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    Published On : Tue, Jul 31st, 2018
    nagpurhindinews / News 2 | By Nagpur Today Nagpur News

    महाराष्ट्र में कैग ने पकड़ा 500 करोड़ का ‘खेल’

     

    जनसाता अखबार मे छपी खबर के अनुसार,नॉन या शॉर्ट लेवी ऑफ टैक्स के कुल 194 मामलों में 11.93 करोड़ की गड़बड़ी कैग ने पकड़ी, जबकि अलग-अलग अन्य 119 मामलों में सर्वाधिक 449.08 करोड़ रुपये के घपले का खुलासा हुआ। जब देश की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसी कैग ने इन गड़बड़ियों पर संबंधित विभाग से सवाल-जवाब किए तो अफसरों की नींद टूटी और वसूली शुरू हुई।

    हालांकि विभाग 291 मामलों में महज 18.61 करोड़ रुपये ही वसूल पाया। माना जा रहा है कि गिरेबान बचाने के लिए अफसरों ने बाद में ये कार्रवाई की। फिर भी पूरा पैसा नहीं वसूल हो पाया। महाराष्ट्र सरकार के रेवेन्यू सेक्टर पर आई वर्ष 2018 की रिपोर्ट नंबर चार में कैग ने इन गड़बड़ियों की पोल खोली है।

    मराठा आंदोलन की आंच के बाद अब कैग की जांच ने महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। परिवहन विभाग मे जहां साढ़े चार सौ करोड़, वहीं अन्य विभागों में 60 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं हैं। यह अनियमितताएं 2016-17 के दरमियान हुईं।कुल 52 यूनिट की जांच में 461.01 करोड़ के घपले का खुलासा हुआ। गड़बड़ियां दो कटेगरी में हुईं, एक नॉन या शॉर्ट लेवी के चलते तो दूसरा मद कई तरह की गड़बड़ियों यानी मिसलेनियस खाते का रहा।

    यूं हुईं गड़बड़ियांः

    महाराष्ट्र मोटर व्हीकल टैक्स एक्ट, 1958 के सेक्शन 3(1) के तहत बस आदि परिवहन साधनों पर सरकारी टैक्स लगता है। मार्च 2015 से फरवरी 2017 के बीच सात आरटीओ दफ्तरों के रिकॉर्ड की जांच हुई तो पता चला 97 बसों से 52.32 लाख रुपये ही नहीं वसूले गए।

    यहां तक कि आरटीओ ने बस मालिकों को नोटिस भी नहीं जारी की थी। बाद में कैग की ऑडिट से खुलासा होने के बाद 14 मामलों में महज सात लाख की वसूली हुई। इसी तरह माल ढुलाई वाले 123 वाहनों से 26.72 लाख की वसूली नहीं हुई।

    ये गड़बड़ियां आरटीओ के मुंबई ईस्ट, वेस्ट, नासिक, अंबाजोगोई, कल्याण, पनवेल और वाशी कार्यालय से जुड़ीं रहीं। परिवहन विभाग ने गाड़ियां आदि उठाने में इस्तेमाल होने वाले क्रेन आदि भारी वाहनों से भी 25.25 लाख की वसूली नहीं की। ये घपले आरटीओ के नासिक, डिप्टी रिजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर अंबाजगोई, कल्याण, पनवेल, अंधेरी, जलना, नासिक में सामने आईं। महाराष्ट्र सरकार के रेवेन्यू सेक्टर को लेकर वर्ष 2018 की रिपोर्ट नंबर चार में कैग ने कहा है कि जून 2017 में सरकार को ऑडिट की आपत्तियों को लेकर नोटिस जारी हुई मगर फरवरी 2018 तक कोई जवाब ही नहीं दिया गया।

    यहां भी हुआ खेलः

    देवेंद्र फडणवीस सरकार में स्टेट एक्साइज, शिक्षा सेस, रोजगार गारंटी सेस आदि वसूलने मे भी खेल हुआ। 2016-17 में ऑडिट के दौरान जब 139 यूनिटों की कैग ने छानबीन की तो लाइसेंस फीस सहित वित्तीय अनियमितता की 55.26 करोड़ रुपये की धनराशि का पता चला। कुल 412 मामलों मेंये घपले सामने आए। हालांकि जब कैग ने संबंधित विभाग से इन आपत्तियों को लेकर जवाब तलब किया तो विभाग ने 398 मामलों में 50.21 करोड़ की धनराशि वसूल ली। छह करोड़ रुपये की अन्य वित्तीय अनियमितताएं भी सामने आईं।

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