Published On : Tue, Jan 2nd, 2018

छात्रों की घटती संख्या ने बढ़ाई चिंता, ऑटो रिक्शा का किराया पालक नहीं शिक्षक देने पर मजबूर

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नागपुर: पहले सरकारी स्कूलों में पढ़नेवाले विद्यार्थियों की संख्या काफी ज्यादा थी. क्योंकि पहले दूसरी निजी स्कूलों की संख्या कम हुआ करती थीं. लेकिन कुछ वर्षों में निजी और इंग्लिश मीडियम स्कूलों की बाढ़ सी आ गई. शहर के हर एक परिसर में 4 से 5 निजी स्कूल शुरू हैं. जिसके कारण सामान्य परिवार के लोग भी अपने बच्चों को इन निजी स्कूलों में ही पढ़ाना पसंद करते हैं और इस वजह से मनपा की इन स्कूलों में कोई अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने भेजना नहीं चाहता.

नागपुर महानगर पालिका की काटोल रोड स्थित बोरगांव हिंदी उच्च प्राथमिक शाला में विद्यार्थियों की भारी कमी है. पहली से लेकर सातवीं कक्षा तक की इस स्कूल में केवल 65 विद्यार्थी ही पढ़ते हैं. वहीं पढ़ानेवाले शिक्षकों की संख्या 6 है. यही वजह है कि विद्यार्थियों की घटती संख्या को बनाए रखने के लिए शिक्षक कई उपाय करने के लिए मजबूर हो रहे हैं. जिसमें विद्यार्थियों के ऑटो रिक्शा की फीस पालक नहीं बल्कि स्कूल टीचरों को मिलकर भुगतान करना पड़ता है। स्कूल में गोरेवाड़ा से लेकर पिटेसुर तक के बच्चे पढ़ने आते हैं. 6 से 7 किलोमीटर से बच्चे यहां पढ़ने आते हैं. ख़ास बात यह है कि इतनी दूर से आनेवाले बच्चों के लिए ऑटो लगाए गए हैं. जिसका भुगतान नागपुर महानगर पालिका नहीं बल्कि यहां कार्यरत शिक्षक ही करते हैं. यह केवल इसलिए की दूर होने की वजह से बच्चों के माता पिता अपने बच्चों को यहां पढ़ाने भेजें. पहली से दूसरी तक की कक्षा के बच्चों के लिए यहां ऑटो की व्यवस्था की जाती है. इसके लिए करीब 5 हजार रुपए का खर्च आता है. जो शिक्षक ही देते हैं.

स्कूल के अन्य पद
स्कूल में 6 शिक्षक है. इस स्कूल में 30 जून तक एक चपरासी था. लेकिन उसके रिटायर हो जाने के बाद इस स्कूल में अब तक कोई भी चपरासी नहीं भेजा गया. स्कूल की ओर से मनपा के वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार चपरासी भेजने के लिए निवेदन भेजा गया. लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिसाद नहीं दिया गया. जिसके कारण चपरासी का काम भी शिक्षकों को ही करना पड़ता है. यहां मनपा की ओर से कोई भी सफाईकर्मी नहीं है. एक महिला को सफाई के काम के लिए लगाया गया है. उसका भुगतान भी स्कूल के शिक्षकों को ही करना पड़ता है. इस महिला सफाईकर्मी को प्रति माह 3 हजार रुपए वेतन दिया जाता है. पहले मनपा की ओर से सफाईकर्मी के लिए मानधन दिया जाता था. लेकिन अब वो भी बंद कर दिया गया है.


शिक्षकों को प्रशासन देता है अतिरिक्त काम
सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अतिरिक्त काम न दिया जाए. इसके लिए शिक्षकों की ओर से कईयों बार प्रदर्शन किया जाता है. लेकिन राज्य सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगती. इन शिक्षकों को अतिरिक्त काम देने की वजह से स्कूल के विद्यार्थियों का ही नुकसान होता है. स्कूल के इंचार्ज वैकुण्ठ प्रभाकर बरडे बताते हैं कि विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से घर घर जाकर बच्चों के अभिभावकों को समझाते हैं. इस महीने से लोगों के घर जाया जाएगा. उन्होंने बताया कि शिक्षकों को महीने में करीब 15 दिन अतिरिक्त चुनाव के काम, पल्स पोलिओ का काम दिया जाता है. जबकि चुनाव विभाग के पास अपने कर्मचारी और अधिकारी होते हैं. लेकिन वह भी काम इन्हें ही करने पड़ते हैं. उन्होंने बताया कि इसी स्कूल के दो शिक्षक पिछले कई महीनों से चुनाव सूची का कार्य कर रहे हैं. उनकी कमी के कारण विद्यार्थियों का ही नुक्सान होता है.

—शमानंद तायडे

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