Published On : Mon, Feb 24th, 2020

अति महत्वपूर्ण स्थल रवि भवन में ठेका श्रमिकों का हो रहा शोषण

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– मंत्री,लोककर्म विभाग के मुख्य अभियंता,उप अभियंता ने साधी चुप्पी,कनिष्ठ अभियंता ढूंढ रहे मुखभीर को,लीपापोती के लिए कुछ सुरक्षा-रक्षक बढ़ाए जाएंगे

नागपुर : नागपुर के अतिविशिष्ट सरकारी निवास रवि भवन की सुरक्षा ताक पर रख लोककर्म विभाग के मुख्य अभियंता के अधीनस्त उप अभियंता सह कनिष्ठ अभियंता कागजों पर चुस्त सुरक्षा व्यवस्था दर्शा कर अपनी जेबें गर्म कर रहे. इस परिसर में सुरक्षा व्यवस्था,साफ़-सफाई और हाऊस कीपिंग सह कैंटीन का निजीकरण कर दिया गया। जल्द ही रिसेप्शन का भी निजीकरण कर दिया जाएगा। कारण साफ हैं कि लोककर्म विभाग खुद संभाल रही थी तो गुणवत्ता नहीं थी,व्यवस्था चरमराई थी। निजीकरण करने से सुविधा चुस्त तो नहीं हुई लेकिन नियमित जेबें गर्म होने लगी। आला अधिकारियों के बंगलों में फ्री में कर्मी काम करने के लिए भेजे जाने लगे।

हाऊस कीपिंग कर्मी भी शोषण के शिकार
रवि भवन परिसर में पिछले 8-9 वर्षों से एक ही ठेकेदार हाऊस कीपिंग का कामकाज संभाल रहा हैं,जबकि लोककर्म विभाग में 11-11 माह का ठेका ही होता हैं, क्योंकि विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार के मध्य गहरी सांठगांठ हैं, इसलिए सिर्फ दाभोलकर को ही लगातार ठेका दिया जा रहा। इस ठेकेदार के 2 प्रबंधक हैं, संभाजी और निरंजन। इसने हाऊस कीपिंग के लिए एक दर्जन और कमरों और कॉटेजों में खाद्य सामग्री पहुंचाने के लिए डेढ़ दर्जन बाहरी युवक-युवतियों को रखा हैं। इन्हें भी फ्री भोजन के साथ सिर्फ 6-6 हज़ार रुपए तनख्वाह के रूप में दिया जाता। इसके अलावा न मेडिकल और न ही अन्य सुविधाएं दी जाती हैं।एक हॉल जैसा कमरे में सभी एकसाथ रहते,परिसर के बाहर भी जाने की इन्हें अनुमति नहीं।

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याद रहे कि सुरक्षा रक्षक और साफ-सफाई करने वालों के साथ लोककर्म विभाग के शह पर ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा आर्थिक शोषण का मामला सार्वजनिक होते ही। जिम्मेदार अभियंता वर्ग शोषण रोकने के बजाए पोल किसने खोली यह पता लगाने के लिए परिसर में लगे सीसीटीवी को खंगाल रहे। कनिष्ठ और उप अभियंता मामले को दबाने के लिए कर्मियों की संख्या बढ़ाने की पहल कर रहे। क्योंकि कर्मियों की संख्या ठेका शर्तो के हिसाब से बढ़ाये और शर्तों के हिसाब से उन्हें वेतन दिया गया तो अधिकारियों को होने वाला मासिक लाभ का क्रम थम जायेगा।

कनिष्ठ अभियंता तो कम ही अपने कक्ष में नज़र आते,अक्सर वे पीछे गोदाम और अन्य कक्ष में ठेकेदार सह संदिग्धों के साथ गुफ्तगू करते नज़र आते हैं।
उक्त मामलात को गंभीरता से लेने हेतु न कोई मंत्री जो रवि भवन का उपयोग कर रहा और न ही लोककर्म विभाग का मुख्य अभियंता सक्रिय नज़र आ रहे। क्या सभी किसी आला विशिष्ट आगंतुक के साथ हादसा होने का राह तक रहे। या फिर सरकार की कथनी और करनी में अंतर हैं। सरकारी कर्मियों को सप्ताह में 5 दिन काम और 7 वां वेतन आयोग की सिफारिश अनुसार वेतन तो दूसरी ओर सरकारी महकमों में कार्यरत ठेका श्रमिकों को माह में 30 दिन काम के ऐवज में अल्प वेतन।

परिसर में ठेकेदारों के गोडाऊन – शीतकालीन अधिवेशन बीते लगभग 3 माह बीत चुके।लेकिन आज तक ठेकेदारों का मंडप आदि समान परिसर से बाहर नहीं गया। बल्कि परिसर के खुले जगह में स्थाई रूप से रख दिया गया,यह सबसे सुरक्षित जगह भी हैं। इसके ऐवज में संबंधित अधिकारियों को खुश कर दिया जाता हैं।

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