Published On : Mon, Aug 27th, 2018

RTI से फिर उठा EVM पर सवाल- कहां गायब हो गईं 19 लाख मशीनें

Advertisement

EVM Machine

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की खरीदारी में बड़ी धांधली उजागर हुई है. सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में ईवीएम सप्लाई करने वाली दो कंपनियों और चुनाव आयोग के आंकड़ों में बड़ी असमानता सामने आई है. आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक कंपनियों ने जितनी मशीनों की आपूर्ति की है और चुनाव आयोग को जितनी मशीनें मिली हैं उनमें करीब 19 लाख का अंतर है.

चुनाव आयोग (EC) दो सार्वजनिक क्षेत्र के ईवीएम आपूर्तिकर्ताओं इलेक्ट्रानिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL), हैदराबाद और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), बेंगलुरु से ईवीएम खरीदता है. हालांकि दोनों कंपनियों और ईसी द्वारा RTI में दिए गए आंकड़े में बड़ा अंतर सामने आया है.

यह आरटीआई मुंबई के एस रॉय ने लगाई थी. इसके जवाब में जो जानकारी उन्हें मिली उसमें ईवीएम की खरीद-फरोख्त में गंभीर बेमेल देखने को मिला है, इससे पता चलता है कि यह एक बड़ी गुत्थी है, जो उलझती जा रही है. रॉय ने बॉम्बे हाईकोर्ट से पूरे मामले की जांच की मांग की है.

रॉय ने बताया कि 1989-1990 से 2014-2015 तक के आंकड़ों पर गौर करें तो चुनाव आयोग का कहना है कि उन्हें बीईएल से 10 लाख 5 हजार 662 EVM प्राप्त हुए. वहीं बीईएल का कहना है कि उसने 19 लाख 69 हजार 932 मशीनों की आपूर्ति की. दोनों के आंकड़ों में 9 लाख 64 हजार 270 का अंतर है.

Advertisement

ठीक यही स्थिति ECIL के साथ भी रही, जिसने 1989 से 1990 और 2016 से 2017 के बीच 19 लाख 44 हजार 593 ईवीएम की आपूर्ति की. लेकिन चुनाव आयोग ने कहा कि उन्हें केवल 10 लाख 14 हजार 644 मशीनें ही प्राप्त हुईं. यहां 9 लाख 29 हजार 949 का अंतर रहा.

ईवीएम पर खर्च के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर
पहले की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि चुनाव आयोग के अनुसार, BEL से ईवीएम की खरीद पर 536.02 करोड़ रुपये का कुल खर्च हुआ है, जबकि BEL ने कहा कि उन्हें 652.56 करोड़ रुपये मिले हैं. यहां ईवीएम के खर्च में भी बड़ा अंतर है. ईसीआईएल से ईवीएम मंगाने पर चुनाव आयोग के खर्च की जानकारी उपलब्ध नहीं है.

दिलचस्प बात यह है कि ईसीआईएल ने बताया कि उसने 2013-2017 से 2013-2014 के बीच किसी भी राज्य में एक भी ईवीएम की आपूर्ति नहीं की थी. फिर भी ईसीआईएल को चुनाव आयोग के माध्यम से मार्च से अक्टूबर 2012 के बीच महाराष्ट्र सरकार से 50.64 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई.

रॉय का सवाल है कि आखिरकार ईवीएम की दो कंपनियों से मिले आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर क्यों है. बीईएल और ईसीआईएल द्वारा आपूर्ति की जाने वाली अतिरिक्त मशीनें वास्तव में कहां गईं? यह गड़बड़ी ईवीएम पर हुए खर्च में मिली है.

पुरानी ईवीएम नष्ट करने के सवाल भी स्पष्ट नहीं है. 21 जुलाई, 2017 को चुनाव आयोग ने कहा कि उसने कोई भी ईवीएम रद्दी में नहीं बेचा है. वहीं, ऐसा माना जाता है कि 1989-1990 की ईवीएम को निर्माताओं द्वारा स्वयं नष्ट कर दिया गया था. चुनाव आयोग ने कहा है कि 2000-2005 के बीच उन्हें मिली (पुरानी/ खराब/अपूर्ण) ईवीएम को नष्ट करने की प्रक्रिया अभी भी विचाराधीन है. यानी इससे साफ होता है कि सभी मशीनें अब भी चुनाव आयोग के कब्जे में हैं.

Advertisement
GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Follow Nagpur Today on Google
Add Nagpur Today to your Preferred Sources on Google to see our latest news more prominently in Search.