Published On : Tue, Aug 28th, 2018

महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ चुनाव आयोग हाईकोर्ट में

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नागपुर. राज्य में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में राज्य चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र सरकार पर चुनावों में बाधाएं डालने का आरोप लगाते हुए मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में एक याचिका दायर की है.

जिला परिषद चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने और राज्य सरकार को इसकी पूर्व सूचना देने के बाद भी जानबूझकर सरकार तकनीकी बाधाएं खड़ी कर रही है. आयोग की याचिका पर हाईकोर्ट के जस्टिस भूषण धर्माधिकारी और जस्टिस मुरलीधर गिरटकर ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया.

चुनाव आयोग की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार की ओर से पिछले डेढ़ वर्ष से यह खेल चल रहा है. आयोग ने अपनी याचिका में कहा कि जिप का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अधिकतम और कानूनन 6 माह के भीतर नये चुनाव निपटा लिए जाने चाहिए, लेकिन सरकार की ओर से कुछ न कुछ इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं कि चुनाव को अकारण टालना पड़ रहा है.

हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, नगर विकास सचिव और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को नोटिस भेजकर कर 9 सितंबर तक जवाब देने को कहा है.

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आयोग की ओर से बताया गया कि जब-जब जिप चुनाव घोषणा की तैयारी की जाती है, सरकार कोई न कोई संवैधानिक अड़चन निर्माण करती है. निर्वाचन क्षेत्रों की पुनर्रचना और आरक्षण निर्धारण के तुरंत बाद सरकार ने वानाडोंगरी ग्राम पंचायत को नगर परिषद बनाने का फैसला ले लिया.

इससे आयोग को अचानक ही चुनाव कार्यक्रम रद्द करना पड़ा. उसके कुछ दिनों बाद आयोग ने राज्य सरकार को फिर से सूचना दी कि वह जिला परिषद चुनाव की घोषणा करने जा रहा है और अब उसने ग्राम पंचायत के संदर्भ में कोई भी फैसला लेने से बचना चाहिए.

उसके बाद भी सरकार ने बूटीबोरी ग्राम पंचायत को नगर परिषद बनाने का फैसला कर डाला. जिससे एक बार फिर से आयोग को अपना कार्यक्रम वापस लेना पड़ा. आयोग ने कहा कि किसी स्वायत्त संस्था का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 6 माह के भीतर चुनाव कराना ही पड़ता है.

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