
नागपुर – निवेश पर मोटा मुनाफा कमाने का लालच एक कारोबारी को भारी पड़ गया। साइबर ठगों ने वॉट्सऐप पर निवेश का आकर्षक ऑफर भेजकर पहले भरोसा जीता और फिर उसे फर्जी निवेश ग्रुप में जोड़ दिया। इसके बाद एक नकली निवेश ऐप डाउनलोड करवाकर उसमें निवेश की रकम के साथ कथित भारी रिटर्न दिखाया गया। ठगों के जाल में फंसे मनीष नगर क्षेत्र के 55 वर्षीय कारोबारी ने अलग-अलग माध्यमों से कुल 25 लाख 79 हजार 276 रुपए ट्रांसफर कर दिए। जब रकम वापस नहीं मिली तो उन्हें साइबर ठगी का एहसास हुआ।
वॉट्सऐप पर आया था निवेश का ऑफर
पुलिस के अनुसार, कारोबारी के मोबाइल पर 8 जुलाई से अलग-अलग मोबाइल नंबरों से निवेश संबंधी विज्ञापन और संदेश आने शुरू हुए। संदेशों में निवेश करने पर आकर्षक रिटर्न मिलने का दावा किया गया था। शुरुआत में छोटी-छोटी जानकारियां देकर कारोबारी का भरोसा हासिल किया गया। इसके बाद उन्हें निवेश के लिए लिंक भेजे गए और रकम ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।
फर्जी वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़ा
ठगों ने इसके बाद कारोबारी को ‘एमओएफएसएल वीआईपी 814’ नामक वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़ दिया। ग्रुप में निवेश से संबंधित जानकारियां, कथित मुनाफे और अन्य सदस्यों के निवेश से जुड़े संदेश दिखाए जाते थे। इस पूरे माहौल को इस तरह तैयार किया गया था कि कारोबारी को निवेश प्रक्रिया वास्तविक लगे।
इसके बाद आरोपियों ने उन्हें ‘एमओएफएसएल प्रो’ नाम का ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा। ऐप में निवेश की रकम और उस पर मिलने वाला कथित रिटर्न लगातार दिखाई देता था। स्क्रीन पर बढ़ती रकम देखकर कारोबारी को लगा कि उनका निवेश फायदे में जा रहा है।
आरटीजीएस और एनईएफटी से भेजे लाखों रुपए
आरोपियों के भरोसे में आकर कारोबारी ने अपने एचडीएफसी बैंक खाते से आरटीजीएस और एनईएफटी के जरिए कई बार रकम ट्रांसफर की। अलग-अलग लेन-देन के माध्यम से उन्होंने कुल 25,79,276 रुपए आरोपियों के बताए खातों में भेज दिए।
इसके बाद जब कारोबारी ने अपने निवेश की रकम निकालने की कोशिश की तो परेशानी शुरू हुई। रकम वापस नहीं मिली और आरोपियों की ओर से संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया गया। इसके बाद उन्हें अपने साथ साइबर ठगी होने का संदेह हुआ।
22 सितंबर को साइबर पुलिस में शिकायत
पीड़ित ने मामले की जानकारी साइबर पुलिस को दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 22 सितंबर को मामला दर्ज किया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी, पहचान बदलकर धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जांच
साइबर पुलिस अब आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, वॉट्सऐप ग्रुप, फर्जी ऐप तथा बैंक खातों की जानकारी खंगाल रही है। पुलिस ने जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई, उनके लेन-देन की भी जांच शुरू कर दी है। फिलहाल इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
पुलिस का प्रयास आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के साथ ही ठगी गई रकम के लेन-देन का पता लगाकर उसे फ्रीज अथवा बरामद करने का है। साइबर पुलिस ने नागरिकों से ऑनलाइन निवेश करते समय किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐप डाउनलोड करने अथवा बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल करने की अपील की है।




