Published On : Mon, May 18th, 2015

देसाईगंज : न.प. सड़क डिवाइडर भ्रष्टाचार प्रकरण

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पालकमंत्री से मिलने के लिए सर्कस

 
सवांददाता / जीतू परसवानी

देसाईगंज (गड़चिरोली)। यहां के सड़क डिवाइडर निर्माणकार्य में अधिक प्रमाण में भ्रष्टाचार होने की लिखित शिकायत यशवंत नाकतोड़े ने जिलाधिकारी की ओर करते ही जिलाधिकारी ने तुरंत जांच समिति गठित की और उक्त प्रकरण में जांच के आदेश दिए थे. जांच में अनेक त्रुटियां पाई गई. इस्तेमाल की गई इलेक्ट्रानिक्स सामग्री भी घटिया थी. गुणवत्ता परिक्षण के लिए संबंंधित सामग्री पुणे के परिक्षण केंद्र में भेजने पर प्रकरण का निपटारा करने के लिए पालकमंत्री से मिलने के लिए सर्कस शुरू है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार देसाईगंज न.प. अंतर्गत ब्रम्हपुरी और लाखांदुर मार्ग पर डिवाइडर निर्माण करके सड़क के बीच में विद्युतीकरण के कार्य के लिए 11 मार्च 2015 निविदा निकाली गई. इसका करैत   नागपुर के ठेकेदार को दिया गया. करार के अनुसार विद्युत खंबे खड़े करने के लिए न.प. से कोई भी अग्रिम रकम नही दी जायेगी ऐसा स्पष्ट करने के बावजूद भी न.प. से उक्त ठेकेदार को 64 लाख 72 हजार की रकम दी गई.

उक्त प्रकरण में नियम और शर्त को भंग करने का ध्यान में आते ही यशवंत नाकतोड़े ने संबंधित भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए जिलाधिकारी की ओर लिखीत शिकायत की. जिलाधिकारी ने गंभीर प्रकरण की तुरंत त्रिसदस्यीय जांच समिति गठित करके जांच की. जांच में अनेक त्रुटियां पाई गयी. दी गई रकम में भ्रष्टाचार और इस्तेमाल की गई सामग्री निम्म दर्जे की निर्देशन में आई. उक्त सामग्री पुणे की प्रयोगशाला में भेजी गई. ये बात पता चलने पर मुख्याधिकारी और न.प. अध्यक्ष ने उक्त प्रकरण में ठेकेदार को बचाने के लिए हलचल शुरू कर दी. पालकमंत्री की ओर संपर्क करके उक्त प्रकरण ख़त्म तो नही करेंगे ऐसा संदेह शिकायतकर्ता यशवंत नाकतोड़े ने उपस्थित किया है.

देखा जाय तो उक्त कार्य के करार अनुसार नियम और शर्त की पूर्तता करने के लिए और निर्माण की अनुमती देने से पहले सड़क के दोनों किनारों पर लगा अतिक्रमण हटाना जरुरी था. रास्ते को लगकर पेड़ काटने के लिए वनविभाग से नाहरकत प्रमाणपत्र, रास्ता महामार्ग के लिए हस्तांतरित किये गए संबंधित विभाग का नाहरकत प्रमाणपत्र, करार नुसार गुणवत्तापूर्वक साहित्यों का इस्तेमाल करना आवश्यक था. लेकिन उक्त ठेकेदार ने कोई भी शर्त की पूर्तता नही की. फिर भी नगर परिषद मुख्याधिकारी तथा अध्यक्ष पदाधिकारियों ने ठेकदार से मिलकर व्यवहार करने की बात उजागर हुई. जिससे जांच समिति की रिपोर्ट से जिलाधिकारी क्या कार्रवाई करते है इसकी ओर नागरिकों का ध्यान लगा है. विगत 5 वर्षों से एक ही ठेकेदार की निविदा मंजूर की गई. ये संयोग है? या इसमें भी कोई बात है? इसकी भी जांच करे ऐसी भी मांग है.

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एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर जायेगे – यशवंत नाकतोड़े
देसाईगंज न.प. द्वारा ठेकेदार को 64 लाख 72 हजार अग्रिम राशि दी गई. उक्त प्रकरण में सार्वजनिक बांधकाम विभाग का नाहरकत प्रमाणपत्र नही मिला, वडसा ब्रम्हपुरी मार्ग और वडसा-लाखांदुर मार्ग पर डिवाइडर का निर्माण किया ही नही, तो इलेक्ट्रिक खंबे खडे करने के लिए देयक देने की बात सीधी भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है. साथ ही नगरसेवक निधि से विविध 5 कामों के लिए अलग-अलग तांत्रिक मंजूरी लेकर सभी कामों की एक निविदा निकाली गई. नियमानुसार 25 लाख तक की तांत्रिक मंजूरी जिलाधिकारी, 50 लाख तक तांत्रिक मंजूरी आयुक्त नागपुर, तथा 50 लाख के ऊपर काम की तांत्रिक मंजूरी मंत्रालय से दी जाती है. लेकिन पुरे कार्य को मिलाया जाए तो 2 करोड़ के ऊपर रकम की निविदा हो रही है. उक्त काम का अंदाजपत्रक तैयार करके मंजूरी देनी जाहिए थी. लेकिन वो भी नही लेने का आरोप यशवंत नाकतोड़े ने किया है. जिससे उन्होंने एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर जाने की बात कही है.

Representational pic

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