Published On : Tue, Nov 9th, 2021
By Nagpur Today Nagpur News

वेकोलि खदानों से रोजाना 100 टन कोयला चोरी !

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– गोंडग़ांव व इंदर ओपनकास्ट के STOCK से हो रही चोरी,कन्धों, सायकिलें व मोटरसाइकिल का किया जा रहा इस्तेमाल,आधा दर्जन अवैध टालों पर नगदी का सौदा,यहां से रोजाना 10-12 ट्रक कोयला 8000 रुपये टन बेचा जा रहा और कोयला चोरों को 2.50 रुपये किलो नगद थमाया जा रहा,आसपास के गांव के 50 से अधिक युवक सक्रिय

नागपुर – एक ओर बिजली उत्पादन के लिए कोयले की किल्लत को प्रचारित करना तो दूसरी ओर सरेआम कोयले चोरी को नजरअंदाज करना संबंधित प्रशासन की आदत सी हो गई है। महानिर्मिति को भी कोल वाशरी के मार्फत अच्छा कोयला नहीं मिल रहा और यहां से अच्छा कोयला की छंटाई कर बाजार में बेचा जा रहा,यह सभी को भलीभांति जानकारी होने के बावजूद सभी की चुप्पी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही और संबंधित मंत्री सह शीर्षस्थ अधिकारियों की कार्यशैली की पोल खोल रही।इसका भरपूर फायदा कोल माफिया उठा रहे। ऐसा ही कुछ आलम हैं वेकोलि की नागपुर क्षेत्र अंतर्गत गोंडग़ांव और इंदर ओपन कास्ट माइंस का।

आधा दर्जन से अधिक कोल माफियाओं द्वारा उक्त दोनों खदानों के निकट के गांव के दर्जनों बेरोजगार युवकों से रोजाना दिन में कम और अंधेरा होते से पूर्ण शबाब पर कोयला की चोरी करवाई जा रही। उक्त कोयला चोर उक्त खदानों के STOCK से कोयला बोरे में भरकर कन्धों पर या साईकल पर या फिर मोटरसाइकिल पर लादकर कोल माफियाओं के अवैध टाल तक कोयला लाते है,जहां उन्हें ढाई रुपये किलो के हिसाब से नगदी भुगतान किया जाता है,नगदी भुगतान से कोयला चोरों का हौसला बुलंद हो रहा,इसलिए इस अवैध धंधे में बढ़ोतरी हो रही।

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फिर उक्त सभी अवैध टालों से रोजाना 10 से 12 ट्रक( 12 या 14 छक्के वाले) से रोजाना कोयला व्यापारियों को 6000 रुपये प्रति टन बेचा जाता है,ये व्यापारी फिर 8000 से 12000 टन के मध्य अपने ग्राहकों को बेच देती है।

उक्त चोरी के कोयले का परिवहन अर्थात आवाजाही के दौरान असली कोयले की परमिट जुगाड़ कर की जाती है।

अर्थात रोजाना इन अवैध कोयला के टालों से 100 टन कोयला की अफरातफरी हो रही। इसकी जानकारी स्थानीय उपक्षेत्रीय प्रबंधक से लेकर वेकोलि मुख्यालय के अधिकारियों को होने के बावजूद उनकी चुप्पी से उक्त अवैध धंधा शबाब पर है।

उक्त चोरी पिछले कुछ सालों से काफी बढ़ गई,कोरोना काल में उफान पर थी। जो आज भी जारी है।

उक्त चोरी से वेकोलि को राजस्व नुकसान होने के साथ ही साथ महानिर्मिति को बिजली निर्माण के लिए उपयुक्त कोयला का अभाव से उनका खर्च बढ़ गया। क्योंकि वेकोलि के सीधे खदानों से कोयला ट्रक के ट्रक चोरी हो रही,कई दफ़े पकड़े गए,उनकी चोरों को वेकोलि स्थानीय प्रबंधन पाल रही।तो दूसरी ओर महानिर्मिति को कोल वाशरी से अच्छा कोयला नहीं मिल रहा,यहां कोयले की धुलाई बाद महानिर्मिति के बजाय सीधे बाजार में ग्राहकों को बेचने की आये दिन शिकायतें मिलने के बावजूद वेकोलि मुख्यालय के कानों पर जूं नहीं रेंग रहा,अर्थात कोयले की दलाली में सभी के हाथ काले होने का सबूत दे रहा।

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