Published On : Tue, Jun 6th, 2017

खस्ताहाल मनपा कर रही विसर्जन टैंक निर्माण पर रु. 95 लाख खर्च -मूर्ती विसर्जन के लिए गांधीसागर तालाब में बनाया जा रहा है टैंक

नागपुर: नागपुर महानगर पालिका की ओर से गांधीसागर सागर तालाब में एक और तालाब को बनाने की मंजूरी दी गई है. जिसके लिए मनपा की ओर से 95 लाख रुपए भी मंजूर किए गए हैं. पिछले वर्ष 2016 में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी. दो महीने पहले यह कार्य शुरू हुआ है. जो और […]

Gandhisagar Lake
नागपुर:
 नागपुर महानगर पालिका की ओर से गांधीसागर सागर तालाब में एक और तालाब को बनाने की मंजूरी दी गई है. जिसके लिए मनपा की ओर से 95 लाख रुपए भी मंजूर किए गए हैं. पिछले वर्ष 2016 में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी. दो महीने पहले यह कार्य शुरू हुआ है.

जो और कुछ महीने चलेगा. यह तालाब इसलिए बनाया जा रहा है क्योकि गणेश विसर्जन के लिए इस तालाब में गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया जा सके. इस तालाब के बनने के बाद गांधीसागर तालाब में गणेश मूर्ती विसर्जन पर पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी ताकि मुख्य तालाब प्रदूषित न हो. लेकिन ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिस मनपा के पास कर्मचारियों को देने के लाले पड़े हुए है. वह दस दिन के लिए 95 लाख रुपए लगा रही है. हालांकि यह कार्य कृत्रिम तालाब और टैंक से भी हो सकता है. जिसकी लागत बहुत कम है. हर वर्ष महानगर पालिका द्वारा कृत्रिम तालाब और टैंक के माध्यम से भी गणेश विसर्जन किया जाता है. हालांकि जानकारों का यह भी कहना है कि अगर यह टैंक तालाब के अंदर न बनाते हुए बाहर बनाते तो इसकी लागत आधी से भी कम होती.

इस बारे में नागपुर महानगर पालिका के इंजीनियर मोहम्मद इजराइल ने बताया कि पिछले वर्ष टेंडर निकाला गया था. लेकिन कोई भी ठेकेदार नहीं मिला चार ठेकेदारों के इंकार के बाद पांचवें ठेकदार को यह काम दिया गया. हेरिटेज कमिटी की ओर से मंजूरी मिल चुकी है. इस टैंक का पानी तालाब में न मिले .इसके लिए पूरी सतर्कता बरती जा रही है. इसको पूरा करने का टारगेट एक साल का है. लेकिन इस गणेश चतुर्थी में काम को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि कृत्रिम तालाब और टैंक भी बनाए जाते. लेकिन वह हमेशा के लिए नहीं होता. लेकिन यह टैंक स्थाई रूप से हमेशा के लिए उपयोग में आएगा.

तो वहीं इस बारे में ग्रीन विजिल संस्था के संस्थापक कौस्तुभ चटर्जी ने बताया कि इस टैंक को बनाने में जितना खर्च आ रहा है. अगर इसी टैंक को तालाब के बाहर बनाया जाता, तो इसकी लागत कम होती. यहां तक कि आधे से भी कम क़ीमत पर यह सोनेगांव तालाब के बाहर बनाया गया था. उसी तरह से इसको भी बनाना चाहिए था.

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