
नागपुर जिले में दो दर्जन से अधिक रेती की घाट है.इनमे से ७५% रेती की घाटों की जिला प्रशासन द्वारा नीलामी होती है.इसके लिए कठोर नियमावली भी है लेकिन उसका सरासर उल्लंघन हो रहा,यह किसी से छिपा नहीं है.वैसे रेती उत्खनन के लिए समय तय है,सूरज उगने से लेकर सूरज डूबने तक,निविदा शर्तो के हिसाब से उत्खनन का क्षेत्र ( लंबाई,चौड़ाई,गहराई) तय होता है,घाट लेने वालों को आवाजाही मार्ग की सड़क हमेशा ठीक रखने की भी शर्ते होती है,रेती परिवहन करते वक़्त रेती भरे वाहन पर पानी का छिड़काव सह ढक कर परिवहन का कठोर नियम है.उक्त सभी नियमो को तिलांजलि दिलवाने में जिलाधिकारी कार्यालय,माइनिंग विभाग,उपविभागीय कार्यालय( एसडीओ ),तहसीलदार,पटवारी सह सम्बंधित थाना प्रशासन का योगदान उल्लेखनीय है.
रेती के व्यवसाय में उतरने वालों को सबसे पहले उक्त विभाग के सम्बंधित अधिकारियों से हाथ मिलाना पड़ता है,फिर इस व्यवसाय का श्रीगणेश करना पड़ता है.इस व्यवसाय में वर्षो से कुछ व्यापारी और सफेदपोश सह उनके परिजनो का दबदबा है.बावजूद इसके अन्य भी बड़ी मात्रा में इस व्यवसाय में कूद भलीभांति फलफूल रहे है.इससे प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई,इस प्रतिस्पर्धा में कई आपराधिक गतिविधियां भी चरम पर पहुँच चुकी है.इससे निपटने की क्षमता सत्तापक्ष के सफेदपोश व्यवसाइयों में है लेकिन इसके छींटे से डर लग रहा है.
इसका निराकरण करने हेतु सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर रेती घाटों पर “ड्रोन” की नज़र से निगरानी की जाएँगी और अपने करीबियों को छोड़ प्रतिस्पर्धी व्यवसाइयों पर कहर ढहाये जाने की योजना पर सत्तापक्ष सह जिला प्रशासन लीन है.
उल्लेखनीय यह है कि रेती घाटों से माफिया राज समाप्त करना किसी के बस की बात नहीं है,जब तक कि सफेदपोश इस व्यवसाय से दूर नहीं होते।हल ही में एक रेत माफिया पर मकोका के तहत कार्रवाई की गई,दरअसल उसका अघोषित लेकिन सर्वत्र चर्चित था कि उसका पार्टनर एक मंत्री का सगा भाई है.फिर कैसे मुमकिन हो की “ड्रोन” से रेती घाटों से सम्बंधित अवैध कृत थमेंगे।
वर्षा ऋतू पूर्व करते है स्टॉक
बरसात में रेती की मांग चरम पर तो होती ही है,इस दौरान इसके भाव भी आसमान को छू रहे होते है.ऐसे मौके का लाभ उठाने के लिए रेती के व्यवसायी रेती का गैरकानूनी रूप से जिले में जगह जगह रेती का स्टॉक करते है,वह भी खेती की जमीन पर.लेकिन जिला प्रशासन नियमानुसार क़ानूनी कार्रवाई की बजाय मामूली प्रकरण दर्ज कर शह देती रही है.
निसर्ग को धोखा
रेती उत्खनन के लिए जो कानून बना है,उससे निसर्ग संतुलन रहेगा।लेकिन वर्त्तमान में की जा रही रेती उत्खनन से पर्यावरण,जल स्त्रोत आदि प्रदूषित/बाधित हो रहे है.इस अवैधकृत का परिणाम आज नहीं बल्कि वर्षो बाद दीखता है,इसलिए जिला प्रशासन के सम्बंधित अधिकारी इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दे रहे है.
– राजीव रंजन कुशवाहा
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