Published On : Tue, Jul 19th, 2016

क्या गुजरात में BJP को भारी पड़ेगी दलितों की नाराजगी?

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Dalit Protests in Gujrat
गुजरात
: क्या एक राज्य में भड़की आग से दूसरे राज्य में चुनाव पर असर पड़ सकता है। क्या गुजरात में दलितों की नाराजगी की कीमत बीजेपी को यूपी चुनाव में भरनी पड़ सकती है? ये सवाल इसलिए क्योंकि पिछले 24 घंटों के भीतर गुजरात के 6 जिले गोरक्षा के नाम पर दलितों की पिटाई के बाद उठे अंधड़ की गिरफ्त में आ चुके हैं। अब तक 12 दलित खुदकुशी की कोशिश कर चुके हैं, जिसमें से एक की मौत हो गई है।

अपमान और इल्जाम की आग से नाराज दलित शांत होने को तैयार नहीं हैं, उधर दलितों के खैरख्वाह भी सियासी मैदान में कूद पड़े हैं। मायावती ने इस मुद्दे को संसद में उठा कर ये साफ कर दिया कि यूपी चुनाव में वो दलित वोट बैंक को यही आग दिखाकर बीजेपी के खिलाफ भड़काने वाली हैं। बुधवार को दलितों ने गुजरात बंद का ऐलान किया है, जिसे कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने समर्थन दिया है। साफ है कि दलितों की पिटाई की इस आग में बीजेपी घिरती जा रही है।

अमरेली में हिंसक प्रदर्शन के बीच एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई। भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। अतिरिक्त पुलिस बल मंगाया गया।

राजकोट में बीआरटीएस ट्रैक में तोड़फोड़ की गई तो वहीं गोंडल और धोराजी में भी सरकारी बसों को आग के हवाले कर दिया गया। राजकोट के एसपी अंत्रिप सूद ने कहा कि दलितों ने उना में घटना के विरोध में चक्काजाम किया था, अभी हम दलितों के साथ मिलकर पूरे राजकोट और गुजरात मे शांति का संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं। लोगों से शांति बनाये रखने की अपील कर रहे हैं।

प्रदर्शकारियों का कहना है कि नरेंद्र मोदी बाहर घूम रहे हैं लेकिन उनको पता नहीं गुजरात में दलितों की हालत क्या है। हमारे वोटे के लिए जरूरत पड़ती है। ऊना की घटना के विरोध में गोंडल और चामकंदौरड़ना गांव में कुल 7 दलित भाईयों ने जहरीली दवा खाकर आत्महत्या की कोशिश की। अगर उनको कुछ हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा। इन लोगों की मांग है कि पुलिसवालों को डिसमिस किया जाये।

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दलितों पर अत्याचार का विरोध सिर्फ सड़कों पर ही नहीं दिख रहा बल्कि अब तक करीब एक दर्जन लोग खुदकुशी की कोशिश भी कर चुके हैं। जूनागढ़ के बांटवा में जिन तीन दलित युवकों ने जहर पीकर जान देने का प्रयास किया था, उनमें से एक हेमंत सोलंकी नाम के युवक की मौत हो गई। वहीं, गोंडल में दो दलितों को जान देने की कोशिश के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। बता दें कि 11 जुलाई को शिवसेना के स्थानीय कार्यकर्ताओं पर चार दलितों की पिटाई का आरोप लगा था। आरोप था कि पीड़ित युवक मरी हुए गायों की खाल उतार रहे थे।

सरकार इस मामले में काफी सख्त रुख अपना रही है। उना मामले में अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक इस मामले में पीड़ितों को जल्द इंसाफ दिलाने के लिए सरकार हर मुमकिन कदम उठा रही है। सरकार ने दलित युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील की है। हालांकि सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों के बावजूद लोगों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है। राज्य के कई दलित संगठनों ने 20 जुलाई को गुजरात बंद का ऐलान भी किया है।

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