Published On : Fri, Dec 29th, 2017

मोपलवार की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

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मुंबई: महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) के प्रबंध निदेशक राधेश्याम मोपलवार की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग पुणे के एक एनजीओ सजग नागरिक मंच ने की है। मंच की तरफ से मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की गई है कि मोपलवार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को जिस रिपोर्ट के अधार पर क्लीनचिट दी गई है उस जांच रिपोर्ट को महाराष्ट्र सरकार अपनी अधिकृत वेबसाइट पर सार्वजनिक करे। मंच के सदस्य विवेक वेलणकर और विश्वास सहस्त्रबुद्धे ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि सूचना के कानून के तहत इस जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करना सरकार के लिए अनिवार्य है।

बता दें कि महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अफसर राधेश्याम मोपलवार पर विधानसभा के मॉनसून सत्र में विपक्ष की तरफ से मुंबई-नागपुर समृद्धि महामार्ग में कथित रूप से भ्रष्टाचार किए जाने का आरोप लगाया गया था। विपक्ष ने यह आरोप तब लगाए थे जब उसके हाथ एक ऑडियो टेप लगा था, जिसमें मोपलवार कथित तौर पर रिश्वत के लेन-देन की बातचीत करते हुए सुनाई दे रहे थे। विपक्ष के इन आरोपों के बाद मुख्यमंत्री को सदन में इस मामले की जांच कराने और जांच पूरी होने तक मोपलवार को न सिर्फ पद से हटाने बल्कि जबरन छुट्टी पर भेजने की घोषणा करनी पड़ी थी।

इसके बाद सरकार ने वरिष्ठ नौकरशाह जॉनी जोसेफ की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाई थी, जिसमें दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी शामिल किया गया था। इस जांच समिति में पांच महीने में जांच पूरी कर मोपलवार को क्लिनचिट दे दी और जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने मोपलवार को वापस उनके पद पर बहाल कर दिया। हालांकि सरकार ने यह नहीं बताया है कि जांच समिति ने जांच के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई, किस किस के लिए बयान लिए और किस आधार पर मोपलवार को क्लिनचिट दी। इसी बात को लेकर सुजग नागरिक मंच ने पूरी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग मुख्यमंत्री से की है।

जांच का ढोंग रचा गया: विखेपाटील

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राधेश्याम मोपालवर की बहाली को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर हमला करते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी और विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखेपाटील ने कहा कि मोपालवर के खिलाफ आरोपों की जांच का ढोंग रचा गया है। पहले दिन से ही सरकार की मंशा मोपालवर को क्लिन चिट देने की थी। विपक्ष न्यायिक जांच की मांग कर रहा था जबकि सरकार ने सेवानिवृत मुख्य सचिव से जांच कराई। उन्होंने कहा कि जिस तेजी से मोपालवर को क्लिन चिट दी गई और उन्हें महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) के प्रबंध निदेशक के रूप में बहाल किया गया वह दिखाता है कि सरकार मुंबई और नागपुर को जोड़ने वाली समृद्धि महामार्ग परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों को मिटाना चाहती है। विखेपाटील ने आरोप लगाया है कि मोपालवर की जांच पांच महीने में पूरी हो गई, जबकि पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे के खिलाफ जांच के संबंध में अभी तक फैसला नहीं लिया गया। यह दिखाता है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सुविधा के अनुसार कदम उठाती है।

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