Published On : Thu, Nov 6th, 2014

सारखणी : डेंगू सदृश बुखार का दहेली में आतंक!


हर घर में मरीज़, 1 बालिका की मौत, आरोग्य केंद्र बीमार!  

सारखणी (नांदेड़)। किनवट तालुक के मौजा दहेली में पिछले कई दिनों से डेंगू सदृश बुखार का आतंक मचा हुआ है. 5 नवंबर को गांव की एक बालिका सुनीता भुजंग उर्ववते (12) की मौत हो गयी. इस घटना के बाद ग्रामीण आरोग्य विभाग व ग्राम पंचायत लचर कार्यप्रणाली से बीमार चल रहे हैं.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, किनवट के अंतर्गत प्राथमिक आरोग्य केन्द्र, दहेली (तांडा) गांव डेंगू सदृश बुखार के संक्रमण में है. इस केंद्र का कारोबार पूर्णतः अस्तव्यस्त है. आरोग्य केंद्र के अनेक कर्मचारी अप-डाउन करने में ही वक़्त जाया कर रहे हैं. यूँ कहा जा सकता है कि समूचा केंद्र ही बीमार होने से उसे सलाइन लगाई गई है. पूरे परिसर का हर घर में मरीज दिख रहे हैं. ग्रामीणों की व्यथा है कि आरोग्य केंद्र के स्वास्थ्य कर्मचारी मरीज़ों की सुध नहीं ले रहे हैं, जिससे स्थिति भयावह हो रही है. मौजा दहेली निवासी नियती प्रमोद काले (5) भी बुखार से पीड़ित था, घर की माली हालात ठीक होने से उसे उपचार के लिए नागपुर ले जाया गया जिससे उनकी जान बच गई, लेकिन वहीं एक बालिका सुनीता उर्ववते गरीब होने से उसका उपचार क्षेत्रीय अस्पताल में ठीक से नहीं कर घर भेज दिया गया, फलतः उसकी मृत्यु हो गई. सुनीता को पहले दहेली के प्राथमिक आरोग्य केंद्र में तथा बाद में माहुर स्थित अस्पताल में दाखिल किया गया. उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया. 5 नवंबर को सुबह 9 बजे उसकी मौत हो गई.

बताया जा रहा है कि दहेली (तांडा) आरोग्य केंद्र में संक्रामक बीमारियों की उपाय योजना नहीं है. दूसरी और ग्रामसेवक की अनदेखी से गांव में गंदगी का साम्राज्य है. इस डेंगू सदृश बुखार से निजात पाने के लिए आरोग्य विभाग ने एक पथक बनाकर घर-घर मरीज़ों की पड़ताल करे, ऐसी पुरजोर मांग भयभीत ग्रामीण कर रहे हैं ताकि शेष पीड़ितों को मौत के मुँह में जाने से बचाया जा सके. वहीं क्षेत्र में व्याप्त गंदगी की सफाई भी करने की मांग की जा रही है. सवाल यह है कि उच्चाधिकारी इसकी टोह शीघ्र लेंगे अथवा और लोगों को मौत के मुँह में जाने की प्रतीक्षा करेंगे?

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