Published On : Mon, Nov 19th, 2018

तिकड़ी से मुक्ति के बाद ही ‘आपली बस’ का पटरी पर आने की उम्मीद !

गडकरी के उम्मीदों पर फेर रहे पानी

Aapli Bus

नागपुर: डिम्ट्स करार के खिलाफ काम कर रही है. जगताप प्रबंधन में कच्चे साबित हो रहे हैं और कुकड़े बस संचलन के बाधा मामले पर सफल रहे. ऐसे महारथियों के रहते गडकरी के सपनों की परियोजना पूरी होना असंभव सा लग रहा है. उक्त तीनों की मिलीभगत से आपली बस का मासिक घाटा करोड़ों में पहुंचने से मनपा में बेचैनी देखी जा रही है.

डिम्ट्स पर मेहरबान प्रशासन-पदाधिकारी कंडक्टर आपूर्ति करने वाली एक कंपनी ने जानकारी दी कि डिम्ट्स को मनपा की ओर से परिवहन सेवा संचालन का ठेका दिया गया था. करार के अनुसार डिम्ट्स को जितनी राशि मनपा में भरनी थी, उसने महापौर की शह पर नहीं भरी. क्यूंकि महापौर ने परिवहन सेवा के एकमात्र ठेकेदार कंपनी को छूट दे रखी थी.

परिवहन विभाग के सूत्रों ने बताया कि तथाकथित परिवहन प्रबंधक जगताप पर खरीदी के साथ डिम्ट्स को खुल कर समर्थन देने सम्बंधी कई आरोप प्रशासन-पदाधिकारियों पर मढ़े गए, लेकिन जगताप की पहुंच के कारण एक भी मामले की जांच पूरी नहीं हो सकी. क्यूंकि जगताप शहर बस संचालन मामले के प्रबंधन में असफल रहे, इसलिए मनपा परिवहन सेवा रोजाना के खर्च का आधा ही खर्च वसूल पा रही है.

परिवहन समिति के अन्य सदस्यों के अनुसार कुकड़े को सभापति बनाकर सत्तापक्ष पशोपेश में पड़ गया है. कुछ माह पहले उन्हें बढ़ाकर अन्य समिति प्रमुख बनाने की योजना सत्तापक्ष की थी, लेकिन कुकड़े की साफगोयी कि जिस समिति में डालेंगे, वहां हलचल करूंगा के चलते सकपकाए सत्तापक्ष ने कुकड़े को परिवहन समिति में बनाए रखा. पहले कुकड़े की परिवहन व्यवस्थापक से बनती नहीं थी, लेकिन समय रहते दोनों की कड़वाहट दूर होने लगी. वैसे कुकड़े परिवहन समिति पर कम और एसएनडीएल की जिम्मेदारी पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.

उक्त सभी तर्कों से साबित हो रहा है कि गडकरी कितना भी सर पटक लें, व्यवस्था कर दें, मनपा के उक्त तीनों उनके मनसूबे पर पानी फेरने के लिए एक पैर पर खड़े हैं. जब तक तीनों या फिर तीन में दो ‘आपली बस’ संचालन से मुक्त नहीं किए जाते.

उल्लेखनीय यह है कि उक्त तीनों की निष्क्रियता से ग्रीन बस बंद हुई थी और अब शुरू होने की उम्मीद भी नहीं नज़र आ रही. इसके बाद साएनजी और बायो डीजल से बस संचालन एक सपने जैसा लग रहा है.