Published On : Sun, Oct 11th, 2020

कृषि फसलों की तबाही रोकने लिये नदियों की खुदाई करवाने की मांग

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– शोसल आर्गेनाइजेशन ने सरकार को ज्ञापन सौंपा

नागपुर: वारिश मे नदियों का कटाव और कृषि फसलों की तबाही को नही रोका गया तो देश की निर्दोष सामान्य जनता जनार्दन के समक्ष खाधान्न की तंगी आएगी ही। आल इंडिया शोसल आर्गेनाइजेशन ने राज्य व केन्द्र सरकार से मांग की है कि वारिश के पूर्व नदी नालों की अत्याधिक खुदाई पर शासन ने अधिक जोर देना चाहिए। आर्गेनाइजेशन के संयोजक एवं वरिष्ठ समाजसेवी पत्रकार टेकचंद सनोडिया ने कहा कि नदियों के भीतर अधिक मात्रा मे रेती मुरुम व मलवां भर जाने की वजह से वारिश मे जल का ऊफान की वजह से तमाम कृषि फसलें बरबाद हो रही है।नदी नालों के दोनो किनारों मे भारी कटाव हो रहा है तथा नदियों मे बाढ की वजह से कृषि फसलें की बरबाद हो रही है। इसे रोकने के नदियों की गहराई जरूरी है।

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शासन को करोड़ों का राजस्व मिलेगा
नदियों की खुदाई करवाने से सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। वैसे भी आये दिन नदियों से चोरी छिपे रेती और मुरुम की चोरियां हो रही है और राजस्व चोरी की वजह से शासन को करोड़ों रुपये की चंपत लग रही है। वर्तमान परिवेश में भवन निर्माता बिल्डरों तथा जन सामान्य जनता को अपना मकान बनाने के लिए रेती व मुरुम की आवश्यकता पडती ही है।इसलिए शासन ने वारिश के पूर्व नदी नालों की खुदाई का कार्य अपने हाथों में लेना चाहिए।

उन्होने आगे बताया कि देश में इस साल कभी सूखे तो कभी बाढ़ ने किसानों को बहुत ही परेशान किया तो अब देश के कई इलाकों में हो रही लगातार भारी बारिश ने किसानों की चिंताओं को काफी बढ़ा दिया है. खेतों में ज्यादा पानी भरने से किसानों को खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान, मक्का और दूसरे फसल खराब होने की चिंता हो रही है. आपको बता दें कि बीते कुछ दिनों से बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों समेत देश के विभिन्न हिस्सों में मूसलधार बारिश हो रही है. इससे गंगा, कोसी सहित कई नदियां उफान पर हैं. किसानों और कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि भारी बारिश से रबी की बुवाई में देरी होगी.

बीते कुछ दिनों से विदर्भ महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ व मध्यप्रदेश सहित भारत के अन्य राज्यों में हुई भारी बारिश और बाढ़ से सोयाबीन और उड़द समेत दूसरी फसलों को भारी नुकसान हुआ. अब बारिश और बाढ़ बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में कहर बरपा रही है. इन इलाको में धान की पकी हुई फसल खराब होने की आशंका बनी हुई है, क्योंकि नदियों मे बाढ की वजह से खेतों में काफी पानी जमा हो चुका है.

इसलिए शासन विशेषकर शासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकार मे बैठे काबीना मंत्रियों तथा जनप्रतिनिधियों का इस ओर ध्यानाकर्षित करना चाहिए।

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