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नागपुर: ऑन लाइन पेमेंट सिस्टम का खामियाजा इन दिनों मिड डे मील अर्थात मध्यान्ह भोजन आपूर्तिकर्ताओं को उठाना पड़ रहा है। आलम यह है कि अक्टूबर से नवंबर के दरम्यान किए जानेवाले बिल भुगतान लटके हुए हैं। मध्यान्ह भोजन करानेवाले ठेकेदारों को जिला परिषद के शालेय पोषणाहार विभाग के चक्कर काटने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में 2850 शालाओं को मध्यान्यह भोजन का लाभ दिया जाता है। बच्चों को स्कूल में गर्म आहार उपलब्ध कराने के लिए यह योजना चलाई जाती है। लेकिन बिना बिल भुगतान के ठेकेदारों को आहार आपूर्ति के लिए ब्याज पर पैसे लेकर विद्यार्थियों को खाना उपलब्ध कराना पड़ रहा है। यह स्थिति तब है जब ठेकेदारों को यह भोजना प्रत्येक छात्र 4.92 पैसे में उपलब्ध कराना पड़ता है।
जिला परिषद के शालेय पोषाहार योजना के तहत जिले के मिड डे मिल से जुड़ी संस्थाओं के अक्टूबर, नवंबर व दिसंबर माह के बिलों का भुगतान नहीं हो पाया है। यह निधि तकरीबन 3 करोड़ रुपए से अधिक के होने की जानकारी प्राप्त हुई है। शालेय पोषाहार योजना के विषय के जानकार दीपक शेंडे ने बताया कि जब तक पैसा सरकार उपलब्ध नहीं कराती तब तक स्कूल के प्राध्यापकों को इस योजना का खर्च वहन करना होगा।
ऑनलाइन पद्धति से जब से पेमेंट सिस्टम शुरु किया गया है तब से भुगतान में बहुत विलंब हो रहा है। जबकि इससे पहले ही अगस्त से सितंबर के बिल नवंबर माह में ही क्लियर हो चुके थे। यहां से बिल बनाने के बाद इसे पुणे स्थित मुख्यालय भेजा जाता है, वहां से बिल को मंजूरी मिलती है और विभागों के खातों में पैसा जमा होता है। इसके बाद पोषाहार विभाग सम्बंधित आपूर्तिकर्ताओं के बिलों का भुगतान करता है।
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