों आरोपियों को 6 वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक को 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर प्रत्येक आरोपी को अतिरिक्त 3 माह का कारावास भुगतना होगा।

इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 409 व 467 के तहत 6 वर्ष के कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा, धारा 471 के तहत 2 वर्ष के कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा तथा धारा 120-बी के तहत 6 माह के कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। इन धाराओं में भी जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया गया है।

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पदाधिकारियों ने किया था नियमबाह्य लेन-देन
पुलिस के अनुसार, 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2019 के बीच आरोपी विश्वकर्मा ग्रामीण शेती सहकारी पतसंस्था मर्यादित सोसायटी, मुख्य कार्यालय खरबी के पदाधिकारी थे। आरोप है कि उन्होंने संस्था के प्रबंधक, कैशियर और क्लर्क के साथ मिलीभगत कर नियमों को ताक पर रखकर अवैध लेन-देन किया।

इस दौरान संस्था में जमाकर्ताओं द्वारा जमा की गई कुल 2,22,80,710 रुपये की राशि का कथित रूप से गबन किया गया। इससे संस्था के साथ-साथ बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं को आर्थिक नुकसान पहुंचा।

ऑडिटर की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला
इस मामले में संस्था के लेखा परीक्षक पुंडलिक यादवराव पलांदुरकर (50), निवासी गोधनी ने वाठोडा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 409, 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा एमपीआईडी एक्ट की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया था।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों को 30 जनवरी 2021 को गिरफ्तार किया था। मामले की तत्कालीन जांच अधिकारी आर्थिक अपराध शाखा की पुलिस निरीक्षक श्रीमती शरयू देशमुख थीं। जांच पूरी करने के बाद उन्होंने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।

साक्ष्यों के आधार पर अपराध साबित
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष विभिन्न साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत किए। साक्ष्य एवं गवाहों के आधार पर आरोप सिद्ध होने के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

मामले में सरकार की ओर से अधिवक्ता अभय जिकार ने पैरवी की, जबकि आरोपियों की ओर से अधिवक्ता विकास गिरमकर और विशाल भारद्वाज ने पक्ष रखा। मामले की कोर्ट पैरवी अधिकारी के रूप में नापोंअ. संजय ठाकरे ने कार्य किया।

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