Published On : Mon, Aug 30th, 2021
By Nagpur Today Nagpur News

ऊर्जा मंत्रालय की निष्क्रियता से विद्युत कालोनी का विकास ठन्डे बस्ते में

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– जहरीले प्राणियों से जान माल का खतरा

नागपुर – ऊर्जा मंत्रालय की निष्क्रियता के चलते कोराडी पावर प्लांट का विधुत विहार आवास कालोनी का विकास ठन्डे बस्ते में पडा हुआ है। यहाँ विधुत परियोजना के स्थापत्य सुव्यवस्था विभाग की माने तो इंजिनियर और सिविल तकनीशयन विधुत विहार कालोनी परिसर के विकास के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।

परंतु आवश्यक निधी के अभाव में अधिकारी अभियंता कुछ भी नही कर सकते है।महानिर्मिती परियोजना के वरिष्ठ अधिकारियों की माने तो विधुत केंद्र परिसर तथा कालोनी परिसर का सर्वांगीण विकास के लिए तकरीबन सालाना ३ से साढ़े ३ करोड रुपये निधी की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विधुत स्थापत्य विशेषज्ञों की माने तो विगत सन 1967-68 मे परियोजना निर्माण के लिए कोराडी-महादुला सहित अन्य गावों की कृषि भूमि तथा ग्राम निवासी भूमि अधिग्रहण की गई थी।और सन 1973-74 मे बिजली उत्पादन केंद्र का निर्माण पूर्ण कर लिया गया था। 1100 मेगावाट क्षमता के बिजली उत्पादन का कार्य 1974-75 मे शुरु किया जा चुका था।विधुत आवास कालोनी का निर्माण विगत 1971 से 1974 के अंतराल में पूर्ण कर लिया गया।

पुराने 1100 मेगावाट क्षमता के परियोजना का निर्माण का भौगोलिक क्षेत्र 318 हेक्टेयर मे तथा विधुत आवास कालोनी का भौगोलिक क्षेत्र 189 हेक्टेयर है।इस बिजली केंद्र में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या तकरीबन 3000 है।गौरतलब है कि पुराने 120 मेगावाट क्षमता के 4 विधुत संयत्र विगत 2011 मे बन्द कर दिया गया है। नये 660 मेगावाट क्षमता के 3 संयत्र गत 2018-2019 से बिजली उत्पादन शुरु है।नई विधुत परियोजना का भौगोलिक क्षेत्र 172 हेक्टेयर आंका गया है।

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पुराने पावर प्लांट तथा कालोनी का वार्षिक विकास वजट 2 करोड़ 27 लाख रुपया है।जो कि ऊंट के मुंह में जीरा के समान माना जा रहा है। विधुत आवास कालोनी की पुरानी इमारतों की समयावधि 40 से 45 साल का अरसा बीत चुका है।नतीजतन इमारतें काफी पुरानी होने के कारण भंगार(स्क्रैप)अवस्था में पंहुच चुकी है। नये 660× 3 परियोजना के कर्मचारियों के लिए अभि तक नई आवास कालोनी का निर्माण ठन्डे बस्ते में पडा हुआ है।

कर्मियों के जान माल को खतरा
कालोनी की इमारतों के इर्द-गिर्द कांटेदार लावारिश पेड पौधे झाड तथा घास अधिक मात्रा में ऊग आयी है।नतीजतन बरसांत वहाँ मे गंदा पानी और जहरीले जीव-जन्तुओं का बसेरा है।जिसमे जहरीले सांपों कोबरा डोमिया नाग,नागिन,अजगर धामन, खतरनाक जंगली जानवरों ने आश्रय ले लिया है।सुंअर नेवला,मुर्दासिंग(कबरबिज्जू),गोह (घोरपड)गोंहटा सांप,सुआ सर्प यानी उड़ने वाला जहरीले,धब्बेदार जहरीले सांप के झुंड,मूछवाले सांप, सियार, लोमडी, गीदड,काले व भूरे खरगोश,कलमुंहा बन्दर,मर्कट,कर्कट,जहरीले चूहे घूस,बाज,कनखुजरा, चमगादड,उल्लूक,जहरीली छपकिल्लियां,काकरोच, विषधर, गिरगिट,ऊदविलाव, महूका,चील,उल्लू,जंगली सुंअर,चीतल,दो मुहबाला सांप,जहरीली-विषाक्त भौंवरे,दुर्गाची लाल,काली पीली चीटियां,मधुमक्खियां बिच्छु, जंगली बिल्लियाँ,डांस,पिस्सू डेंगू मच्छर जहरीले दीमक आदि अन्य सैकडों किस्म के जहरीले कीडे पतंगे जीव जन्तुओं का समावेश है।जो कि पूरा परिसर लावारिश और आवारा जंगल मे परिवर्तित हो गया है।

इसका मुख्य कारण विकास निधि का अभाव मे विधुत विहार कालोनी की इमारतों के अलावा सडकों की हालत दयनीय स्थिति में है।स्थिति को देखते हुए कालोनी की पुरानी इमारतों का नूतनीकरण के लिए करीबन 80 से 90 करोड़ रुपए की निधी की आवश्यकता महसूस की जा रही।जिसके लिए पुरानी इमारतों का प्लास्टर को निकालकर नये शिरे से सीमेंट प्लास्टर तथा पीसीबी कांक्रीट और फाईल्स का अमलीजामा पहनाया जा सकता है।परंतु ऊर्जा मंत्रालय की निष्क्रियता आड़े आने की वजह से विधुत विहार परिसर का नूतनीकरण एवं विकास कार्य ठन्डे बस्ते में पडा हुआ है।

तत्संबंध मे आल इंडिया सोशल आर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार टेकचंद सनोडिया ने अनाडी सरकार के मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे,उपमुख्य मंत्री अजीतदादा पवार से आशा और अपेक्षा व्यक्त की है कि विधुत विहार कालोनी का नूतनीकरण तथा उसका सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक निधी उपलब्ध करवाई जाए।अन्यथा यहाँ रह रहे विधुत कर्मियों के सदस्यों को किसी भी प्रकार की प्राणहीन और वित्त हानी हूई तो उसके जिम्मेदार व जानदार अघारी का मंत्रीमंडल होगा।क्योंकि महानिर्मिती पावर प्लांट तथा विधुत विहार आवास कालोनी के मामले मे अजीतदादा अतिशय अनुभव कुशल और विशेषज्ञों मे से एक है।

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