Published On : Tue, Sep 5th, 2017

डिग्री से ज्यादा अनुभव महत्वपूर्ण – डॉ. विकास महात्मे

Dr Vikas Mahatme

नागपुर: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की ओर से शिक्षक दिन के अवसर पर शिक्षक दिन समारोह का आयोजन किया गया था. विश्वविद्यालय के गुरुनानक भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 17 प्राध्यापकों को विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए गए. इस कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद डॉ. विकास महात्मे समेत नागपुर विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सिध्दार्थविनायक काणे, प्र- कुलगुरु प्रमोद येवले व कुलसचिव पूरनचंद्र मेश्राम प्रमुख रूप से मौजूद थे.

इस दौरान मौजूद डॉ.महात्मे ने कहा कि वे अभी भी अपने आपको विद्यार्थी ही समझते हैं. वे अपने अस्पताल को अस्पताल नहीं एक पाठशाला समझते हैं. उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षकों के विद्यार्थियों को क्या पढ़ाया यह महत्व का नहीं है, महत्व इस बात का है कि विद्यार्थियों ने क्या समझा. शिक्षकों को विद्यार्थियों से क्या अपेक्षा रहती है और शिक्षकों को विद्यार्थियों को क्या देना चाहिए यह समझना चाहिए. डॉ. महात्मे ने कंप्यूटर के प्रेसेंटेशन के माध्यम से मौजूद शिक्षकों को और विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया.

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उन्होंने कहा कि आज डिग्री से ज्यादा अनुभव का महत्व है. वकील और डॉक्टर कई वर्षों तक लोगों का इलाज करते हैं लेकिन फिर भी वे प्रैक्टिशनर ही कहलाते हैं. अपने कॉलेज के दिन के अनुभव भी उन्होंने सभी के साथ साझा किए. स्किल, नॉलेज और ऐटिट्यूड को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया. डॉ. महात्मे ने इस दौरान विद्यार्थियों को प्रमुखता से बताया कि एक विद्यार्थी होने के नाते हमेशा उन्हें शिक्षकों से प्रश्न पूछने चाहिए, ताकि ज्ञान का आदान प्रदान हो सके.

इस दौरान डॉ. सिध्दार्थविनायक काणे ने कहा कि शिक्षक शिक्षा की रीढ़ होती है. शिक्षा का अभी बाजारीकरण हो रहा है. इस पर भी सोच विचार करने की जरूरत है. काणे ने मार्गदर्शन करते हुए कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को मार्गदर्शन करने का कार्य करे, स्वयंभू बनने की कोशिश न करे. उन्होंने इस दौरान तथाकथित बाबाओं पर भी टिप्पणी की.

प्र- कुलगुरु प्रमोद येवले ने समारोह में कहा कि राधाकृष्ण सर्वपल्ली के जन्मदिन के अवसर पर सभी शिक्षकों का सम्मान किया जाता है. शिक्षकों के मार्गदर्शन के कारण ही सब बड़े बड़े अधिकारी बनते हैं. माता पिता के बाद शिक्षकों का महत्वपूर्ण स्थान है.

इस समारोह में विभिन्न संकाय के 17 प्राध्यापकों को पुरस्कृत किया गया. इसमें उत्कृष्ट शिक्षा पुरस्कार राजेश पांडे, डॉ. मेघा कानिटकर, डॉ. किरण नागतोड़े, डॉ. शुभांगी रनकणटीवार, भालचंद्र हरदास, डॉ. विलास घोड़े, डॉ. सुजाता देव को दिया गया. विश्वविद्यालय उत्कृष्ट प्राध्यापक डॉ. ओमप्रकाश शिमनकर, डॉ. यशवंत पाटील को दिया गया. उत्कृष्ट संशोधक पुरस्कार दादासाहेब कोकरे , प्राध्यापक राजेश उगले, डॉ.कीर्तिकुमार रणदिवे, डॉ. भारत भानबासे को दिया गया. उत्कृष्ट लेखक पुरस्कार डॉ. संजय जैन, विश्वविद्यालय उत्कृष्ट लेखक के लिए डॉ. वर्षा गणगने और डॉ. गजानन पाटिल को दिया गया. तो वहीं सामाजिक कार्य के लिए प्राध्यापक डॉ. उल्हास मोगलेवार को पुरस्कृत किया गया.

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