Published On : Tue, Jul 21st, 2020

कोरोना के कारण से बीते 100 दिनों में देश के रिटेल व्यापार को 15 .5 लाख करोड़ का नुक्सान- CAIT

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नागपुर- देश में कोरोना महामारी ने पिछले 100 दिनों में भारतीय खुदरा व्यापार को लगभग 15.5 लाख करोड़ रुपये के व्यापार घाटे का सामना करना पड़ा है. जिसके परिणामस्वरूप घरेलू व्यापार में इस हद तक उथलपुथल हुई है कि लॉक डाउन खुलने के 45 दिनों के बाद भी देश भर में व्यापारी उच्चतम वित्तीय संकट, कर्मचारियों की तथा दुकानों पर ग्राहकों के बहुत कम आने से बेहद परेशान हैं जबकि दूसरी तरफ व्यापारियों को अनेक वित्तीय दायित्वों को पूरा करना है जबकि बाजार में पैसे का संकट पूरी तरह बरक़रार है. केंद्र अथवा राज्य सरकारों द्वारा व्यापारियों को कोई आर्थिक पैकेज न देने से भी व्यापारी बेहद संकट की स्थिति में हैं और इस सदी के सबसे बुरे समय से गुजर रहे हैं.

देश के घरेलू व्यापार की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करते हुए कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतियाएवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने आज यहाँ कहा कि देश में घरेलू व्यापार अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है और रिटेल व्यापार परचारों तरफ से बुरी मार पड़ रही है और यदि तुरंत इस स्तिथि को ठीक करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाये गए तो देश भर में लगभग 20%दुकानों को बंद करने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिसके कारण बड़ी संख्यां में बेरोजगारी भी बढ़ सकती है.

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भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि एक अनुमान के अनुसार देश के घरेलू व्यापार को अप्रैल में लगभग 5 लाख करोड़ का जबकि मई में लगभग साढ़े चार लाख करोड़ रुपये और जून महीने में लॉकडाउन हटने के बाद लगभग 4 लाख करोड़ था तथा जुलाई के 15 दिनों में लगभग 2.5लाख करोड़ के व्यापार का घाटा हुआ है. कोरोना को लेकर लोगों के दिलों में बड़ा डर बैठा हुआ है. जिसके कारण स्थानीय खरीददार बाज़ारों में नहींआ रहे हैं हैं जबकि ऐसे लोग जो पडोसी राज्यों या शहरों से सामान खरीदते रहे हैं वे लोग भी कोरोना से भयभीत होने तथा दूसरी ओर एक शहर सेदूसरे शहर अथवा एक राज्य से दूसरे राज्य में अंतर-राज्यीय परिवहन की उपलब्धता में अनेक परेशानियों के कारण खरीददारी करने बिलकुल भीनहीं जा रहे हैं, जिससे देश के रिटेल व्यापार की चूलें हिल गई हैं.

भरतिया और खंडेलवाल दोनों ने कहा कि इन सभी कारणों के चलते देश भर के व्यापारिक बाज़ारों में बेहद सन्नाटा है और आम तौर परव्यापारी प्रतिदिन शाम 5 बजे के आसपास अपना कारोबार बंद कर अपने घरों को चले जाते हैं. देश भर के व्यापारियों से उपलब्ध जानकारी केअनुसार कोरोना अनलॉक अवधि के बाद अब तक केवल 10% उपभोक्ता ही बाज़ारों में आ रहे हैं. जिसके कारण व्यापारियों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.

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भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि अभी तक व्यापारियों को केंद्र सरकार या राज्य सरकारों द्वारा कोई आर्थिक पैकेज पैकेज नहीं दिया गया , जिसके कारण व्यापार को पुन: जीवित करना बेहद मुश्किल काम साबित हो रहा है. ऐसे समय में जब देश भर के व्यापारियों के देख रेख बेहद जरूरी थी ऐसे में व्यापारियों को परिस्थितियों से लड़ने के लिए अकेला छोड़ दिया गया है. इस समय व्यापारियों को ऋण आसानी से मिले इसके लिए एक मजबूत वित्तीय तंत्र को तैयार करना बेहद जरूरी है.

व्यापारियों को करों के भुगतान में छूट और बैंक ऋण, ईएमआई आदि के भुगतान के लिए एक विशेष अवधि दिया जाना और उस अवधि पर बिना कोई ब्याज अथवा पेनल्टी लगाए देने की जरूरत है जिससे बाजार में आर्थिक तरलता का प्रवाह हो .

इस संबंध में सबसे बुरी बात यह है की दिसंबर से मार्च के महीने में आपूर्ति की जानेवाली वस्तुओ जिनका पेमेंट भुगतान पारस्पारिक रूप से सहमत क्रेडिट कार्ड अवधि के अनुसार मार्च महीने में हो जाना चाहिए था, वो अभी तक नहीं हुआ है और उम्मीद यह की जाती है की आगामी सितम्बर माह में इसकी अदायगी होने की संभावना है,वही बैंकों से आसान शर्तो एवं कम दर के साथ व्यापारों को सहायता देने की जरुरत है. ऐसी स्थिति में अर्थशास्त्र का सिद्धांत कहता है की जब इनपुट कम होता है और आउटपुट अधिक होता है, तब व्यापार टेवर गति से नीचे जाता है और लोग अपनी पूंजी खाना शुरू कर देते है की कोई अच्छा संकेत नहीं है. इस दृष्टि से सरकारों द्वारा व्यापारियों के मुद्दे सुलझाना बहोत आवश्यक है.

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