- प्रहार ने पत्र-परिषद में अनियमितताओं की जानकारी दी
- मुख्यमंत्री को विज्ञप्ति भेज सघन जाँच की माँग की
- नायर सन्स की कार्यप्रणाली पर उठाये सवाल
- सीटीपीएल में निम्न दर्जे की कोयला आपूर्ति कर घोटाला किए जाने की जताई आशंका
चंद्रपुर। सीटीपीएस कोयला घोटाला सिंचाई घोटाले से भी बड़ा मामला है. इस मामले की कड़ियाँ काफी दूर तक जुड़ी हुई हैं. इसलिए इस मामले को सीबीआई को सौंपकर सघन जाँच की जाए. जिस प्रकार केन्द्र में कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले को उजागर सफलता मिली, उसी आधार पर सीटीपीएस में हुए कोयला घोटाले की भी उच्च स्तरीय जाँच की जाए. उक्ताशय के विचार प्रहार के जिलाध्यक्ष पप्पू देशमुख ने मंगलवार को आयोजित पत्र-परिषद में रख आशंका जतायी.
पत्र परिषद में उनके साथ फिरोज पठाण, घनश्याम येरगुड़े, राहुल दडमल, नजर खाँ पठाण, आशुतोष सातपुते, अरविंद गौतम, गीतेश शेंडे, गोलू तन्नीरवार मौजूद थे.
देशमुख ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि १६ दिसम्बर को चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केन्द्र में कोयला आपूर्ति करने वाले ट्रक में मिट्टी भरी मिली. सीटीपीएस के लिए लाने वाले कोयला अन्यत्र खाली कर उसमें मिट्टी भर कर भेजे जाने की बात स्पष्ट हुई. इस मामले में प्रकाश अग्रवाल सहित चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया, किंतु मुख्य सूत्रधार कोई और है. इसलिए इसकी सघन जाँच की जरूरत है. इसमें बड़े घोटालेबाजों का हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता है.
उन्होंने आगे बताया कि घुग्घुस के कोल साइडिंग से सीटीपीएस में कोयला भेजा जाता है. खराब व अच्छे किस्म के कोयले की छंटाई कर अच्छे किस्म के कोयले की सीटीपीएस को आपूर्ति किए जाने का ठेका कम्पनी को दिया गया. कम्पनी कोयले को बिना छांटे पत्थरयुक्त कोयले की आपूर्ति कर रही है, जिससे सीटीपीएस के व्रेâशर पर विपरीत परिणाम हो रहा है, वहीं उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है. इसलिए क्यों न उक्त कम्पनी का ठेका रद्द की जाए. सीटीपीएस में पिछले कई वर्षों उक्त ठेकेदार कम्पनी को ही ठेका दिए जाने से भी मामला गर्माया हुआ है. इसलिए दूसरी कम्पनी को ठेका दिया जाना चाहिए.
…तब नायर सन्स कम्पनी का ठेका रद्द कर दें
घुग्घुस स्थित रेलवे साइडिंग पर वैगनों से चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केन्द्र में कोयला आपूर्ति का ठेका नायर सन्स कम्पनी को दिया गया है. उक्त रेलवे साइडिंग पर वेकोलि के खान से कोयला लाया जाता है. इसे छांट कर उत्तम दर्जे का कोयला चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत निर्माण केन्द्र में पहुँचाने की जिम्मेदारी नायर सन्स कम्पनी की है, परंतु वह मिट्टी-पत्थर मिश्रित कोयला सीटीपीएल को आपूर्ति कर रही है. इसलिए नायर सन्स कम्पनी की अनियमितता की जाँच कर दोषी पाये जाने पर कम्पनी का ठेके रद्द की जाए. इस आशय की विज्ञप्तियाँ मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावणकुले को भेजकर सघन सीबीआई से जाँच की माँग की गई है.
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