
नागपुर: शहर में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक युवक से 12 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने युवक को मनपा, मेट्रो और अन्य सरकारी कार्यालयों में अपनी पहचान होने का दावा करते हुए नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। रकम लेने के बाद भरोसा कायम रखने के लिए कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिया गया। लेकिन जब युवक नियुक्ति पत्र लेकर मेट्रो पहुंचा, तो फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया। मामले में शांतिनगर पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गणेशोत्सव के दौरान हुई थी पहचान
मामला नागपुर के शांतिनगर थाना क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता निखिल मसरके की वर्ष 2025 में गणेशोत्सव के दौरान प्रतीक युवराज उराडे से पहचान हुई थी।
आरोप है कि प्रतीक ने निखिल को बताया कि उसके दोस्तों की मनपा, मेट्रो और अन्य सरकारी कार्यालयों में अच्छी पहचान है। इसी पहचान के जरिए वह निखिल को सरकारी नौकरी दिलवा सकता है।
नौकरी के नाम पर लिए 12 लाख रुपये
नौकरी का भरोसा दिलाकर आरोपियों ने निखिल से अलग-अलग समय में कुल 12 लाख रुपये लिए। पैसे लेने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर एक नियुक्ति पत्र भी दिया, जिससे निखिल को भरोसा हो गया कि उसकी नौकरी लग गई है।
हालांकि, जब निखिल नियुक्ति पत्र लेकर मेट्रो पहुंचा, तो वहां जांच के दौरान पत्र के फर्जी होने का पता चला। इसके बाद निखिल ने आरोपियों से अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन आरोप है कि वे लगातार टालमटोल करते रहे।
सात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
शिकायत के आधार पर शांतिनगर पुलिस ने विशाल जाधव, स्वप्निल सहारे, रोशन वानखेडे, दिगंबर शिंदे, सचिन राठोड, अरविंद चौधरी और प्रतीक युवराज उराडे के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस अब पैसों के लेन-देन, कथित फर्जी नियुक्ति पत्र और सरकारी कार्यालयों में पहचान होने के आरोपों की जांच कर रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस कथित ठगी में और कितने लोग शामिल हैं तथा कहीं अन्य युवाओं को भी इसी तरह नौकरी का झांसा तो नहीं दिया गया।



