
नागपुर: निजी सचिव को आधार बनाते हुए कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने दिल्ली में गड़करी के निजी सचिव वैभव डांगे की संस्था इंडियन फ़ेडरेशन ऑफ़ ग्रीन एनर्जी को सरकारी फंडिग किये जाने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस में पत्रकारों से बात करते हुए जयराम ने कहाँ की शुक्रवार ( 24 ) नवंबर को पूना में एक सेमिनार का आयोजन किया गया है जिसका विषय है परिवहन ईंधन में ईथेनॉल की उपयोगिता,इस आयोजन में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय भी शामिल है। उन्होंने सवाल उठाया की कैसे एक केंद्रीय मंत्री अपने निजी सचिव की संस्था से न केवल जुड़ सकता है बल्कि उसे मदत भी कर सकता है यह कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंट्रेस्ट का मामला है जो एक तरह का भ्रष्टाचार है।
रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज के माध्यम से उपलब्ध दस्तावेज़ का हवाला देते हुए कांग्रेस ने बताया की डांगे की संस्था का ऑफिस नई दिल्ली के टॉयटॉस मार्ग पर स्थित है आश्चर्य की बात है की संस्था को कमरा किसी और ने नहीं राजीव बोरटकर ने दिया है। बोरटकर पूर्ति के डायरेक्टर होने के साथ ही आयएफजेेई के साथ भी जुड़े है। अपने पास मौजूद दस्तावेज़ को सार्वजनिक करते हुए जयराम ने कहाँ की चार साल पहले बनी कंपनी का बैलेंस शुरुवाती दौर में शून्य था और आज की तारीख में उसके पास डेढ़ करोड़ रूपए है। यह संस्था लगातार कार्यक्रम कर रही है भले ही अब मामला जाँच में होने के बाद वैभव डांगे ने निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया हो लेकिन अब भी 50 फीसदी हिस्से दारी उन्ही ही है। इस मामले को गंभीर बताते हुए कांग्रेस ने गड़करी के निजी सचिव से इस्तीफ़े की माँग भी है।
क्या है कंपनी का काम
इंडियन फ़ेडरेशन ऑफ़ ग्रीन एनर्जी एक गैर सरकारी संस्था है जो ईंधन के वैकल्पिक स्त्रोतों के प्रचार और प्रसार का काम करती है। इस संस्था से देश की कई नामचीन राजनीतिक, सामाजिक, व्यावसायिक और शैक्षणिक शख्ससियते जुडी है। आनंद महिंद्रा, राजीव बजाज,केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी, सुरेश प्रभु भी इस संस्था ने जुड़े है। कंपनी से जुड़े आरोपों को लगाते हुए जयराम रमेश ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस से सूत्र पर स्वार्थों का विरोधभास करार दिया। संस्था को प्राप्त सारा पैसा सरकारी है अलग-अलग मंत्रालयों ने यह पैसा दिया है। यह नरेंद्र मोदी स्टाइल स्टार्टअप है आयएफजेेई को फंडिग से जुड़े इस मामले की गंगोत्री गड़करी है।
कांग्रेस ने मामला उठाते हुए पूछे सवाल मांगी सफाई
क्या वरिष्ठ मंत्री के पीए की कंपनी से सहयोगी मंत्री के साथ जुड़ना और उसे मदत करना पद की आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है ?
गड़करी इस मामले पर सफ़ाई दे की उन्हें अपने पिए की इस संस्था की जानकारी थी या नहीं ?
न खाऊंगा न खाने दूँगा की बात कहने वाले प्रधानमंत्री बताये बीजेपी के मंत्रियो और नेताओ के करीबियों से जुडी सामने आ रहे मामले कनफ्लिक्ट ऑफ़ इंट्रेस्ट के है या नहीं है ?
गड़करी स्पष्ट करे की वह निजी संस्था का समर्थन करते है ?
रमेश ने अपने आरोपों में जय शाह,शौर्य डोभाल और अब वैभव डांगे से जुड़े मामले को एक जैसा बताते हुए प्रधानमंत्री से सफ़ाई देने की मांग की।
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