Published On : Thu, Dec 7th, 2017

शिक्षा मंत्रालय की विफलता को दर्शाता है शिक्षामंत्री का निर्णय

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Vinod Tawde
नागपुर: राज्य के शिक्षामंत्री विनोद तावड़े ने राज्य की 0 से लेकर 10 तक की छात्र संख्यावाली 1300 सरकारी स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया है. इन स्कूलों के विद्यार्थियों का समायोजन दूसरी पास की स्कूलों में किया जाएगा, जबकि शिक्षकों का भी समायोजन करने की बात सरकार की ओर से की जा रही है. इस निर्णय का विपक्षी पार्टियों के साथ राज्य के शिक्षक भी विरोध कर रहे हैं. इस बारे में सरकार का कहना है कि किसी भी विद्यार्थी का इस समायोजन से नुकसान नहीं होगा. लेकिन सरकार की यह विफलता ही है कि राज्य की 1300 स्कूलों का दर्जा सुधारने के बजाय इन्हें बंद करने के लिए सरकार ने जीआर निकाला है.

इस समायोजन से विद्यार्थियों का तो नुक्सान होगा ही साथ ही इसके कई शिक्षक भी बेरोजगार होंगे. इसमें सबसे बड़ी मुश्किल उनकी होगी जो डीएड, बीएड करनेवाले विद्यार्थी हैं और जो 2011 से शिक्षकभर्ती की प्रतीक्षा में हैं. उनका भी इसमें नुक्सान ही होगा. क्योंकि इन स्कूलों को बंद करने के बाद इन स्कूलों के शिक्षकों का सबसे पहले समायोजन होगा. ऐसी में शिक्षक भर्ती की उम्मीद ही नहीं की जा सकती. याद रहे कि करीब 2010 के बाद से शिक्षक भर्ती भी बंद है.

इस बारे में प्राचार्य और शिक्षक संजय पाटिल ने इस निर्णय के विरोध में कहा कि शिक्षामंत्री का यह निर्णय सरकार की हार है. सरकार को इन स्कूलों का दर्जा बढ़ाने और सुधारने के बारे में प्रयास करना चाहिए था. लेकिन इसे बंद करने का निर्णय मूर्खता है. शिक्षकों का समायोजन करने की बात की जा रही है. लेकिन जिन स्कूलों में समायोजन किया जाएगा. उन स्कूलों में भी जगह तो रहनी चाहिए. जिन शिक्षकों को दूर की स्कूलों में भेजा जाएगा. वे स्कूल लेट पहुंचेंगे. जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा पर भी असर होगा. इस निर्णय से विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी परेशानी होगी. पाटिल ने इस दौरान यह भी बताया कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा अब तक करीब 576 जीआर निकाले गए हैं. जो शिक्षामंत्री की निष्क्रियता को दर्शाता है. इस निर्णय के बाद नई शिक्षक भर्तियों की राह देखनेवाले लोगों का भी शत-प्रतिशत नुकसान ही होगा.

शिक्षक कपिल उमाले ने इस बारे में कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से गलत है. सरकार की ओर से धीरे धीरे सरकारी स्कूल और छोटी स्कूलों को बंद करने की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं. सरकार द्वारा कॉर्पोरेट लोगों को स्कूलों पर अधिकार देने पर भी विचार चल रहा है. शिक्षा का बाजारीकरण हो रहा है. उन्होंने कहा कि इस निर्णय से शिक्षकों, विद्यार्थियों और नई पद भर्तियों की रहा देख रहे शिक्षकों का भी नुकसान होगा. उमाले ने कहा कि ग्रामीण भाग में इसका सबसे ज्यादा नुकसान होगा. क्योंकि अगर समायोजन पास की स्कूलों में होता है तो ठीक है नहीं तो वे विद्यार्थी समायोजन करने के बजाय सीधे पढ़ाई ही छोड़ देंगे.

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