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    Published On : Fri, Dec 21st, 2018

    लाल फ़ीताशाही में लटके महीनों से ठेकेदारों के भुगतान बिल

    मनपा प्रशासन,वित्त विभाग मौन

    नागपुर : मनपा की ख़ाली तिजोरी से विकासकार्य तो प्रभावित हो ही रहा है, लेकिन जिन ठेकेदारों ने काम पूरा कर दिया है उनके भी बिल महीनों से पेंडिंग पड़े हुए हैं. इसके पीछे कनिष्ठ अभियंता व उपअभियंता की मनमानी सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है.

    ज्ञात हो कि सतरंजीपुरा के उपअभियंता कोहाड़ हैं. इनके अधीन मनपा के पंजीकृत ठेकेदारों ने कार्यादेश, सम्बंधित नगरसेवक, पदाधिकारी, अधिकारी के संयुक्त दिशा-निर्देश पर साल-डेढ़ साल पूर्व लाखों रुपए मूल्य के ठेकों को काम किया था. लेकिन तब से कोहाड़ सम्बंधित ठेकेदारों के बिल बनाने में आनाकानी कर रहे हैं. जबकि नीचे से लेकर ऊपर तक अमूमन सभी ठेकेदार कमीशन देते ही हैं.

    प्राप्त जानकारी के अनुसार उपअभियंता का इस मामले में तर्क है कि ऐसे कुछ मामले में पदाधिकारी विशेष ने बिल न तैयार करने का निर्देश दिया हैं. जबकि इनका कहना यह भी है कि ठेकेदार ने उक्त पदाधिकारी को न सिर्फ कमीशन बल्कि उसके कुछ परिसर का ‘रेनोवेशन’ भी किया. जिस पर लाखों का खर्च आया. इसके बावजूद पदाधिकारी द्वारा बनाए गए दबाव के आगे उपअभियंता नतमस्तक हैं. इस उपअभियंता के पास ठेकेदारों के तकरीबन एक करोड़ के आसपास बिल (निर्माण) पेंडिंग हैं. उक्त प्रकरण की जानकारी वार्ड अधिकारी प्रकाश वराडे को होने के बाद भी उनकी चुप्पी समझ से परे है.

    दूसरा मामला गांधीबाग ज़ोन से सम्बंधित है. इस ज़ोन के कनिष्ठ अभियंता पुरी अपने कार्यक्षेत्र में करने वाले ठेकेदारों का काम पूरा होने के बाद भी जनवरी २०१८ से किसी का बिल नहीं बनाया. जबकि सम्बंधित नगरसेवकों की सिफारिश पर काम पूरा होने और ३ दफे मौका जांच होने के बाद पुनः निरीक्षण का दबाव बनाकर टालमटोल करने में जुटे हैं. इनके पास भी लाखों के बिल निर्माण हेतु पेंडिंग हैं. इस मामले की जानकारी वार्ड अधिकारी अशोक पाटिल को दी गई, उन्होंने ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया.

    उल्लेखनीय यह है कि मनपा की कार्यप्रणाली ध्वस्त हो चुकी है. नगरसेवकों और पदाधिकारियों को डाकिया बना के फाइलें लेकर टेबल दर टेबल भटकना पड़ रहा है. तो दूसरी ओर कनिष्ठ और उपअभियंता ‘टेबल तोड़ अभियान’ में लीन होकर कमीशन समेटने में मदमस्त हैं.
    मनपा प्रशासन भी कार्यकारी अभियंता तक पहुँचता है. इसके नीचे सभी के सभी अपनी डपली अपनी राग से जनप्रतिनिधियों को अड़चन देते नजर आ रहे हैं. वित्त विभाग में फाइलें गुम हो जाती हैं. इस विभाग में खर्च करने वालों को तरजीह दी जाती है.

    सत्तापक्ष नेतृत्वकर्ता से उनके पक्ष-विपक्ष के नगरसेवकों ने ध्यानाकर्षण करवाया है कि व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ टेबल की संख्या आधी की जाए. साथ ही प्रत्येक कामों की समीक्षा-अंकेक्षण तय समय में पूरा करवाने की जिम्मेदारी निश्चित की जाए. अन्यथा नगरसेवकों को डाकिया बना दिया जाएगा.

    साथ ही उक्त प्रकरण के दोषियों पर कानूनन कार्रवाई की जाए वर्ना नगरसेवकों का अस्तित्व खतरे में आ जाएगा व मनपा में ठेकेदारी करने वाले उंगलियों पर गिनने लायक रह जाएंगे. वैसे भी यह नौबत आन चुकी है कि एक-एक टेंडर ४-५ बार ‘रिकॉल’ हो रहे हैं!


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